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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 05, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता में देरी से खिलाड़ियों को हो रहा ये नुकसान

By BhanuEdited By:
Published: Fri, 05 Jul 2019 09:54 AM (IST)Updated: Fri, 05 Jul 2019 09:05 PM (IST)

उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता का फैसला बीसीसीआइ में जितना लटका रहेगा उतना ही नुकसान यहां के खिलाड़ियों को उठाना पड़ेगा।

उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता में देरी से खिलाड़ियों को हो रहा ये नुकसान
उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता में देरी से खिलाड़ियों को हो रहा ये नुकसान

देहरादून, जेएनएन। उत्तराखंड क्रिकेट की मान्यता का फैसला बीसीसीआइ में जितना लटका रहेगा, उतना ही नुकसान यहां के खिलाड़ियों को उठाना पड़ेगा। मान्यता की देरी के चलते पिछले साल की तरह इस साल भी आयोजन समिति को टीम चयन समेत अन्य समस्याओं से जूझना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में आनन-फानन में टीमें चुनी जाएंगी, जिसका खामियाजा कई उभरती प्रतिभाओं को झेलना पड़ सकता है।

घरेलू सत्र 2018-19 में बीसीसीआइ ने उत्तराखंड को बिना मान्यता दिए बीच का रास्ता निकालकर यहां के खिलाड़ियों को अपने घरेलू सत्र में शामिल कर लिया था। खिलाड़ियों ने पहले ही सीजन में शानदार प्रदर्शन कर अपनी प्रतिभा का लोहा भी मनवाया। 

राज्य की किसी भी एसोसिएशन को मान्यता नहीं होने से खिलाड़ियों को सत्र के बाद भी खासा नुकसान झेलना पड़ा है। सत्र समाप्ति के बाद खिलाड़ियों को ट्रेनिंग के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। वहीं, अन्य राज्यों की मान्यता प्राप्त एसोसिएशनों ने खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के लिए विशेष शिविर लगाकर उन्हें ट्रेनिंग दी। 

पिछले 18 सालों से राज्य में क्रिकेट के संचालन के लिए क्रिकेट संघ आपसी लड़ाई लड़ रहे हैं। इससे अभी तक खिलाड़ियों को काफी नुकसान हो चुका है। अब जब 17 अगस्त से बीसीसीआइ का नया सत्र शुरू होने को है। यहां के खिलाड़ियों की कोई सुध लेने वाला नहीं। 

अन्य राज्यों में खिलाडिय़ों के लिए विशेष शिविर चल रहे हैं। वहीं, उत्तराखंड में आपसी लड़ाई के चलते मान्यता पर तलवार लटकी पड़ी है। पिछले सत्र में टीमों को क्रिकेट किट, ड्रेस समेत अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने वाली कंपनी ने भी सभी आयु वर्गों की टीमों के खिलाड़ियों का माप मांगने शुरू कर दिए है, लेकिन अभी तक टीम चयन तो दूर मान्यता को लेकर उत्तराखंड की तस्वीर साफ नहीं हो रही है। 

अब अंतिम समय में आनन-फानन में चार से छह दिन के कैंप लगाए जाएंगे, जिसमें खिलाड़ियों को अधूरा प्रशिक्षण देकर मैदान में उतार दिया जाएगा। क्रिकेट संघ भी मान्यता न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ रहे हैं।

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