देहरादून, राज्य ब्यूरो। विषम भूगोल और 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में इस फायर सीजन में 16 करोड़ की राशि से जंगलों की आग पर काबू पाया जाएगा। शासन से यह राशि अवमुक्त होने के बाद वन महकमे ने इसे जिलों को जारी भी कर दिया है। आग के लिहाज से नैनीताल, रुद्रप्रयाग व अल्मोड़ा जिलों को सर्वाधिक संवेदनशील माना गया है। इसी के दृष्टिगत इन दोनों जिलों को सर्वाधिक बजट जारी किया गया है।

फायर सीजन (15 फरवरी से मानसून आने तक की अवधि) फायर सीजन में जंगलों को आग से बचाने के लिए वन महकमे ने 46 करोड़ का प्रस्ताव शासन को भेजा था। इसमें पिछले वर्षों में जिलों में आग की घटनाओं और संवेदनशीलता के हिसाब से जिला फायर प्लान तैयार कर धनराशि का निर्धारण भी किया गया। इस पर मंथन के बाद शासन ने वन विभाग को दावानल पर नियंत्रण के लिए 16 करोड़ की राशि अवमुक्त की है।

अवमुक्त धनराशि जिलों को जारी भी कर दी गई है। नोडल अधिकारी (वनाग्नि) एवं मुख्य वन संरक्षक वीके गांगटे के अनुसार बजट आवंटन में पिछले सालों में हुई आग की घटनाओं और संवेदनशीलता को ध्यान में रखा गया है। नैनीताल, रुद्रप्रयाग व अल्मोड़ा जिलों को अधिक संवेदनशील मानते हुए इन्हें सबसे ज्यादा बजट जारी किया गया है। इनके अलावा उन जिलों का बजट भी ठीकठाक रखा गया है, जहां चीड़ के पेड़ों की अधिकता की वजह से आग ज्यादा फैलती है।

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नोडल अधिकारी (वनाग्नि) गांगटे ने बताया कि शनिवार को फायर सीजन शुरू होने के साथ ही महकमा पूरी मुस्तैदी से जुट गया है। उन्होंने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में पूर्व में हुई बर्फबारी के कारण फायर लाइनों को साफ नहीं किया जा सका था। अब मौसम खुलने के साथ ही यह कार्य तेजी से चल रहा है। फायर अलर्ट सिस्टम ने कार्य करना प्रारंभ कर दिया है। आग की सूचना को बीट स्तर तक पहुंचाने के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि आग पर काबू पाया जा सके।

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