देहरादून, राज्य ब्यूरो। सातवें वेतनमान के मुताबिक पेंशन संशोधित नहीं होने से परेशानहाल सेवानिवृत्त कार्मिकों की मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सुध ली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनवरी, 2016 से पहले सेवानिवृत्त हुए इन कार्मिकों की पेंशन को संशोधित नहीं किए जाने के मामलों का निपटारा नहीं होने पर विभागाध्यक्षों, कार्यालयाध्यक्षों के साथ ही कोषागार के जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। मामलों पर जल्द कार्यवाहीं नहीं हुई तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। 

प्रदेश में एक जनवरी, 2016 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कार्मिकों को पेंशन सातवें वेतनमान के मुताबिक संशोधित किए जाने में हीलाहवाली के चलते परेशान होना पड़ रहा है। विभागों और कोषागारों का चक्कर काटने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हो पा रहा है। 

'दैनिक जागरण' ने पेंशनरों को पेश आ रही दिक्कतों को प्रमुखता से उठाया था। दरअसल विभागों और कोषागारों ने उक्त पेंशनरों को उनके हाल पर छोड़ दिया। वित्त विभाग ने एकीकृत वित्तीय प्रणाली के तहत नया सॉफ्टवेयर लागू कर पूरी व्यवस्था को ऑनलाइन तो किया, लेकिन महीनों की कसरत के बाद भी इस सॉफ्टवेयर से संबंधित दिक्कतें बनी हुई हैं। 

सेवानिवृत्त राजकीय पेंशनर्स संगठन और कर्मचारियों के कई संगठन पेंशन और वेतन भुगतान में पेश आ रही दिक्कतों को कई मर्तबा विभागों और कोषागारों के समक्ष उठा चुके हैं। वित्त विभाग के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद विभाग पेंशनरों को संशोधित पेंशन देने में दिक्कतें दूर करने को संजीदा नहीं हुए। 

अब दैनिक जागरण की खबर का मुख्यमंत्री ने संज्ञान लिया है। उन्होंने कहा कि पेंशनरों को नई पेंशन में दिक्कत नहीं होनी चाहिए। इसके लिए विभागाध्यक्षों की जिम्मेदारी तय की जाएगी। समस्या का जल्द समाधान नहीं हुआ तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में वित्त सचिव को निर्देश दिए गए हैं। 

नाकारा कर्मचारियों पर हीलाहवाली, विभागों को नोटिस

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की सरकार की मुहिम को सरकारी विभाग ही पलीता लगाने में जुटे हैं। आलम यह है कि कार्मिक विभाग द्वारा बार-बार नाकारा कर्मचारियों के संबंध में सूची मांगने के बावजूद विभाग इस ओर गंभीरता नहीं दिखा रहे हैं। 

इस पर अब कार्मिक विभाग ने सख्ती दिखाई है। अब कार्मिक विभाग की ओर से सभी विभागों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में विभागों को निश्चित समयसीमा के भीतर जवाब देना होगा और ऐसा न करने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी। 

प्रदेश सरकार ने दो माह पूर्व विभिन्न सरकारी महकमों में तैनात 50 वर्ष से अधिक आयु के नाकारा व भ्रष्ट अधिकारियों को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का निर्णय लिया था। इसके लिए बाकायदा वर्ष 2002 में जारी किए गए शासनादेश का उल्लेख करते हुए इसे सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए। 

कार्मिक विभाग ने इन आदेशों के साथ ही शासन व विभाग स्तर पर स्क्रीनिंग समितियों का गठन करने की व्यवस्था भी स्पष्ट की। इसमें कहा गया कि विभागाध्यक्ष व शासन के नियंत्रणाधीन अधिकारियों के लिए बनने वाली समिति के अध्यक्ष प्रशासकीय विभाग के अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव अथवा सचिव होंगे। विभागाध्यक्ष और प्रमुख सचिव अथवा सचिव (स्थिति के अनुसार) इसके सदस्य होंगे। 

यह समिति विभागों से मिली सूची का विस्तृत परीक्षण करेगी और इसके बाद अनिवार्य सेवानिवृत्ति के लिए कार्मिकों के नाम की संस्तुति करेगी। इसी प्रकार श्रेणी ग और घ के लिए विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता में समिति बनाने का प्रावधान किया गया। इसके बाद ऐसे कर्मचारियों के संबंध में शासन स्तर पर भी बैठकें हुई, जिनमें सभी विभागों को कहा गया कि वे तय समय के भीतर इसकी सूचना शासन को भेजेंगे। 

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बावजूद इसके हालात यह हैं कि चुनिंदा विभागों को छोड़ किसी ने शासन को यह सूची उपलब्ध कराने की जहमत नहीं उठाई। इस कारण अब कार्मिक विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया है। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी की ओर से इस संबंध में सभी विभागों को आदेश दिए जा रहे हैं। 

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Posted By: Bhanu

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