देहरादून, विकास गुसाईं। साहसिक खेलों के प्रति बढ़ती युवाओं की दीवानगी और रोजगार के नए अवसरों को देखते हुए पर्यटन विभाग उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद में साहसिक खेलों के लिए अलग विंग की स्थापना करने जा रहा है। इसके लिए अलग मुख्य अधिशासी अधिकारी (सीईओ) की तैनाती की जाएगी, जो पूर्ण रूप से साहसिक खेलों से संबंधित कार्य देखेंगे। गढ़वाल व कुमाऊं में अलग-अलग निदेशकों की तैनाती की जाएगी और हर जिले में साहसिक खेल विकास अधिकारी तैनात होंगे। विभाग की मंशा फिलहाल इस विंग में 96 पद सृजित करने की है। 

उत्तराखंड में साहसिक खेल बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। यहां बंजी जंपिंग, साइक्लिंग टूर, पर्वतारोहण, ट्रेकिंग, स्कीइंग जैसे जमीनी साहसिक खेलो के साथ ही पैराग्लाइडिंग, हैंड ग्लाइडिंग और पैरा मोटरिंग जैसे एयरो स्पो‌र्ट्स केंद्र तेजी से खुल रहे हैं। वहीं, राफ्टिंग के साथ ही कयाकिंग जैसे साहसिक खेल युवाओं के बीच में सबसे लोकप्रिय हैं। सबसे अधिक युवा पर्यटक इसी के लिए उत्तराखंड भी आते हैं। साहसिक खेलों में पर्यटकों की बढ़ती संख्या और युवाओं को मिल रहे रोजगार को देखते हुए प्रदेश सरकार ने भी इस दिशा में कदम उठाए हैं। 

इस कड़ी में कुछ समय पहले ही राज्य ने साहसिक खेल नीति को मंजूरी दी है। अब केंद्र भी साहसिक खेलों के प्रचार प्रसार पर जोर दे रही है और इसे रोजगार का बड़ा जरिया मान रही है। इसे देखते हुए अब पर्यटन विभाग साहसिक खेलों के लिए एक पूरा कार्मिक ढांचा तैयार कर रहा है। प्रस्तावित ढांचे में साहसिक खेलों के लिए बनाए जा रहे विंग की कमान सीईओ के हाथ में रहेगी। मंडल स्तर पर निदेशकों की तैनाती होगी और जिला स्तर पर साहसिक खेल अधिकारी तैनात किए जाएंगे। इनमें साहसिक खेलों के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। फिलहाल नए ढांचे में 96 कार्मिक रखने प्रस्तावित हैं। इस प्रस्ताव को स्वीकार करने के बाद इनकी शैक्षणिक, अनुभव और आयु संबंधी पात्रता का निर्धारण करेगा। 

सचिव पर्यटन दिलीप जावलकर ने कहा कि साहसिक खेल तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र हैं। उत्तराखंड में इसके विकास की अच्छी संभावनाएं है। इसे देखते हुए पर्यटन विकास परिषद के अंतर्गत ही एक अलग विंग बनाया जा रहा है जो पूरी तरह साहसिक पर्यटन से संबंधित कार्य करेगा।

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