देहरादून, राज्य ब्यूरो। कोविड-19 से बचाव को लागू लॉकडाउन के चलते गरीब और आम आदमी को फिर राहत दी गई है। अंत्योदय और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (एनएफएसए) के प्राथमिक परिवारों समेत 13.30 लाख परिवारों को तीन महीने तक प्रति व्यक्ति पाच किलो चावल मुफ्त मिलेगा। हर महीने वाले नियमित खाद्यान्न से उन्हें यह अतिरिक्त मिलेगा। 

उत्तराखंड के लोगों को ये मुफ्त चावल प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत दिया जाएगा। खाद्य सचिव सुशील कुमार ने बुधवार को इस संबंध में आदेश जारी किए। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के अंतर्गत चिह्नित प्रत्येक अंत्योदय परिवार को हर महीने 35 किलो खाद्यान्न मिलता है। इसमें 21 किलो 700 ग्राम चावल और 13 किलो 300 ग्राम गेहूं शामिल है। इसी तरह एनएफएसए के प्राथमिक परिवार को प्रति यूनिट पांच किलो खाद्यान्न मिलता है। इसमें तीन किलो चावल और दो किलो गेहूं है। 

गेहूं दो रुपये प्रति किलो और चावल तीन रुपये प्रति किलो दर पर राशन की दुकानों से दिया जाता है। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते लॉकडाउन से गरीबों को हो रही परेशानी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने ये कदम उठाया है। इसके तहत अंत्योदय और प्राथमिक परिवारों को प्रति व्यक्ति पांच किलो चावल मुफ्त दिया जाएगा। अप्रैल, मई और जून में दिए जा रहे मुफ्त चावल को लेने के लिए इन परिवारों को क्रमश: तीनों महीने राशन की दुकान पहुंचना होगा।

खाद्य सचिव ने सभी जिलापूर्ति अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। साथ में उन्हें इस चावल का लेखा-जोखा अलग से रखने के निर्देश दिए गए हैं, इससे केंद्र से प्रतिपूर्ति लेने में राज्य को आसानी रहेगी। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत प्रदेश में आम लोगों को खाद्यान्न आपूर्ति सुचारू बनाए रखने पर खुद नजर रख रहे हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशों को देखते हुए खाद्य विभाग ने इस फैसले को अमलीजामा पहना दिया है। 

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खाद्य तेल निर्माता 50 फीसद स्टॉक राज्य के लिए रखेंगे

प्रदेश में खाद्य तेल की उपलब्धता में भविष्य में कमी न हो, इसे देखते हुए सरकार पूरी सावधानी बरत रही है। इसे देखते हुए प्रदेश में खाद्य तेल निर्माताओं को कुल स्वीकृत उत्पादन क्षमता का 50 फीसद स्टॉक अग्रिम आदेश तक राज्य में उपलब्ध रखने के निर्देश दिए गए हैं। खाद्य सचिव सुशील कुमार ने इस संबंध में सभी जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है। उन्हें अपने जिलों में इसे अमल में लाने को कहा गया है। साथ में मंडी निदेशक को भी लिखा गया है।

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