राज्य ब्यूरो, देहरादून। कार्बेट टाइगर रिजर्व के अंतर्गत कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग में पेड़ कटान और विभिन्न निर्माण कार्यों में अनियमितता के मामले में तीन अधिकारियों पर अनुशासनिक कार्रवाई की तलवार लटक गई है। शासन ने तीनों के खिलाफ आरोप पत्र का मसौदा साक्ष्य सहित शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इस कड़ी में विभाग प्रमुख का दायित्व छोड़ने से एक दिन पहले प्रमुख मुख्य वन संरक्षक राजीव भरतरी ने अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) प्रशासन कपिल लाल को निर्देश दिए हैं कि शासन को भेजे जाने वाले आरोप पत्र का आलेख तत्काल उपलब्ध कराया जाए।

कालागढ़ टाइगर रिजर्व प्रभाग में पेड़ कटान और अवैध निर्माण के मामले में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण पहले ही दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर चुका है। हालांकि, पूर्व में अधिकारियों पर दोष निर्धारण के मद्देनजर दो वनाधिकारियों को जांच अधिकारी नामित किया गया था, लेकिन दोनों ने ही इससे हाथ खींच लिए थे। इस प्रकरण में शासन ने बीती 29 अक्टूबर को विभाग प्रमुख को पत्र भेजा। इसमें कथित अवैध पातन और निर्माण कार्यों में अनियमितता और लापरवाही के लिए मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक जेएस सुहाग, कार्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक राहुल और कालागढ़ टाइगर रिजर्व के डीएफओ किशन चंद को उत्तरदायी मानते हुए उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के मद्देनजर आरोपपत्र का साक्ष्य सहित आलेख मांगा।

इस बीच शासन ने सीटीआर प्रकरण में विभाग प्रमुख भरतरी को हटाने के साथ ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक से यह दायित्व वापस लेने के आदेश जारी कर दिए। साथ ही डीएफओ किशन चंद को विभाग प्रमुख कार्यालय से संबद्ध कर दिया। अब प्रकरण में नया मोड़ आया है। विभाग प्रमुख भरतरी ने नए मुखिया को कार्यभार सौंपने से एक दिन पहले शुक्रवार को एपीसीसीएफ प्रशासन को पत्र जारी किया। इसमें शासन के 29 अक्टूबर के पत्र के क्रम में तीनों अधिकारियों पर अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ किए जाने के मद्देनजर आरोप पत्र का आलेख तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

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Edited By: Raksha Panthri