देहरादून, [जेएनएन]: दून में पहली बार बादी गायन शैली के गीतों के जरिये लोक संस्कृति के रंग देखने को मिले। विलुप्त होती गायन शैली से जुड़े कलाकारों ने मनमोहक प्रस्तुति देते हुए कार्यक्रम में हर किसी के मन को छू लिया। खासकर युवा पीढ़ी के बीच भी सांस्कृतिक संध्या के बहाने कभी समृद्ध रही इस विधा का संदेश दिया गया। 

नगर निगम प्रेक्षागृह में सामाजिक, सांस्कृतिक एवं साहित्यकारों से जुड़ी संस्था अभिव्यक्ति की कार्यशाला की ओर से बादी गायन शैली पर लोकरंग कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान कहा गया कि बदलती सामाजिक परिस्थितियों से कई प्रकार की लोक विधाएं समाप्त होने की कगार पर हैं। इन्हीं में से एक गढ़वाल की 'बादी' गायन शैली भी विलुप्त होती नजर आ रही है। इस गायन शैली के बेड़ा समाज से जुड़े कुछ कलाकारों ने सास्कृतिक संध्या 'लोक के रंग बादी गीतों के संग' में मनमोहक प्रस्तुति दी। 

इस मौके पर उच्च शिक्षा राज्य मंत्री डॉ.धन सिंह रावत ने कहा कि सरकार विलुप्त होती बादी गीतों को मुख्यधारा में शामिल कर रही है। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी के सामने इस विधा को लाने से उनका ज्ञान बढ़ेगा और उन्हें अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी मिलेगी। इस मौके पर संस्था के महासचिव मनोज चंदोला ने कहा कि यह आयोजन ओएनजीसी के सहयोग से सफल हो पाया है। 

इसके तहत डॉक्यूमेंट्री, पुस्तक प्रकाशन के अलावा बादियों के गावों में कार्यशालाएं भी लगाई जा रही हैं। इस मौके पर घनसाली से बेड़ा कलाकार शिवचरन, पौड़ी से रामभक्ति व डागचौरा से तूंगी राम, ईश्वरभक्ति, काडे से नरेश, तमलाग से रमेश व नैठना से मनोज और राजेश्वरी ने प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में लोक गायिका कल्पना चौहान, रेशमा शाह, हेमा नेगी करासी आदि ने भी प्रस्तुती दी। इस मौके पर वीरेंद्र नेगी राही, ओएनजीसी की निदेशक प्रीति पंत व्यास, संस्कृति निदेशक बीना भट्ट, डॉ. डीआर पुरोहित आदि मौजूद रहे।

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