देहरादून, जेएनएन। शिक्षा मंत्री अरविंद पांडेय गुरुवार को वर्चुअल क्लासेज के माध्यम से उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा देने जा रहे छात्रों से मुखातिब हुए। जिसमें छात्रों को उन्हें अपने मन की बात कहने व प्रश्न पूछने का भी अवसर मिला। शिक्षा मंत्री ने कहा कि छात्र तनावमुक्त रहकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करें। कई उदाहरण देते उन्हें समझाया कि उतार-चढ़ाव व्यक्ति की जिंदगी का हिस्सा हैं। सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं हैं। 

देहरादून के ननूरखेड़ा स्थित राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में स्थापित केंद्रीय स्टूडियो से छात्रों से रूबरू हुए शिक्षा मंत्री ने उनसे कहा कि जब भी जीवन में कठिनाई आए महापुरुषों से सीख लें। शिवाजी ने कहा था कि युद्ध से पहले आप जितनी तैयारी करेंगे रण में रक्त उतना कम बहेगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि मैं अतीत को कभी नहीं भूलता। आपके हालात में मुझे अपने हालात दिखाई देते हैं। बच्चों से कहा कि आप में कुछ लोगों के पिता कोई छोटा व्यवसाय करते होंगे। यह बात आपको झकझोरती होगी। कई कठिनाईयां भी आती होंगी, पर चुनौतियों से भी सीख मिलती है। पूर्व राष्ट्रपति कलाम का उदाहरण देते कहा कि उन्होंने अभावग्रस्त जीवन से निकलकर सफलता की इबारत लिखी। असफलताओं से उन्होंने कभी हार नहीं मानी। बल्कि अपनी काबिलियत, दृढ इच्छा शक्ति, मेहनत सतत प्रयास के बूते इसे सफलता में बदला। मंत्री ने कहा कि एक सफलता या असफलता से व्यक्ति का जीवन नहीं बदलता। आप एक एग्जाम पास करेंगे तो आगे कई और एग्जाम देने पड़ेंगे।

उन्होंने कहा कि माता-पिता आपके शुभचिंतक हैं। यदि वह कुछ बोल रहे हैं तो आपकी भलाई के लिए। वह चाहते हैं कि आप ऊंचा मुकाम हासिल करें। आपकी चिंता करना उनका अधिकार है। बच्चों से कहा कि जीवन की हर मुश्किल व कठिनाई का सकारात्मक रुख के साथ सामने करें। अपने हालात की समीक्षा करें और सोचें कि इन परिस्थितियों से कैसे बाहर निकला जाए।

आज कई अवसर हैं और मुझे आशा है कि बच्चे इनका उपयोग करेंगे। विद्यालयी शिक्षा सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम ने एकाग्रता, समय प्रबंधन का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि कोई एक परीक्षा अच्छी न होने पर छात्र उस विषय में ज्यादा न सोचें। बल्कि दृढ़ता के साथ आगे बढ़ें। किसी एक विफलता का इफेक्ट अपनी अगली परीक्षा पर न पड़ने दें। कहा कि परीक्षा आपके आत्मविश्वास व धैर्य का भी टेस्ट है। अगर आप बोझ लेकर परीक्षा हॉल में गए हैं तो सारे प्रयोग बेकार जाते हैं। आपको आत्मविश्वास लेकर जाना है। इस बीच जीआइसी टंग्सा की छात्रा मोनिका ने इस पहल के लिए शिक्षा मंत्री का आभार व्यक्त किया।

इस दौरान शिक्षा निदेशक आरके कुंवर, अपर निदेशक रामकृष्ण उनियाल आदि उपस्थित रहे। वहीं, छात्रों के साथ-साथ शिक्षक, अभिभावक व ग्राम शिक्षा समिति के सदस्य ने वर्चुअल क्लासेज के माध्यम से इस कार्यक्रम से जुड़े।

कनेक्टिविटी ने डाला रोड़ा

शिक्षा मंत्री व छात्रों के बीच कनेक्टिविटी कई बार बाधा बनी। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्र के विद्यालयों से जुड़ने की इच्छा जताई। पर कभी स्कूल से कनेक्ट ही नहीं बना और कभी साउंड ठीक नहीं आई। कई बार बिना वीडियो, केवल आवाज से ही काम चलाना पड़ा। शुरुआत में तो शिक्षा मंत्री करीब 7-8 मिनट किसी स्कूल के कनेक्ट होने के इंतजार में यूं ही बैठे रहे। इस स्थिति से निपटने के लिए अंतिम क्षणों में उन्होंने दोतरफा संवाद के बजाए छात्रों को संबोधित करना ही बेहतर समझा।

परीक्षा नहीं, समस्याओं पर हुई चर्चा 

उत्तराखंड बोर्ड की परीक्षा देने जा रहे प्रदेशभर के छात्रों को प्रेरित करने की यह पहल परीक्षा पर केंद्रित न रहकर समस्याओं पर केंद्रित हो गई। वहीं, अधिकतर बच्चे परीक्षा के बजाए वर्चुअल क्लास पर बात करते दिखे। जिस पर मंत्री को यह कहना पड़ा कि विषय डायवर्ट हो रहा है। यह आयोजन वर्चुअल क्लास नहीं बोर्ड परीक्षा से संबंधित है, जहां तक सुधार का प्रश्न है, यह एक सतत प्रक्रिया है और इस बावत सुझाव हम आगे भी लेते रहेंगे। आज बस बच्चों के सवालों के जवाब व शंकाओं का समाधान करना चाहता हूं।

विद्यालय में बैठने की जगह तक पर्याप्त नहीं 

जीआइसी नारायण नगर से ग्राम शिक्षा समिति के सदस्य ने संसाधनों की कमी का मुद्दा उठाया। बताया कि विद्यालय में 500 से ऊपर बच्चे हैं। पर बैठने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। चार कक्ष बनाने की मांग उन्होंने की। जिस पर मंत्री ने जल्द कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

कौन क्या कह रहा है ध्यान न दें

जीआइसी मनेरी से छात्र अंशुमान सिंह ने मंत्री से पूछा कि पढऩे के लिये कौन सा समय ज्यादा मुफीद है। कई लोग सुबह पढ़ने को अच्छा बताते हैं और कई लोग रात में। जिस पर मंत्री ने उन्हें एक कहानी सुनाई। कहा कि यहां-वहां की न सुनें। सतत रूप से तैयारी करें और इसमें निरंतरता लाएं। कई लोग आपको नकारात्मक बातें भी कहेंगे। पर इस सबको नजरअंदाज कर आगे बढ़ते रहें। निश्चित ही सफलता मिलेगी।

वर्चुअल क्लास से 709 विद्यालय और जुड़ेंगे 

जीआइसी भवान के छात्र अभिषेक ने बताया कि वर्चुअल क्सासेज को उन्हें फायदा मिल रहा है। यह शिक्षकों की कमी को भी पूर्ण कर रहा है। प्रदेशभर के विद्यालय इससे कब जुड़ेंगे। जिस पर मंत्री ने बताया कि 500 स्कूल वर्चुअल क्सासेज से जुड़ चुके हैं। अगले चरण में 709 विद्यालय और जुड़ जाएंगे। भविष्य में सभी माध्यमिक विद्यालय इससे जुड़ जाएंगे।

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शिक्षा मंत्री ने स्वीकार की चूक 

उत्तराखंड के दुरुह पर्वतीय क्षेत्रों में शिक्षा की स्थितियां अब भी अच्छी नहीं है। कहीं अवस्थापना की कमी है और कहीं शिक्षक कम। ऐसे में छात्र-छात्राओं की पढ़ाई भी प्रभावित हुई है। जिसे शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने भी स्वीकार किया। उन्होंने वायदा किया कि भविष्य में इन खामियों की गुंजाइश नहीं रहेगी। दरअसल, जीआइसी मनेरी से छात्र अंशुमान सिंह ने शिक्षकों की कमी का मामला शिक्षा मंत्री के समक्ष उठाया। सवाल किया कि बिना शिक्षक छात्र पढ़ें कैसे? जिस पर मंत्री ने कहा कि स्कूलों में विषयवार शिक्षक पहुंचें इसका प्रयास किया जा रहा है। गेस्ट टीचर का मामला कोर्ट में चले जाने के कारण निश्चित रूप से विलम्ब हुआ है। जिसके लिए मैं क्षमा प्रार्थी हूं। यह वायदा करता हूं कि अगले एक सप्ताह के भीतर नियुक्तियां हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि मैं खुद पर जिम्मेदारी लेता हूं। अब आगे किसी बच्चे को शिक्षक विहीन नहीं होना पड़ेगा।

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Posted By: Sunil Negi

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