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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 28, 2019 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

लेप्रोस्कॉपी सर्जरी की तकनीक और उपयोगिता पर हुआ मंथन

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Published: Sun, 28 Apr 2019 07:41 PM (IST)Updated: Sun, 05 May 2019 08:22 AM (IST)

आरोग्यधाम अस्पताल में लेप्रोस्कॉपी सर्जरी पर सीएमई और कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें विशेषज्ञों ने लेप्रोस्कॉपी सर्जरी की तकनीक औ उसकी उपयोगिता पर मंथन किया।

लेप्रोस्कॉपी सर्जरी की तकनीक और उपयोगिता पर हुआ मंथन
लेप्रोस्कॉपी सर्जरी की तकनीक और उपयोगिता पर हुआ मंथन

देहरादून, जेएनएन। सर्जिकल सोसायटी ऑफ देहरादून की ओर से आरोग्यधाम अस्पताल में लेप्रोस्कॉपी सर्जरी पर सीएमई और कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें विशेषज्ञों ने लेप्रोस्कॉपी सर्जरी की तकनीक और उसकी उपयोगिता पर मंथन किया। 

दिल्ली, एम्स ऋषिकेश से आए वरिष्ठ सर्जनों ने भावी चिकित्सकों को सर्जरी की नई तकनीक से अवगत कराया। एम्स ऋषिकेश के निदेशक प्रो. रविकांत ने कहा कि अत्याधुनिक सर्जरी की विधा मरीजों को अधिक आराम और सहूलियतें पहुंचाने के उद्देश्य से विकसित की जा रही हैं। लेप्रोस्कॉपी सर्जरी (दूरबीन शल्य चिकित्सा पद्धति) मरीजों के उपचार में वरदान साबित हुई है। इस शल्य चिकित्सा पद्धति को की-होल सर्जरी या पिनहोल सर्जरी भी कहा जाता है। 

हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में सर्जरी विभाग के प्रो. पीके सचान ने कहा कि आज अधिकाश मेजर सर्जरी दूरबीन पद्धति से की जा रही है। इस सर्जरी के बाद मरीजों को ठीक होने और काम पर लौटने में कम समय लगता है। डॉ. हेमंत नौटियाल ने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में इस विधि का अभी तक बहुत सीमित रूप से उपयोग होता रहा है। दूरदराज के क्षेत्रों में इसके अत्याधिक प्रसार के लिए प्रशिक्षण की जरूरत है। इस दौरान लाइव सर्जरी भी गई। बड़ी स्क्रीन लगाकर सर्जरी को लाइव दिखाया गया। इसके बाद भावी चिकित्सकों ने सवाल पूछे तो विशेषज्ञों ने उसके जवाब दिये। वहीं, छात्र-छात्राओं एवं युवा सर्जनों को एंडो ट्रेनिंग भी दी गई।

सोसाइटी के अध्यक्ष डॉ. प्रवीण जिंदल, सचिव डॉ. विपुल कंडवाल व कोषाध्यक्ष डॉ. रोहित अरोड़ा ने बताया कि ऐसी कार्यशालाएं दिल्ली-मुंबई जैसे बड़े शहरों में होती है। देहरादून में ये कार्यशाला होने से स्थानीय सर्जनों एवं छात्र-छात्राओं को लाभ होगा। इस दौरान श्री महंत इंद्रेश अस्पताल के डॉ. जेपी शर्मा, डॉ. गुलशनजीत सिंह, डॉ. प्रदीप, डॉ. माधव मैठाणी, डॉ. अजय कुमार, डॉ. रोशन लाल नौटियाल, डॉ. राहुल गुप्ता आदि मौजूद रहे।

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