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    उम्मीद 2026: उत्तराखंड में थमेगी कंक्रीट माफिया की ''लूट'', सरकार का ''चाबुक'' तैयार

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 02:42 PM (IST)

    उत्तराखंड सरकार इस साल बिल्डरों की मनमानी रोकने और निवेशकों की सुरक्षा के लिए नई नियमावली लागू करेगी। देहरादून में अवैध निर्माण और धोखाधड़ी पर लगाम कस ...और पढ़ें

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    सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका की संयुक्त सख्ती से जगी उम्मीद। जागरण आर्काइव

    अंकुर अग्रवाल, देहरादून। नए साल के साथ उत्तराखंड सरकार ने कंक्रीट माफिया, अवैध बिल्डरों और भूमाफिया के खिलाफ निर्णायक लड़ाई का संकेत दे दिया है। राजधानी देहरादून, जहां वर्षों से अवैध कालोनियों, नदी किनारे निर्माण और सरकारी भूमि पर कब्जों ने शहर की रफ्तार और पर्यावरण दोनों को बिगाड़ा, अब सख्त कार्रवाई का केंद्र बन गया है।

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    सरकार, प्रशासन और न्यायपालिका की संयुक्त सख्ती से यह उम्मीद जगी है कि विकास के नाम पर हो रहे बेतरतीब कंक्रीटीकरण पर अब वास्तविक लगाम लगेगी। साथ ही प्रदेश में निवेश के नाम पर रकम लेकर प्रोजेक्ट अधूरे छोड़ने, तय वादों से मुकरने व ग्राहकों को लूटकर फरार होने वाले ''''कंक्रीट माफिया'''' यानी बिल्डरों पर अब सरकार सख्त कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

    मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर शासन व विकास प्राधिकरण ने बिल्डर गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए एक कड़ी और पारदर्शी नियमावली को लागू करने की तैयारी कर ली है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगेगी और निवेशकों को सुरक्षा भी मिलेगी। नई नियमावली में निवेशकों का पैसा एस्क्रो अकाउंट में जमा होगा व निर्माण की प्रगति के अनुसार बिल्डरों को यह पैसा किश्तों में जारी होगा।

    बता दें कि गुजरे चार-पांच वर्ष में विकास प्राधिकरण एवं पुलिस के पास ऐसे कई मामले आए, जिनमें बिल्डरों ने करोड़ों रुपये लेकर आवासीय प्रोजेक्ट शुरू तो किए, लेकिन बीच में ही निर्माण रोक दिया। कई बिल्डर तो फरार भी हो गए हैं, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ऐसे कई प्रोजेक्ट अधर में हैं, जबकि खरीदार बैंक की किश्त और किराया दोनों का बोझ झेल रहे हैं। बढ़ती शिकायतों एवं निवेशकों को होने वाली परेशानी के दृष्टिगत शासन के निर्देशन में मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) नई नियमावली पर काम शुरू कर चुका है। जल्द इसे शासन के माध्यम से मुख्यमंत्री के समक्ष रखा जाएगा।

    नई नियमावली के प्रमुख बिंदु

    • बिल्डर का अनिवार्य पंजीकरण: हर बिल्डर को प्रोजेक्ट शुरू करने से पहले संबंधित विकास प्राधिकरण व रेरा में पंजीकरण कराना होगा। पंजीकरण के बिना नक्शा स्वीकृत नहीं होगा और न ही बिल्डर कोई विज्ञापन जारी कर सकेगा।
    • एस्क्रो अकाउंट व्यवस्था: निवेशकों से मिली राशि सीधे बिल्डर के हाथ में नहीं जाएगी। पैसा एस्क्रो अकाउंट में जमा होगा और निर्माण की प्रगति के अनुसार बिल्डर को किश्तों में जारी किया जाएगा। इससे पैसों के दुरुपयोग पर रोक लगेगी।
    • प्रोजेक्ट पूरा किए बिना शहर छोड़ने पर रोक: बिल्डरों को प्रोजेक्ट पूरा होने तक शहर छोड़ने पर प्रतिबंध जैसा प्रविधान जोड़ा जा रहा है। अचानक गायब होने या भागने की स्थिति में एफआइआर व आर्थिक दंड का प्रविधान तो होगा ही, साथ ही संबंधित प्रोजेक्ट को सरकार अपने कब्जे में भी ले सकेगी।
    • प्रोजेक्ट की आनलाइन मानिटरिंग: हर प्रोजेक्ट का निर्माण चरण, धनराशि की स्थिति और बिल्डर का प्रोफाइल पोर्टल पर सार्वजनिक होगा। इससे निवेशकों को वास्तविक स्थिति पता चलती रहेगी। नक्शे से हटकर निर्माण मिलने पर प्राधिकरण को तुरंत सीलिंग व मुकदमा दर्ज करने का अधिकार दिया जाएगा।

    उपभोक्ता सुरक्षा प्रविधान

    • तय समय पर फ्लैट हैंडओवर न करने पर जुर्माना
    • तय सुविधाएं नहीं देने पर बिल्डर की जिम्मेदारी तय-खरीदार को रिफंड और ब्याज के प्रविधान किए जाएंगे
    • पैसा गलत जगह खर्च होने पर रोक, ठगी में त्वरित कार्रवाई

    एस्क्रो अकाउंट में यह होती है व्यवस्था

    एस्क्रो अकाउंट ऐसा बैंक अकाउंट होता है, जहां दो या दो से अधिक पक्षों के बीच सौदा पूरा होने तक धनराशि किसी विश्वसनीय तृतीय पक्ष द्वारा सुरक्षित रखी जाती है। समस्त आवश्यकताओं को पूरा करने के बाद धनराशि विक्रेता को भुगतान कर दी जाती है। यदि विक्रेता आवश्यकता पूरी नहीं करता है, तो धनराशि उसी व्यक्ति को या खरीदार को वापस कर दी जाती है। एस्क्रो अकाउंट का इस्तेमाल आमतौर पर अचल संपत्ति के लेन-देन में यह सुनिश्चित करने को होता है कि खरीदार और विक्रेता अपने दायित्वों को पूरा करें। यह व्यवस्था दोनों पक्षों को संभावित धोखाधड़ी से बचाती है।

    दून में अवैध निर्माण पर शिकंजा, बड़े बिल्डरों की सूची तैयार

    दून में अवैध निर्माण और कंक्रीट माफिया पर कार्रवाई केवल प्रतीकात्मक नहीं रहेगी। मसूरी-देहरादून विकास प्राधिकरण व जिला प्रशासन ने दर्जनों स्थानों पर निरीक्षण कर सैकड़ों अवैध निर्माणों को चिह्नित किया है। इनमें बिना मानचित्र स्वीकृति बने भवन, कृषि भूमि पर विकसित कालोनियां और नदी-नालों के बाढ़ क्षेत्र में बने पक्के ढांचे शामिल हैं।

    एमडीडीए के अनुसार, सहस्रधारा, रायपुर, डोईवाला, राजपुर रोड और रिस्पना व बिंदाल नदी किनारे के क्षेत्रों में वर्षों से चले आ रहे मामलों की फाइलें दोबारा खोली गई हैं। कई बड़े बिल्डरों व डेवलपरों की सूची तैयार की गई है, जिन पर आने वाले दिनों में सीलिंग, ध्वस्तीकरण और आपराधिक मुकदमे दर्ज हो सकते हैं। प्राधिकरण ने साफ किया है कि अब केवल नोटिस जारी कर मामले ठंडे बस्ते में नहीं डाले जाएंगे। जोर इस बात पर भी है कि अवैध निर्माण रोकने के साथ-साथ जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी तय की जाए।

    निवेशकों के बनेगी 'सुरक्षा ढाल'

    रियल एस्टेट सेक्टर में लंबे समय से चल रही अव्यवस्थाओं और निवेशकों के साथ हो रही ठगी पर नए साल में प्रभावी रोक लगने की उम्मीद है। नई नियमावली से न सिर्फ निवेशकों को राहत मिलेगी, बल्कि बेतरतीब निर्माण व अवैध बिल्डर फ्लोर की लगातार बढ़ रही समस्या पर भी लगाम कसेगी। रियल एस्टेट सेक्टर में बढ़ती ठगी, अधूरे प्रोजेक्ट और निवेशकों के पैसे अटकने जैसी समस्याओं को देखते हुए सरकार जो नया कदम उठाने जा रही है, उससे हजारों निवेशकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। बिल्डरों की मनमानी पर लगाम लगाने व उपभोक्ताओं का हित सुरक्षित रखने के लिए तैयार की जा रही नई नियमावली अब निवेशकों की ''''सुरक्षा ढाल'''' बनकर सामने आएगी।

    निवेशकों को बड़ी राहत, अब नहीं फंसेगा पैसा

    शहर में कई प्रोजेक्ट ऐसे हैं जहां बिल्डरों ने निवेशकों के लाखों-करोड़ों रुपये अटका दिए। नई व्यवस्था में न केवल निवेशकों की धनराशि सुरक्षित रहेगी, बल्कि प्रोजेक्ट समय पर पूरे होने की संभावना मजबूत होगी। इसी के साथ तय समय-सीमा में घर मिलने की गारंटी भी रहेगी। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) के उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का कहना है कि नियमावली बनने के बाद न केवल निवेशकों की परेशानी कम होगी, बल्कि शहर की भविष्य की विकास योजना भी मजबूत और संतुलित होगी।

    शहर की व्यवस्था सुधरेगी, रुकेगा अवैध निर्माण

    देहरादून में लंबे समय से बिना अनुमति के फ्लोर बढ़ाने, स्टिल्ट पार्किंग पर कब्जा करने के साथ पड़ोसियों के अधिकारों का उल्लंघन करने जैसी समस्याएं बढ़ रही थीं। हालांकि, एमडीडीए ने इसका संज्ञान लेकर न केवल बिल्डर फ्लोर दो मंजिल से अधिक बनाने पर प्रतिबंध लगा दिया है बल्कि स्टिल्ट पार्किंग भी अनिवार्य कर दिया है। नई नियामवली में नक्शे से हटकर निर्माण पर तुरंत कार्रवाई होगी, पार्किंग और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा रोकने में मदद मिलेगी और शहर की यातायात और रहन-सहन व्यवस्था भी सुधरेगी।

    आनलाइन पारदर्शिता से बढ़ेगा भरोसा

    प्रोजेक्ट की अनुमति से लेकर निर्माण की स्थिति तक की जानकारी आनलाइन उपलब्ध होगी। इससे निवेशक आसानी से पता कर सकेंगे कि जिस प्रोजेक्ट में वे पैसा लगा रहे हैं, उसकी वास्तविक स्थिति क्या है। नियमावली में एक समर्पित शिकायत निस्तारण सेल बनाने का भी प्रस्ताव है। इससे निवेशक अपनी समस्या सीधे दर्ज करा सकेंगे और कार्रवाई भी समयबद्ध होगी। यह नियमावली न केवल निर्माण कार्यों को सुव्यवस्थित करेगी, बल्कि उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा भी सुनिश्चित करेगी।

    पूरी तरह एक्शन मोड में एमडीडीए

    घर खरीदने वालों को ठगी, भ्रमित करने वाले दावों और अवैध निर्माण की मार से बचाने के लिए अब एमडीडीए पूरी तरह सक्रिय हो गया है। शहर में बिल्डर गतिविधियों में तेजी से बढ़ रही अनियमितताओं को देखते हुए अब बिल्डर लाबी को किसी तरह की राहत नहीं मिलती दिख रही। शहर में बिल्डर फ्लोर संस्कृति के तेजी से बढ़ने, अवैध अतिरिक्त निर्माण, पार्किंग पर कब्जा, बिना अनुमति मंजिलें खड़ी करना, नक्शों में मनमानी जैसी समस्या लगातार सामने आ रही हैं। प्राधिकरण को शिकायतें मिल रही थीं कि कई बिल्डर निवेशकों को अलग तरह की सुविधाओं का वादा करते हैं, लेकिन कब्जा देते समय स्थिति पूरी तरह अलग निकलती है। अब इन घटनाओं को रोकने के लिए नियमों को और सख्त व स्पष्ट बनाने की तैयारी है।

    नई नियमावली पर काम किया जा रहा है। उम्मीद है कि इस वर्ष यह लागू होने के बाद किसी भी बिल्डर को निवेशकों के पैसे लेकर गायब होने नहीं दिया जाएगा। नई नियमावली में हर कदम पर पारदर्शिता व जवाबदेही तय की जा रही है। इससे निवेशकों में उम्मीद बढ़ेगी व उनकी मेहनत की कमाई सुरक्षित रहेगी। बिल्डर सेक्टर में अनुशासन और भरोसे का माहौल भी बन पाएगा। - बंशीधर तिवारी, उपाध्यक्ष एमडीडीए

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