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    Kedarnath Dham: केदारनाथ में रक्षाबंधन से एक दिन पहले होता है भतूज मेला, मंदिर को सजाया 11 कुंतल फूलों से

    Kedarnath Dham केदारनाथ धाम में भतूज मेले को लेकर तैयारी पूरी हो गई है। इस दौरान केदारनाथ मंदिर को 11 कुंतल फूलों से सजाया गया है। केदारनाथ में भतूज मेला बुधवार को होगा। इस दौरान भोले बाबा के श्रृंगार का दृश्य आलौकिक होता है।

    By Sunil NegiEdited By: Updated: Tue, 09 Aug 2022 07:04 PM (IST)
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    Kedarnath Dham: केदारनाथ में अन्नकूट मेले के लिए मंदिर को 11 कुंतल फूलों से सजाया गया।

    संवाद सहयोग, रुद्रप्रयाग: Kedarnath Dham केदारनाथ धाम ( Kedarnath) में रक्षाबंधन (Raksha Bandhan 2022) के एक दिन पहले आयोजित होने वाले अन्नकूट मेले ( Annakut Mela) को लेकर तैयारी पूरी हो गई हैं। इसके लिए केदारनाथ मंदिर को 11 क्विंटल फूलों से सजाया है। भगवान केदारनाथ को नए अनाज का भोग चढ़ाने के साथ ही उत्सव भतूज अन्नकूट बुधवार रात्रि को आयोजित होगा।

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    सदियों से चली आ रही है यह परंपरा

    केदारनाथ मंदिर में अन्नकूट मेला (भतूज) मनाने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। रक्षाबंधन से ठीक पहले दिन मेले का आयोजन होता है। मेले में सर्वप्रथम केदारनाथ मंदिर (Kedarnath Yatra 2022) के मुख्य पुजारी भगवान शिव के स्वयंभू लिंग की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

    अलौकिक होता है भोले बाबा के श्रृंगार का दृश्य

    इसके बाद नए अनाजों के लेप लगाकर स्वयंभू लिंग का श्रृंगार करते हैं। इस दौरान भोले बाबा के श्रृंगार का दृश्य अलौकिक होता है। भक्तजन दो बजे रात्रि से सुबह चार बजे तक श्रृंगार किए गए भोले बाबा ( Baba kedar) के स्वयंभू लिंग के दर्शन करते हैं।

    • इसके बाद भगवान को लगाया अनाज के इस लेप को यहां से हटाकर किसी साफ स्थान पर विसर्जित किया जाता है।
    • मंदिर समिति के कर्मचारी मंदिर की साफ सफाई करने के उपरांत ही अगले दिन भगवान की नित्य पूजा-अर्चना की जाती है।
    • अन्नकूट मेले को लेकर बदरी-केदार मंदिर समिति (Badri Kedar Temple Committee) ने तैयारी शुरू कर दी है।
    • मान्यता है कि नए अनाज में पाए जाने वाले विष को भोले बाबा स्वयं ग्रहण करते हैं। इसलिए इस त्योहार को मनाने की परंपरा है।

    ज्योर्तिलिंग को ढका जाता पके हुए चावलों से

    मंदिर समिति के मीडिया प्रभारी हरीश गौड़ ने बताया कि मंदिर को 11 कुंतल फूलों से सजाया है। बताया कि बुधवार को सायंकाल की पूजा के बाद ज्योर्तिलिंग ( Jyotirlinga ) को पके चावलों से ढक दिया जाएगा और रात्रि को दो बजे से चार बजे सुबह तक श्रद्धालु दर्शन करेंगे। त

    त्पश्चात चावलों के भोग को मंदाकिनी नदी में प्रवाहित किया जाएगा। बताया कि श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय ने भतूज को लेकर तैयारी के निर्देश दिए।

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