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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 07, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

माटी प्रेम से अभिभूत किशोर अब त्रिवेंद्र सरकार पर बरसे, पढ़िए पूरी खबर

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Published: Sat, 07 Dec 2019 09:04 PM (IST)Updated: Sun, 08 Dec 2019 07:53 PM (IST)

किशोर उपाध्याय के भीतर फिर माटी प्रेम जागा है। लिहाजा भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आहूत नहीं होने को लेकर उन्होंने त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार पर हमला बोला।

माटी प्रेम से अभिभूत किशोर अब त्रिवेंद्र सरकार पर बरसे, पढ़िए पूरी खबर
माटी प्रेम से अभिभूत किशोर अब त्रिवेंद्र सरकार पर बरसे, पढ़िए पूरी खबर

देहरादून, राज्य ब्यूरो। पैतृक गांव पाली में इन दिनों पित्रों के साथ ही भूम्याल-क्षेत्रपाल देवता की पूजा-पाठ में लगे प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के भीतर फिर माटी प्रेम जागा है। लिहाजा भराड़ीसैंण में विधानसभा सत्र आहूत नहीं होने को लेकर उन्होंने त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार पर हमला बोला।

वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में उत्तराखंड में कांग्रेस सरकार को मिली हार का ठीकरा यदि किसी पर फूटा तो वह किशोर उपाध्याय ही रहे। पार्टी हाईकमान ने प्रदेश कांग्रेस की कमान उनके हाथ से ले ली। चुनाव से ठीक एक साल पहले ही दस विधायकों की बगावत के चलते संकट से गुजर रही पार्टी और पार्टी की सरकार के पक्ष में आम कार्यकर्ताओं से लेकर लोगों को लामबंद करने में अहम भूमिका निभाने वाले किशोर को आज भी यह सालता है कि पार्टी के भीतर उनका सही आकलन नहीं हो रहा है। 

अब टिहरी जिले के अपने पैतृक गांव पाली में किशोर अपनी जड़ों से नए सिरे से रूबरू हो रहे हैं। गांव में पूजा-पाठ में लगे किशोर गैरसैंण में विधानसभा सत्र आहूत नहीं किए जाने के विरोध में वहां पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के धरने में शामिल नहीं हो सके, लेकिन अब चुप्पी तोड़ते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने वक्तव्य में कहा कि विधानसभा का सत्र भराड़ीसैण में आहूत न कर त्रिवेंद्र सरकार व भाजपा ने पहाड़ विरोधी मानसिकता जाहिर की।

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राजधानी के मुद्दे को भाजपा सिर्फ राजनैतिक लाभ लेने के लिए इस्तेमाल करती है। उन्होंने कहा कि वह दो राजधानियों की अवधारणा के खिलाफ हैं। हिमाचल में यह प्रयोग सफल नहीं रहा है। साथ ही ये भी कहा कि अगर शीतकालीन राजधानी बनानी है तो भराड़ी सैण को बनाया जाए, जिससे हुक्मरान पहाड़ी क्षेत्र की (ठंड बुखा सकें) समस्याओं को महसूस कर सकें।

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