देहरादून, जेएनएन। स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने मुख्य चिकित्साधिकारियों, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षकों व मुख्य चिकित्सा अधीक्षकों को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत स्वास्थ्य सूचकांक बढ़ाने के निर्देश दिए। इसके लिए उन्होंने छह माह का समय निर्धारित किया है। बतौर डीजी हेल्थ जनपद स्तरीय विभागीय अधिकारियों के साथ पहली बार वीडियो कांफ्रेंसिंग करते हुए उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा संचालित योजनाओं को समयबद्ध रूप से पूर्ण किया जाए। कहा कि स्वास्थ्य विभाग आम लोगों से जुड़ा विभाग है। इसलिए चिकित्सकों के लिए मृदुभाषी होना आवश्यक है।

उन्होंने सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली में सुधार लाने पर जोर दिया है। कहा कि सभी चिकित्सक व अन्य स्टाफ समय पर अस्पताल आएं, समय पर पैथोलॉजी लैब खुलें, समय पर दवा मिले और मरीज को आवश्यकतानुसार इलाज देना सुनिश्चित किया जाए। कहा कि सीएमओ व प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक एक चिकित्सक के साथ ही अच्छे प्रबंधक के तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार लाने के बारे में सोचें। उन्होंने मीडिया मैनेजमेंट पर जोर देते कहा कि मीडिया के साथ सकारात्मक व्यवहार रखा जाए और एक ही व्यक्ति को अधिकृत करते हुए सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के स्तर पर मीडिया से नियमित तौर पर संवाद और उनके माध्यम से आम जनमानस तक योजनाओं की जानकारी व चिकित्सालयों की सेवाओं के बारे में सूचनाएं पहुंचाई जानी चाहिए। स्वास्थ्य महानिदेशक ने एनएचएम के कार्यों की नियमित निगरानी किए जाने के निर्देश भी उन्होंने दिए। हाल ही में नीति आयोग द्वारा जारी स्वास्थ्य सूचकांक में राज्य की रैकिंग लुढ़कने पर उन्होंने चिंता जताई है। कहा कि स्वास्थ्य सूचकांक को बेहतर बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने सीएम हेल्पलाइन व शिकायत पोर्टल के महत्व के बारे में भी जानकारी दी। कहा कि पोर्टल पर दर्ज होने वाली प्रत्येक शिकायत का त्वरित निस्तारण किया जाए। चिकित्सालयों द्वारा निर्गत किए जाने वाले मेडिकल प्रमाणपत्र, दिव्यांग प्रमाणपत्र एवं अन्य प्रकार के प्रमाणपत्रों को नियमानुसार निर्गत किए जाने के निर्देश भी उन्होंने जनपद स्तरीय अधिकारियों को दिए।

अस्पतालों में 600 नए चिकित्सकों की तैनाती जल्द

स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. अमिता उप्रेती ने कहा कि आगामी छह के भीतर सभी जिला चिकित्सालयों को आइपीएचएस मानकों के अनुसार सुदृढ़ कर लिया जाएगा। ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के मरीजों को रेफर न करना पड़े। लगभग 600 चिकित्सकों की तैनाती किए जाने की प्रक्रिया भी चल रही है। जल्द ही विशेषज्ञ चिकित्सक भी उपलब्ध हो जाएंगे। अस्पतालों की इमरजेंसी सेवाओं में भी अपेक्षित सुधार करने की बात उन्होंने कही है। कहा कि सरकारी अस्पतालों के चिकित्सक व विशेषज्ञ चिकित्सक अधिक योग्य और अनुभवी हैं। लेकिन मरीजों के प्रति उनकी उदासीनता व संवेदनशीलता की कमी के कारण चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता प्रभावित हो रही है। कहा कि नई औषधि नीति के तहत आने वाले दिनों मे अस्पतालों में दवाईयों की किसी भी प्रकार कमीं नहीं रहेगी। सभी चिकित्सा इकाईयों पर आवश्यकतानुसार दवा की आपूर्ति की जाएगी। 

गैरहाजिर रहने वाले चिकित्सकों की सेवा होगी समाप्त

लंबे समय से अनुपस्थित चिकित्सकों की सेवाओं को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने के निर्देश भी स्वास्थ्य महानिदेशक ने दिए हैं। कहा कि प्रत्येक चिकित्सालय में प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक प्रतिदिन भ्रमण कर चिकित्सालय की सेवाओंं में सुधार के लिए कार्य करें। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक स्वयं वार्ड तथा ओपीडी में जाकर मरीजों से मिलें और उन्हें दी जा रही सेवाओं की जानकारी लें। जनपदों में आरसीएच पोर्टल की नियमित समीक्षा करने के निर्देश भी उन्होंने दिए हैं। उन्होंने संचारी व गैर संचारी रोगों की रोकथाम और बचाव के लिए यथा समय व्यवस्थाएं करने तथा प्रचार-प्रसार के द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा व जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए हैं।

दून अस्पताल के ओटी व ओपीडी ब्लॉक का काम अटका

दून अस्पताल के ओटी व ओपीडी ब्लॉक पर बजट का ब्रेक लग गया है। रिवाइच्ड एस्टीमेट को लेकर निर्णय न होने के कारण काम ठप है। ऐसे में काम अब अगले वर्ष तक खिसक सकता है। मेडिकल कॉलेज प्रबंधन की मानें तो अभी ओटी ब्लॉक में 25 प्रतिशत से ज्यादा काम बचा है। जबकि शासन की ओर से ओटी ब्लॉक समेत ओपीडी ब्लॉक को पूरा करने के लिए 9 नवंबर तक की डेडलाइन दी गई थी। 

6 करोड़ का रिवाइच्ड एस्टीमेट

दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल की हाईटेक बिल्डिंग का काम बजट न होने के कारण रुक गया है। कार्यदायी संस्था यूपी राजकीय निर्माण निगम द्वारा रिवाइच्ड एस्टीमेट के हिसाब से बजट न मिलने तक काम रोका हुआ है। अब तक कार्यदायी संस्था को 45 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। अब कार्यदायी संस्था ने 6 करोड़ का रिवाइच्ड एस्टीमेट भेजा है, जो कि पास न होने से काम रोक दिया गया है। इससे सबसे ज्यादा काम ओटी ब्लॉक का प्रभावित हो रहा है। जिसकी अब तक दो बार डेडलाइन बढ़ाई जा चुकी है। 

ओपीडी ब्लॉक में भी 20 प्रतिशत काम बाकी

काम की सुस्ती सिर्फ ओटी ब्लॉक में ही नजर नहीं आ रही है। ओपीडी ब्लॉक में भी 20 प्रतिशत से ज्यादा काम अटका हुआ है। बीते 5 मार्च को नई ओपीडी के एक हिस्से का शुभारंभ किया गया, लेकिन 6 मंजिला बिल्डिंग में छह माह बाद भी तमाम कार्य अधूरे हैं। न मरीजों के लिए लिफ्ट की सुविधा शुरू हो पाई है, न हीं प्रशासनिक अधिकारियों के लिए कक्ष तैयार हुए हैं। इसके साथ ही जगह-जगह बिजली के तार लटके हुए हैं। जिससे असुविधा भी हो रही है।

6 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर होंगे ओटी ब्लॉक में

दून अस्पताल के निर्माणाधीन ओटी ब्लॉक में 10 ऑपरेशन थिएटर होंगे। जिनमें 6 मॉड्यूलर ऑपरेशन थिएटर शामिल हैं। मॉड्यूलर ओटी में सर्जरी, ऑर्थोपेडिक, ईएनटी, प्लास्टिक और न्यूरो विभाग की ओटी होगी। इसके साथ ही नई बिल्डिंग में सेंट्रलाइज आइसीयू भी बनना है। इसके बाद यहां मेडिसिन, सर्जिकल, ईएनटी और जरनल आइसीयू एक साथ हो जाएंगे। सेंट्रलाइच्ड व्यवस्था के बाद मरीजों को क्रिटिकल केयर आसानी से मिल सकेगी।

9 नवंबर की थी आखिरी डेडलाइन

बीते अगस्त माह में स्वास्थ्य विभाग के प्रभारी सचिव डॉ. पंकज पांडेय ने नए ओपीडी व ओटी ब्लॉक का निरीक्षण भी किया था। यूपी निर्माण निगम के अधिकारियों को निर्देश दिये थे कि राज्य स्थापना दिवस यानि 9 नवंबर से पहले हर हाल में काम निपटा लें। किसी भी हाल में एक्सटेंशन न देने की बात उन्होंने कही थी। लेकिन, अब नहीं लगता कि इस डेडलाइन तक काम पूरा हो पाएगा। अब अधिकारी खुद अगले वर्ष तक ही काम पूरा होने की संभावना बता रहे हैं।

डॉ. आशुतोष सयाना (प्राचार्य, दून मेडिकल कॉलेज) का कहना है कि कार्यदायी संस्था ने रिवाइज्ड एस्टीमेट दिया था। जिस पर शासन ने अब तक किए गए कार्यों का सत्यापन करा रिपोर्ट देने के कहा था। उसी आधार पर बजट रिवाइज किया जाएगा। यह रिपोर्ट अब शासन को भेज दी गई है। जिस पर जल्द निर्णय होने की उम्मीद है। 

मरीज से कोई शुल्क लिया तो कार्रवाई

राज्य के प्रमुख मेडिकल कॉलेजों में अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के क्रियान्वयन की बुधवार को समीक्षा की गई। योजना के अध्यक्ष डीके कोटिया ने कहा कि कई बार लाभार्थी से अलग से पैसा लिए जाने की भी शिकायतें मिल रही हैं। यह पूर्णत: गलत है, क्योंकि योजना में मरीज को निश्शुल्क उपचार एवं अन्य सुविधाएं दिए जाने का प्रावधान है। यह स्पष्ट किया कि किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क लिए जाने पर अस्पताल के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। कोटिया ने पिछले एक वर्ष में अस्पतालों द्वारा मरीजों को दिए जा रहे उपचार व विभिन्न स्तर पर सामने आई गड़बड़ियों की जानकारी दी। साथ ही योजना में आ रही तकनीकी समस्याओं के बारे फीडबैक भी लिया।

उन्होंने बताया कि अस्पतालों को नियत समय में भुगतान किया जा है और यदि क्लेम प्रोसेस होने में तकनीकी दिक्कत है तो उसे भी जल्द दूर कर लिया जाएगा। कहा कि राज्य स्वास्थ्य अभिकरण के स्तर पर गहन निगरानी एवं ऑडिट करने के बाद ही भुगतान किया जा रहा है। योजना के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अरुणेंद्र सिंह चौहान ने सख्त हिदायत दी कि योजना में किसी भी स्तर पर संवादहीनता नहीं होनी चाहिए। सभी को मिलकर इस योजना को सफल बनाने के लिए कार्य करना होगा, तभी राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आम जन का भरोसा बढ़ेगा। इस दौरान मेडिकल कॉलेजों मे तैनात आरोग्य मित्रों को उनके महत्व एवं दायित्वों की जानकारी दी गई।

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यह निर्देश दिए गए कि अस्पताल में पहुंचने के बाद मरीज को सही और समय पर निश्शुल्क उपचार दिलाने की जिम्मेदारी आरोग्य मित्र की है। मेडिकल कॉलेजों को निर्देशित किया गया कि मरीजों का उपचार राष्ट्रीय स्वास्थ्य अभिकरण व राज्य स्वास्थ्य अभिकरण की गाइडलाइंस के अनुसार ही किया जाए। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मेडिकल कॉलेजों व आरोग्य मित्रों के साथ जल्द ही एक कार्यशाला भी आयोजित की जाएगी, ताकि उपचार में किसी तरह की दिक्कत न रहे। इस दौरान योजना के निदेशक प्रशासन डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक मेडिकल क्वालिटी डॉ. अर्चना श्रीवास्तव और प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, आरोग्य मित्र शामिल रहे।

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Posted By: Sunil Negi

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