देहरादून, राज्य ब्यूरो। सरकार और संगठन को असहज स्थिति में ला देने वाली दो भाजपा विधायकों कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन और देशराज कर्णवाल के मध्य छिड़ी रार की चिंगारी भले ही भीतर ही भीतर सुलग रही हो, मगर बाहरी तौर पर उनके तेवर अब कुछ नरम जरूर दिखाई देने लगे हैं। एक कार्यक्रम में भाग लेने विधानसभा पहुंचे विधायक कर्णवाल ने पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में इस प्रकरण पर बेहद सधे अंदाज में अपनी बात रखी। हालांकि, उन्होंने यह जरूर कहा कि न कभी जुर्म सहा और न कभी सहेंगे।

पत्रकारों के सवालों के जवाब में झबरेड़ा विधायक देशराज कर्णवाल ने कहा कि कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन उनके बड़े भाई हैं। वे बयान देने में तो माहिर हैं ही, इसमें कोई शक-शुबहा नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और संगठन की उपस्थिति में उनके व विधायक चैंपियन के बीच का मामला निबट गया है। उन्हें पूरा भरोसा है कि बड़े भाई की ओर से इस तरह की कोई बात आएगी।

एक सवाल पर कर्णवाल ने कहा कि अगर वे मुझे कह रहे हैं कि मैं जेल जाऊंगा तो जो जेल जाने हैं वो दिख रहे हैं। साथ ही जोड़ा कि अब मामला निबट चुका है तो ऐसी कोई बात नहीं आएगी, जो विरोधाभासी हो। उन्होंने यह भी कहा कि वह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के अनुयायी हैं। जुर्म करने वाले से ज्यादा सहने वाला गुनहगार होता है। इसलिए मैंने न कभी जुर्म सहा है और न कभी सहूंगा। उन्होंने कहा कि मुझे सरकार व संगठन पर पूरा भरोसा है, वे जो भी कहेंगे, उनके उनके आदेश का पालन किया जाएगा।

यह पूछे जाने पर कि विधायक चैंपियन ने पार्टी के दिल्ली दरबार में भी दस्तक दी हैं। इस पर विधायक कर्णवाल ने कहा कि बड़े भाई चुनाव प्रचार के लिए दिल्ली गए हैं। उन्होंने कहा कि हमारे बीच कोई विवाद नहीं है और विधायक चैंपियन उनके साथ हैं।

विधायकों को संयमित व शिष्ट व्यवहार की नसीहत

विधानसभा अध्यक्ष प्रेमचंद अग्रवाल ने कहा कि न सिर्फ जनप्रतिनिधियों बल्कि सामान्य व्यक्ति को भी हमेशा संयमित व्यवहार और शिष्टाचार की भाषा का प्रयोग करना चाहिए। 

उन्होंने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से अनौपचारिक बातचीत में उस सवाल पर यह बात कही, जिसमें उनका ध्यान राज्य में सत्ताधारी दल के दो विधायकों के मध्य छिड़ी जुबानी जंग की ओर दिलाया गया।

विस अध्यक्ष ने कहा कि इस प्रकरण के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है, क्योंकि वह बाहर थे। हालांकि, उन्होंने कहा कि सामान्यतौर पर सभी को शिष्टाचार की भाषा का इस्तेमाल करना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के मामले में तो यह और भी जरूरी हो जाती है। उन्होंने कहा कि विधायकों के मध्य हुए प्रकरण की उन्हें जानकारी नहीं है। यदि जरूरत पड़ी तो वह दोनों विधायकों से बात भी करेंगे।

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