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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 28, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

India New CDS: नवनियुक्त सीडीएस अनिल चौहान का देहरादून में है घर, यहां अभी चल रहा नवीनीकरण का कार्य

By JagranEdited By: Sunil Negi
Published: Wed, 28 Sep 2022 11:35 PM (IST)

India New CDS नवनियुक्त सीडीएस ले. जनरल अनिल चौहान (सेनि) मूलरूप से पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लाक के ग्रामसभा रामपुर ...और पढ़ें

नवनियुक्त सीडीएस ले. जनरल अनिल चौहान (सेनि) का दून के वसंत विहार में भी उनका पुश्तैनी मकान है।
नवनियुक्त सीडीएस ले. जनरल अनिल चौहान (सेनि) का दून के वसंत विहार में भी उनका पुश्तैनी मकान है।

जागरण संवाददाता, देहरादून। India New CDS: नवनियुक्त सीडीएस ले. जनरल अनिल चौहान (सेनि) वैसे मूलरूप से पौड़ी जिले के रहने वाले हैं, पर दून के वसंत विहार में भी उनका पुश्तैनी मकान है। जहां पर उनके पिताजी रहते हैं।

उनके परिचित बताते हैं कि सैन्य सेवा से सेवानिवृत्त होने के बाद जनरल चौहान ने भी दून में ही रहने का मन बनाया है। वर्तमान में उनके घर में नवीनीकरण कार्य चल रहा है। जिसकी देखरेख के लिए उनकी धर्मपत्नी भी पखवाड़ेभर से दून आई हुई थीं। पति की सीडीएस पद पर नियुक्ति की खबर मिलने पर वह बुधवार सुबह ही दिल्ली रवाना हो गईं।

सुरक्षा के मोर्चे पर उत्तराखंड अग्रणी

उत्तराखंड से संबंध रखने वाले कई अन्य लोग भी देश की सुरक्षा के मोर्चे पर बड़ी जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इनमें प्रथम सीडीएस जनरल बिपिन रावत, पूर्व सेना प्रमुख जनरल बिपिन चंद्र जोशी, पूर्व नौसेना प्रमुख एडमिरल देवेंद्र कुमार जोशी, पूर्व रा प्रमुख अनिल कुमार धस्माना, तटरक्षक बल के मुखिया रहे राजेंद्र सिंह व डीजीएमओ की जिम्मेदारी संभाल चुके ले. जनरल अनिल कुमार भट्ट शामिल हैं। इंटेलीजेंस के मास्टर कहे जाने वाले पूर्व आइबी चीफ और मौजूदा समय में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी उत्तराखंड से हैं।

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रणनीतिक समझ का मिलेगा लाभ

ले. जनरल एमसी भंडारी (सेनि) ने भी केंद्र सरकार के इस निर्णय पर खुशी जताई है। जनरल भंडारी बताते हैं कि वर्ष 2000-2002 में सेना की बारामुला सेक्टर में 19वीं इन्फैंट्री डिविजन को उन्होंने कमान किया। वहीं, 2014 में इस डिविजन की कमान नवनियुक्त सीडीएस के पास रही।

उनकी अक्सर ले. जनरल चौहान के साथ मुलाकात होती थी। शुरुआत से ही वह कुशल प्रशासक रहे हैं। उन्होंने 40 वर्षों से अधिक के करियर में कई कमांड संभाले हैं। उनकी रणनीतिक समझ, जम्मू-कश्मीर और उत्तर-पूर्व भारत में आतंकवाद विरोधी अभियानों में भी लंबा अनुभव और प्रशासनिक क्षमता का लाभ अब देश को सीडीएस के रूप में मिलेगा।

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