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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 08, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

युवतियों को हार न मानने की प्रेरणा देता है अ ह्यूमन एंडेवर Dehradun News

By BhanuEdited By:
Published: Sat, 08 Feb 2020 12:21 PM (IST)

अ ह्यूमन एंडेवर नाटक के माध्यम से संदेश दिया गया कि जिंदगी में किसी भी औरत के साथ अगर कुछ ...और पढ़ें

युवतियों को हार न मानने की प्रेरणा देता है अ ह्यूमन एंडेवर Dehradun News
युवतियों को हार न मानने की प्रेरणा देता है अ ह्यूमन एंडेवर Dehradun News

देहरादून, जेएनएन। जिंदगी में किसी भी औरत के  साथ अगर कुछ गलत होता है तो उसे उसका डटकर सामना करना चाहिए न कि डर कर हार मान लेनी चाहिए। 21वें भारत रंग महोत्सव के दूसरे दिन अ ह्यूमन एंडेवर नाटक के माध्यम से दर्शकों को यही संदेश दिया गया।

रिस्पना पुल के निकट स्थित नव निर्मित सभागार में आयोजित नाटक को देखने काफी संख्या में दर्शक पहुंचे। नाटक लेखिका मैरी शैली के जीवन पर आधारित रहा। उन्होंने लाख मुसीबतें आने पर भी हार नहीं मानी और आगे बढ़ती रहीं। नाटक की शुरुआत एक सपने से हुई। जिसमें युवती के साथ दुष्कर्म होता है और वह उस बुरे वक्त से निकलकर नई शुरुआत करती है।

सपना टूटने पर वह इस कहानी को लिखती है। नाटक को असमी भाषा में प्रस्तुत किया गया। भाषा अलग होने के कारण लोग इसे भाषाई तौर में समझने में भले ही उतने सफल न हुए हों, लेकिन नाटक में कलाकारों के चेहरे के हाव भाव व प्रस्तुति देखकर दर्शक नाटक में अंत तक बने रहे। नाटक की लेखिका शिल्पिका बोर्दोलोई है। जिसे उन्होंने ब्रह्मपुत्र कल्चरल फाउंडेशन के रंगकर्मियों के साथ मिलकर प्रस्तुत किया। नाटक में अन्य कलाकारों में बुल्की कलिता, उत्पल दास, श्यामलिमा दत्ता, अनाहिता अमानी सिंह, दीपांकर, देबोजित, श्रीमंत बोहरा, मोंजिल, सुनील बोहरा, नीलांश शामिल रहे।

80 के दशक की है कहानी

नाटक की निर्देशक शिल्पिका बोर्दोलोई ने बताया कि नाटक की कहानी 80 के दशक की लेखिका मैरी शैली पर आधारित है। जिन्होंने एक किताब लिखी थी फ्रैंकेस्टाइन। किताब लिखने के बारे में उनको कैसे विचार आया। उनकी कहानी को नाटक में दर्शाया गया है।

अतुलनीय है उत्तराखंड की लोक कलाएं: प्रो. पुरोहित

हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व कलाविद प्रो. डीआर पुरोहित ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति अतुलनीय है। इसके संवद्र्धन व संरक्षण के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जाने की जरूरत है। प्रो. पुरोहित श्री गुरुराम राय पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में बतौर मुख्यअतिथि पहुंचे थे। 

कॉलेज के अंग्रेजी व इतिहास विभाग की ओर से संयुक्त रूप से उत्तराखंड की लोक कलाओं व संस्कृति पर कार्यक्रम का आयोजित किया था। जहां प्रो. डीआर पुरोहित ने कार्यक्रम को संबोधित किया। प्रो पुरोहित वर्तमान में आइआइएएस शिमला के नेशनल फैलो हैं। 

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उन्होंने उत्तराखंड के विविध प्रकार के नाट्य पद्धतियों, सांस्कृतिक मूल्यों, संगीत विधाओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशेषज्ञ डॉ. संजय पांडे ने गढ़वाल व कुमाऊं की संगीत रचनाओं व स्वरचित कविताओं की प्रस्तुति दी। कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष डॉ. एमएस गुसाई ने उत्तराखंड लोक संस्कृति व लोक कलाओं को लेकर कॉलेज में किए जा रहे कार्यों को प्रस्तुत किया। इस मौके पर डॉ. मधु, डॉ.डी सिंह, डॉ. संजय पडलिया, डॉ. महेश, डॉ. ज्योति, डॉ. अनुपम व विद्यार्थी मौजूद रहे।

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