एंजेल चकमा के स्वजन से मिले पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय, बोले- समान रक्तबंधुओं को लड़ाने वाले देश के शत्रु
पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने त्रिपुरा में एंजेल चकमा के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने देहरादून में एंजेल की मृत्यु को 'उत्तराखंड बनाम उत्तर-पूर् ...और पढ़ें

त्रिपुरा के माछीमार गांव में एंजेल चकमा के स्वजन से मिलकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी लेते पूर्व राज्य सभा सदस्य तरुण विजय। पूर्व सांसद
जागरण संवाददाता, देहरादून: दून में छात्रों के बीच विवाद के दौरान एंजेल चकमा की दर्दनाक मृत्यु को कुछ तत्व उत्तराखंड बनाम उत्तर-पूर्व के झूठे विमर्श में बदलने का षड्यंत्र रच रहे हैं। इस विभाजनकारी प्रयास को सिरे से खारिज करते हुए पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने त्रिपुरा के शोकाकुल गांव में एंजेल चकमा के स्वजन से मुलाकात की।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि उत्तराखंड और उत्तर-पूर्व एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि समान रक्तबंधु हैं। उन्होंने कहा कि इस मानवीय त्रासदी को राजनीतिक और वैचारिक जहर फैलाने का माध्यम बनाना राष्ट्रविरोधी कृत्य है।

बता दें कि, त्रिपुरा का सीमावर्ती मछुआरा गांव अब कभी एंजेल चकमा को लौटते नहीं देख पाएगा। बेहतर शिक्षा और भविष्य की तलाश में उत्तर-पूर्व के सैकड़ों युवाओं की तरह एंजेल भी देहरादून आया था। सपनों के शहर से जब उसकी निशब्द देह गांव पहुंची, तो पूरा इलाका शोक में डूब गया।
ऐसे संवेदनशील समय में देहरादून से मछुआरा गांव पहुंचे तरुण विजय ने एंजेल चकमा के परिवार से मिलकर दुख साझा किया और ढाढ़स बंधाया। घर में सन्नाटा पसरा हुआ था। पिता, भाई व दादा निकटस्थ बौद्ध मंदिर में सात दिवसीय शोक पूजा में थे।

मां, जिन्हें एंजेल ने यह भरोसा दिया था कि उसे एक लाख रुपये मासिक वेतन की नौकरी मिल गई है और वह उसे जल्द देहरादून लाएगा, वह अब बेटे की आत्मा की शांति के लिए पूजा कर्म में लगी हुई थीं। एंजेल चकमा की बहन ने भरी आंखों से तरुण विजय द्वारा गांव आकर सांत्वना देने के लिए आभार जताया।

बोले पिता, हमें सहायता नहीं सिर्फ न्याय चाहिए
एंजेल के पिता तरुण प्रसाद चकमा से जब पूर्व राज्यसभा सदस्य तरुण विजय ने मुलाकात की तो माहौल बेहद भावुक हो गया। दोनों की आंखें छलक पड़ीं। तरुण विजय ने बताया कि उत्तराखंड और त्रिपुरा सरकारें लगातार संपर्क में हैं और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूरे मामले को गंभीरता से देख रहे हैं।
चकमा परिवार को आर्थिक सहायता भी दी गई है, लेकिन उनके पिता की एक ही मांग है कि 'हमें सहायता नहीं, सिर्फ न्याय चाहिए।' तरुण विजय ने परिवार को आश्वस्त किया कि पूरे मामले को सरकार और प्रशासन के उच्च स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।
सेलाकुई पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप
दिवंगत छात्र के पिता ने जांच के दायरे को बढ़ाने की अपील करते हुए आरोप लगाया कि सेलाकुई पुलिस ने प्रारंभ में उनके बेटे की एफआइआर लेने में टालमटोल की। दबाव के बाद एफआइआर तो दर्ज हुई, लेकिन दो दिन बाद प्रति दी गई और उल्टा यह कहकर फटकार लगाई गई कि वे लोग राजनीति कर रहे हैं।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिस मकान मालिक सौरभ बरुआ से घटना से एक दिन पहले एंजेल का विवाद हुआ था और जिसने उसे घर से निकाला, उसकी भूमिका की जांच अब तक क्यों नहीं की गई।
उत्तराखंड बनाम उत्तर-पूर्व का नैरेटिव गढ़ने वाले तत्व देश को तोड़ना चाहते हैं। हम इसे सफल नहीं होने देंगे। एंजेल की हत्या एक मानवीय और जघन्य अपराध है, जिसे गिद्ध राजनीति का शिकार नहीं बनने दिया जा सकता। जो लोग इस घटना को हिंदुत्व या उत्तराखंड बनाम उत्तरपूर्व के रंग में रंगने का षड्यंत्र कर रहे हैं, वह असफल होंगे। भारत की आत्मा एकता में है, विभाजन में नहीं।
-तरुण विजय, पूर्व राज्यसभा सदस्य
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