देहरादून, जेएनएन। बीसीसीआइ से उत्तराखंड को पूर्ण मान्यता दिलाने में अहम योगदान देने के लिए भाजपा व ऋषिकेश से आए क्रिकेट प्रेमियों ने खेल मंत्री अरविंद पांडे को सम्मानित किया। खेल मंत्री ने भी ने सभी का आभार व्यक्त किया। इस दौरान विधानसभा के बाहर आतिशबाजी की गई।

बुधवार को भारतीय जनता पार्टी स्वर्गाश्रम लक्ष्मणझूला मंडल के कार्यकर्ता व क्रिकेट प्रेमी खेल मंत्री अरविंद पांडे का सम्मान करने के लिए बड़ी संख्या में विधानसभा के बाहर एकत्र हुए। जहां उन्होंने बैंड-बाजे के साथ खेल मंत्री जिंदाबाद के नारे लगाते हुए प्रदेश को बीसीसीआइ से मान्यता दिलाने के लिए उनके प्रयासों के लिए धन्यवाद अदा किया। खेल मंत्री अरविंद पांडे ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को शुभकामनाएं दी। इस दौरान उन्होंने कहा कि पिछले 19 सालों में जो राज्य का नुकसान हुआ है, अब उसकी भरपाई का समय आ गया है। अगर प्रदेश को 19 साल पहले मान्यता मिल जाती तो आज भारतीय टीम में आधे खिलाड़ी उत्तराखंड से होते। इस दौरान भरत लाल, अश्वनी गुप्ता, जीतू अवस्थी, देवेंद्र पाल, विनीता शर्मा, पूजा आर्य, मीनाक्षी भंडारी, सचिन पोखरियाल आदि मौजूद रहे।

खिलाड़ियों की घर वापसी पर खुले हाथों से होगा स्वागत

उत्तराखंड को बीसीसीआइ से मान्यता मिलने के बाद अन्य प्रदेशों से खेल रहे प्रदेश के प्रतिभावान खिलाड़ियों के घर वापसी की उम्मीद भी जगी है। खेल मंत्री अरविंद पांडे का कहना है कि अगर कोई खिलाड़ी घर वापसी करना चाहता है तो प्रदेश सरकार उसका खुले हाथों से स्वागत करेगी। सरकार और एसोसिएशन के सहयोग से बाहरी प्रदेशों से खेल रहे क्रिकेटरों की घर वापसी के प्रयास भी तेज किए जाएंगे।

बीसीसीआइ ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड को प्रदेश में क्रिकेट संचालन की मान्यता प्रदान कर दी गई है। लेकिन, मान्यता के लिए चली लंबी लड़ाई में प्रदेश को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। जूनियर से लेकर सीनियर स्तर के प्रतिभावान खिलाड़ियों ने मान्यता के अभाव में दूसरे राज्यों में पलायन करने में ही भलाई समझी। इनमें कई ऐसे खिलाड़ी भी शामिल रहे जिनमें विश्वस्तर पर कुछ कर दिखाने की क्षमता थी, लेकिन आर्थिक रूप से मजबूत नहीं थे, उन्होंने खेलना ही छोड़ दिया। अब मान्यता मिलने के बाद पलायन पर ब्रेक लगेगा। खेल मंत्री अरविंद पांडे ने कहा कि जो खिलाड़ी पलायन कर बाहर गए हैं, निश्चित रूप से उन्हें बेहतर सुविधाएं मिल रही होंगी। इसके बावजूद कोई खिलाड़ी घर वापसी चाहता है तो उनके लिए सरकार दोनों हाथ खोले तैयार खड़ी है। उन्होंने कहा कि यह सोच कर दुख होता है कि पिछले 19 सालों में राज्य की कई प्रतिभाएं मान्यता न होने के कारण अपना भविष्य नहीं बना पाईं। लेकिन, अब राज्य के खिलाड़ियों को पलायन करने की जरूरत नहीं है।

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Posted By: Sunil Negi

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