कीवी और ड्रैगन फ्रूट से बदलेगी किसानों की किस्मत, बंजर भूमि पर बरसेगा पैसा
उत्तराखंड में किसानों की आय बढ़ाने और पलायन रोकने के लिए कीवी और ड्रैगन फ्रूट की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट योजना इस साल ...और पढ़ें

उत्तराखंड में कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट योजना इस वर्ष से धरातल पर आकार लेने जा रही है।
राज्य ब्यूरो, जागरण देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड अब केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता ही नहीं, बल्कि खेतों में उगने वाले विदेशी प्रजाति के फलों के लिए भी जाना जाएगा।इस कड़ी में किसानों को परंपरागत खेती के स्थान पर नकदी फसलों को प्रोत्साहित करने के दृष्टिगत लाई गई कीवी नीति और ड्रैगन फ्रूट योजना इस साल से धरातल पर आकार लेने जा रही है।
उद्यान विभाग ने इसके लिए किसानों के चयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी है। इन योजनाओं के अंतर्गत मिलने वाली सब्सिडी व तकनीकी सहायता को लेकर पहाड़ से लेकर मैदान तक के किसान उत्साहित हैं।
राज्य की कृषि व्यवस्था पर नजर दौड़ाएं तो यह तमाम झंझावत से जूझ रही है। गांवों से पलायन, मौसम की मार, वन्यजीवों से फसल क्षति जैसे कारणों से कृषि व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
इसे देखते हुए सरकार ने परंपरागत खेती के स्थान पर नकदी फसलों के उत्पादन पर जोर दिया है। इस क्रम में राज्य की परिस्थितियों के अनुरूप कीवी व ड्रैगन फ्रूट के लिए पिछले वर्ष योजनाएं लाई गईं। इन्हें अब धरातल पर उतारने के लिए कसरत तेज की गई है।
कीवी: पहाड़ के लिए सोना
राज्य की जलवायु कीवी की खेती के लिए उत्तम मानी गई है। सरकार ने इसे भविष्य की खेती करार दिया है। इसके लिए लाई गई कीवी नीति के तहत कीवी उद्यान स्थापना के लिए 12 लाख रुपये प्रति एकड़ पर 70 प्रतिशत की सब्सिडी का प्रविधान किया गया है।
सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक 3500 हेक्टेयर क्षेत्र में कीवी उगाना है, जिससे 17,500 से ज्यादा किसान लाभान्वित होंगे। कीवी नीति के तहत हरिद्वार और उधमसिंह नगर जिलों को छोड़कर राज्य के शेष 11 जिलों में योजना को मिशन मोड पर संचालित करने के लिए 894 करोड़ रुपये की कार्ययोजना तैयार की गई है। वर्तमान में राज्य में 683 हेक्टेयर में 382 मीट्रिक टन कीवी का उत्पादन हो रहा है।
ड्रैगन फ्रूट: बंजर भूमि पर बरसेगा पैसा
ड्रैगन फ्रूट की खेती राज्य के उन क्षेत्रों के लिए मुफीद है, जहां पानी की कमी है या वन्यजीवों का आतंक अधिक है। ड्रैगन फ्रूट योजना के तहत उद्यान स्थापना के लिए आठ लाख प्रति एकड़ का 80 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। शेष 20 प्रतिशत किसान स्वयं वहन करेगा। यह कम मेहनत में अधिक मुनाफा देने वाली फल की फसल है।
देहरादून, टिहरी, पौड़ी, नैनीताल, बागेश्वर, हरिद्वार और उधमसिंह नगर जिलों में इस फल की खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। राज्य में वर्तमान में 35 एकड़ क्षेत्र में 70 मीट्रिक टन ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन हो रहा है।
यह होंगे लाभ
- पलायन पर अंकुश : B इन नकदी फसलों से होने वाली उच्च आय युवाओं को गांव में रुकने को प्रेरित करेगी।
- ई-रूपी से पारदर्शी भुगतान: सरकार अब खाद, बीज और सब्सिडी की राशि ई-रूपी वाउचर से सीधे किसानों के मोबाइल पर भेज रही है। इससे बिचौलियों का खेल खत्म होगा।
- बढ़ती मांग : कीवी और ड्रैगन फ्रूट की बाजार में मांग है और बेहतर दाम मिलने से किसानों की झोली भरेगी।
किसानों की आय में वृद्धि के उद्देश्य से राज्य में कीवी व ड्रैगन फ्रूट को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन फलों की भंडारण क्षमता अच्छी होती है और राज्य का वातावरण इनके स्वाद व गुणवत्ता को बढ़ा देता है। किसानों को दाम भी बेहतर मिलेगा। यह योजनाएं राज्य की आर्थिकी के लिए गेम चेंजर साबित होंगी।
- डा एसएन पांडेय, सचिव, कृषि एवं उद्यान।
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