देहरादून, राज्य ब्यूरो। प्रदेश में आखिर शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार को लेकर असमंजस दूर हो गया है। 29 शिक्षकों को उल्लेखनीय सेवाओं के लिए जल्द पुरस्कार मिल सकेगा। वर्ष 2018 के लिए दिए जाने वाले पुरस्कारों के लिए चयनित शिक्षकों की सूची को शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने अनुमोदित कर दिया है। वहीं मिड डे मील के पात्र कक्षा एक से आठवीं तक 6.84 लाख बच्चों को फ्लेवर्ड मिल्क मुहैया कराने के प्रस्ताव को भी शिक्षा मंत्री ने हरी झंडी दिखा दी है। इसे मंत्रिमंडल की आगामी बैठक में शामिल किया जा सकता है। 

प्रदेश में शैलेश मटियानी राज्य शिक्षक पुरस्कार को लेकर लंबे समय तक असमंजस बना हुआ था। पुरस्कृत होने वाले शिक्षकों के लिए सेवानिवृत्ति के बाद दो वर्ष की सेवा वृद्धि के फैसले को लेकर पेच दूर होने के बाद अब शिक्षा मंत्री ने भी उक्त प्रस्ताव पर सहमति दे दी है। वर्ष 2018 के शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए शिक्षा महकमे ने 29 शिक्षकों का चयन कर सूची शासन को भेजी थी। दरअसल, शिक्षा मंत्री अरविंद पांडे ने पुरस्कार हासिल करने वाले शिक्षकों का सेवानिवृत्ति के बाद सेवाकाल दो वर्ष नहीं बढ़ाने के निर्देश महकमे को दिए थे। 

शिक्षा मंत्री ने सेवा वृद्धि के बजाय अन्य तरीके से प्रोत्साहन दिए जाने पर विचार करने की बात कही थी। पुरस्कार के एवज में दो वर्ष की सेवावृद्धि नहीं मिलने का शिक्षक संगठनों ने विरोध किया था। उनका कहना है कि उक्त प्रावधान के चलते शिक्षकों में सेवापर्यंत बेहतर प्रदर्शन करने की इच्छाशक्ति बढ़ती है। बाद में शिक्षकों की मांग को मंजूर करते हुए मुख्यमंत्री ने दो वर्ष के सेवा विस्तार को बहाल रखने के निर्देश दिए थे। सरकार की ना और हां के बीच लंबा फासला होने का नतीजा ये रहा कि शिक्षक दिवस पांच सितंबर तक शैलेश मटियानी पुरस्कारों को शासन की मंजूरी नहीं मिल पाई थी। 

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29 शिक्षकों को मिलता है पुरस्कार 

शैलेश मटियानी पुरस्कार कुल 29 शिक्षकों को दिया जाता है। सभी 13 जिलों से प्राथमिक व उच्च प्राथमिक स्तर पर एक-एक शिक्षक, माध्यमिक स्तर पर के एक-एक शिक्षक यानी सरकारी विद्यालयों के कुल 26 शिक्षकों का शैलेश मटियानी पुरस्कार दिया जाता है। इसके अतिरिक्त जिला एवं प्रशिक्षण संस्थान से एक विशेषज्ञ शिक्षक और संस्कृत शिक्षा से दो शिक्षकों को उक्त पुरस्कार दिया जाता है। पुरस्कार के लिए शिक्षकों के चयन को जिला स्तर पर समितियां गठित की गईं थीं। 

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Posted By: Raksha Panthari

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