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    सहायक नदियों का नहीं होगा ट्रीटमेंट, तो कैसे निर्मल होगी गंगा Dehradun News

    By Raksha PanthariEdited By:
    Updated: Tue, 18 Jun 2019 08:55 PM (IST)

    गंगा में प्रदूषण के लिए सहायक नदियां भी जिम्मेदार हैं लेकिन इनके ट्रीटमेंट को नमामि गंगे में कोई योजना नहीं है। इससे गंगा कैसे निर्मल होगी।

    सहायक नदियों का नहीं होगा ट्रीटमेंट, तो कैसे निर्मल होगी गंगा Dehradun News

    ऋषिकेश, जेएनएन। नमामि गंगे परियोजना के तहत गंगा को निर्मल बनाने के लिए तमाम योजनाएं बनाई गई हैं। गंगा में प्रदूषण के लिए सहायक नदियां भी जिम्मेदार हैं, लेकिन इनके ट्रीटमेंट को नमामि गंगे में कोई योजना नहीं है। इससे गंगा कैसे निर्मल होगी। यह बड़ा सवाल है। 

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    ऋषिकेश में मुनिकीरेती  से लेकर श्यामपुर तक करीब छह छोटी-बड़ी नदियां गंगा में मिलती हैं। जिनमें खारा स्रोत, चंद्रभागा, रंभा, ग्वेला के साथ ही बंगाला नाला आदि शामिल है। इन सभी नदियों और नालों के किनारों पर घना आबादी क्षेत्र है। अधिकांश आबादी सिविल भूमि पर है, जो प्रदूषण का बड़ा कारक नहीं है। मगर, नदी तटों पर बड़ी संख्या में अतिक्रमण भी हो रखा है, जिसमें न तो सीवर की सुविधा है और ना ही ड्रेनेज की। इस अवैध आबादी क्षेत्र का सीवर, कूड़ा-कचरा सीधे इन नदियों और नालों से होकर गंगा में मिलता है, जो गंगा प्रदूषण का एक बड़ा कारण है। 

    नमामि गंगे परियोजना में कई दूषित नालों के शोधन और ट्रीटमेंट की व्यवस्था की गई है। मगर तीर्थनगरी ऋषिकेश के जिन नालों और नदियों की हम बात कर रहे हैं, इनमें से सिर्फ एक रंभा नदी को ट्रीटमेंट के लिए चुना गया है। इसके लिए नमामि गंगे परियोजना के तहत ट्रीटमेंट प्लांट लगाया जाना प्रस्तावित है। हालांकि इस पर अभी तक काम ही शुरू नहीं हो पाया है। जबकि मुनिकीरेती की खारा स्रोत नदी एक सूखी नदी है, जिसमें सिर्फ बरसात में ही पानी आता है। यहां खारा स्रोत के पास आबादी का कूड़ा-कचरा बरसात में पानी के साथ गंगा में जा समाता है। 

    ऋषिकेश में आकर चंद्रभागा नदी गंगा में मिलती है। मगर, यह नदी करीब चार महीने तक निर्जला रहती है और बरसात के दिनों में विकराल रूप धारण करती है। चंद्रभागा नदी में ठीक गंगा के मुहाने पर अवैध बस्ती नदी के दोनों और बसी हुई है। इन बस्तियों का सीवर व कूड़ा कचरा चंद्रभागा नदी से होकर गंगा में पहुंचता है। जिसके उपचार की कोई व्यवस्था नहीं है। श्यामपुर में ग्वेला और बंगाला नाला सदाबहार हैं। यहां भी दोनों नालों के तटों पर घनी आबादी बसी है। बड़ी मात्रा में आबादी का सीवर और अपशिष्ट इन नालों के जरिये गंगा तक पहुंचता है। मगर नमामि गंगे परियोजना में इन नदियों की ट्रीटमेंट की भी कोई व्यवस्था नहीं है। 

    पेयजल निगम की गंगा विंग के परियोजना प्रबंधक संदीप कश्यप ने बताया कि रंभा नदी को शोधित करने के लिए यहां एसटीपी बनाया जाएगा। नमामि गंगे परियोजना में यह योजना शामिल है, जिस पर जल्द ही काम शुरू किया जाएगा। शेष अन्य नदियों से इतना अधिक दूषित जल गंगा में नहीं मिल रहा है। नदियों के किनारे अवैध बस्तियों से जो गंदगी गंगा में मिल रही है उसका ट्रीटमेंट निजी स्तर पर किया जा सकता है। प्रशासन को चाहिए कि नदियों के किनारों से इस तरह की अवैध बस्तियों को हटाए। 

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