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    शहीद मेजर विभूति की पत्नी भी बनेंगी सैन्य अफसर, पढ़ि‍ए पूरी खबर

    By Sunil NegiEdited By:
    Updated: Tue, 18 Feb 2020 08:31 PM (IST)

    शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की पत्नी निकिता की। पति की शहादत के बाद अब वह देश की सेवा को उनकी ही राह चल पड़ी हैं। सैन्य अफसर बनने की ओर वह कदम बढ़ा चुकी हैं।

    शहीद मेजर विभूति की पत्नी भी बनेंगी सैन्य अफसर, पढ़ि‍ए पूरी खबर

    देहरादून, जेएनएन। देश के एक मोर्चे पर हमारे जांबाज डटे होते हैं तो दूसरे मोर्चे उनकी मां, बहन और पत्‍नी। यह उनका साहस ही है, जिसके बूते हमारे जांबाज बिना किसी चिंता देश पर कुर्बान होने के लिए हर समय तत्पर रहते हैं.. और सलाम कीजिए उन महिलाओं को, जब कोई वीर तिरंगे में लिपटकर घर आता है तो वह अपने दर्द को पीछे छोड़कर साहस की एक नई इबारत लिखने लगती हैं। 

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    हम बात कर रहे हैं शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल की पत्नी निकिता की। पति की शहादत के बाद अब वह देश की सेवा को उनकी ही राह चल पड़ी हैं। सैन्य अफसर बनने की ओर वह कदम बढ़ा चुकी हैं। टेस्ट व साक्षात्कार वह क्वालिफाई कर चुकी हैं और उन्हें उम्मीद है कि मेरिट में भी वह अपना स्थान बना लेंगी।

    शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल देहरादून के नेशविला रोड (डंगवाल मार्ग) के रहने वाले थे। वह बीती 18 फरवरी को आंतकी मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को आतंकवादियों ने सीआरपीएफ की टुकड़ी पर फिदायीन हमला किया था। इसके तीन दिन बाद यहां पर आतंकियों व सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ हुई। जिसमें मेजर विभूति शहीद हो गए थे। 

    34 वर्षीय मेजर विभूति ढौंडियाल सेना के 55 आरआर (राष्ट्रीय राइफल) में तैनात थे। वह तीन बहनों के इकलौते भाई थे। वर्ष 2018 अप्रैल माह में उनकी शादी हुई थी। शादी को एक साल भी नहीं हुआ था, जब उनकी शहादत की खबर आ गई। पर उनकी पत्नी निकिता ने न केवल खुद को, बल्कि परिवार को भी संभाला। शहीद पति को अंतिम विदाई देते वक्त उन्होंने जो हिम्मत दिखाई, वह अब भी उनके हौसले को बयां करती है। वह ताबूत के पास खड़ी रहीं और पति का चेहरा हाथों से चूमकर उन्हें आई लव यू कहा। उन्हें सैल्यूट किया। अब वह पति के ही नक्शे कदम पर चल पड़ी हैं। वह दिन दूर नहीं, जब वह उनकी ही तरह फौजी वर्दी में दिखाई देंगी।

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    मेजर विभूति के अदम्य साहस को याद रखेगा दून

    शहीद मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के अदम्य साहस को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत शौर्य चक्र से अलंकृत किया गया है। उन्होंने न केवल कई सैन्य ऑपरेशन में हिस्सा लिया, बल्कि कई में अग्रणी भूमिका में भी रहे। इन ऑपरेशन में कई आतंकियों का सफाया हुआ। उस रात सेना ने ऑपरेशन शुरू किया तो आतंकवादियों ने गोलीबारी शुरू कर दी। टीम का नेतृत्व कर रहे मेजर विभूति शंकर ढौंडियाल के गले और सीने में गोली लग गई। पर मेजर विभूति और उनकी टीम ने आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब दिया और इस कार्रवाई में दो आतंकवादी मारे गए। इसी मुठभेड़ में पुलवामा हमले का मास्टर माइंड अब्दुल राशिद गाजी भी ढेर हो गया था।

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