देहरादून, डॉ. आशुतोष सयाना। यूं तो चिकित्सा क्षेत्र की पहचान ही सेवा, समर्पण और त्याग से होती है, पर यह वह दौर है, जब हमें मजबूत मन से और संकल्पित होकर सेवा का अवसर मिला। हर दिन एक नई चुनौती के साथ आ रहा है और हम उसी दृढ़ता के साथ उसका मुकाबला भी कर रहे हैं। चिकित्सक से लेकर सफाईकर्मी तक, हर व्यक्ति अपना कार्य पूरी ईमानदारी व निष्ठा के साथ कर रहा है। यही वजह है कि तकरीबन सवा माह में अस्पताल में भर्ती हुए 22 मरीजों में 10 ठीक भी हो चुके हैं। यह संख्या उम्मीद जगाती है कि देर-सवेर हम इस संकट से उबर जाएंगे।

जनवरी खत्म होते-होते हम कोरोना को लेकर पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ चुके थे। इसके लिए वॉर्ड आरक्षित करना, नोडल अधिकारी बनाना और कर्मचारियों को तैयार करना शुरू कर दिया था। पर हमारी असली परीक्षा तब शुरू हुई, जब दून में कोरोना का पहला मामला आया। अच्छी बात ये रही कि डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ और अन्य सभी कर्मचारियों ने साथ मिलकर एक टीम की तरह कार्य किया, जिसके सकारात्मक परिणाम भी मिले। 

इस बीच मरीजों की संख्या बढ़ी और साथ ही चुनौतियां भी। राज्य सरकार ने अस्पताल को कोविड हॉस्पिटल बनाने का निर्णय लिया। कोरोना के लिए 400 बेड आरक्षित रखने के निर्देश हमें मिले। यानी जिम्मेदारियां अब अधिक थीं, पर छोटे से छोटे कर्मचारी ने भी इस काम में पूरी तत्परता दिखाई। हमने शुरुआत 23 बेड से की थी, जिनमें आठ बेड संदिग्ध व 15 संक्रमित मरीजों के लिए आरक्षित थे। 

मौजूदा समय में 125 आइसोलेशन बेड व 41 बेड पॉजिटिव मरीजों के क्रियाशील हैं। जैसे-जैसे जरूरत होगी, हम अपनी क्षमता बढ़ाते चले जाएंगे। टारगेट 400 बेड का है, पर हमने 30 बेड का अतिरिक्त इंतजाम भी रखा है। इसी तरह वेंटिलेटर भी बढ़ाए जा रहे हैं। अभी तक दस वेंटिलेटर कोरोना के लिए थे, पर अब पांच वेंटिलेटर हमें और मिल गए हैं। अगले कुछ वक्त में और वेंटिलेटर की भी डिलिवरी मिल जाएगी और हम धीरे-धीरे इसे 50 वेंटिलेटर तक ले जाएंगे।

एक तरफ जहां हम व्यवस्थाओं को विस्तार दे रहे हैं, चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, तकनीशियन सभी पूरी शिद्दत से अपनी ड्यूटी कर रहे हैं। न केवल परिवार, बल्कि खुद की सुध भुलाकर वह पूरी निष्ठा के साथ इस लड़ाई में जुटे हैं। यह पता चलता है कि दिन कैसे बीता और कैसे रात। ऐसे में उनके रहने-खाने की व्यवस्था भी अस्पताल के समीप ही की गई है।

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कोरोना के उपचार के साथ ही फ्लू ओपीडी, टेलीफोन पर मरीजों को परामर्श देना, मनोवैज्ञानिक सलाह और अन्य तमाम मोर्चे पर डॉक्टर और स्टाफ डटा है। पर एक तरफ जहां मरीजों की बढ़ती संख्या चिंता का सबब बनी हुई है, ठीक हुए मरीजों की संख्या हमें इस संकट से उबरने की नई ऊर्जा देती रही है। इस सबके बीच लोगों से यह अपील है कि वह लॉकडाउन के नियमों का पालन करें और घर में रहें। यह जंग धैर्य से ही जीती जाएगी।

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Posted By: Raksha Panthari

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