यूजीसी अनुदान पाने की दौड़ में शामिल 13 डिग्री कालेज
प्रदेश के 13 सरकारी महाविद्यालय अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से अनुदान हासिल करने की दौड़ में शामिल होंगे। इस अनुदान को पाने के लिए नैक (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल) से प्रमाणपत्र हासिल करने में उन्हें अड़चन पेश नहीं आएगी।
राज्य ब्यूरो, देहरादून: प्रदेश के 13 सरकारी महाविद्यालय अब विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) से अनुदान हासिल करने की दौड़ में शामिल होंगे। इस अनुदान को पाने के लिए नैक (नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रेडिटेशन काउंसिल) से प्रमाणपत्र हासिल करने में उन्हें अड़चन पेश नहीं आएगी। सरकार ने पर्वतीय और दूरदराज क्षेत्रों के इन महाविद्यालयों को नैक प्रमाणन को एक करोड़ की राशि मुहैया कराई है।
प्रदेश में अब तक 105 सरकारी महाविद्यालयों की स्थापना की जा चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर को यूजीसी से संसाधनों के विकास, निर्माण कार्यों और शोध व शिक्षण गुणवत्ता के लिए अनुदान नहीं मिलता। इसकी प्रमुख वजह इन महाविद्यालयों का नैक से मूल्यांकन नहीं होना है। नैक से यह प्रमाणपत्र और ग्रेडिंग मिलने के बाद महाविद्यालय अनुदान हासिल करने के पात्र हो जाते हैं। इस पात्रता के लिए महाविद्यालयों में छात्र-छात्राओं और शिक्षण के लिए जरूरी सुविधाएं होनी आवश्यक हैं। प्रदेश में दूरदराज पर्वतीय व ग्रामीण क्षेत्रों में महाविद्यालय खोले तो गए हैं, लेकिन उनके पास न तो अपना भवन है और न ही भूमि। कक्षाकक्ष भी पर्याप्त नहीं हैं। नतीजतन बड़ी संख्या में महाविद्यालय नैक से मूल्यांकन नहीं करा सके हैं। उनके विकास में यही बड़ी बाधा भी बन चुकी है। सरकार अपने महाविद्यालयों को भवन मुहैया कराने के अभियान में जुटी है।
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इस सुविधा से लैस होने वाले 13 महाविद्यालयों को अब अन्य जरूरी संसाधनों के लिए एक करोड़ की राशि देने के आदेश उच्च शिक्षा अपर सचिव एमएम सेमवाल ने जारी किए हैं। इस राशि से उन्हें फर्नीचर, उपकरणों, अनुरक्षण कार्यों के साथ ही अन्य विभागीय खर्चों की पूर्ति कर सकेंगे।
इन राजकीय महाविद्यालयों को नैक मूल्यांकन को दी गई धनराशि:
सोमेश्वर, टनकपुर, सितारगंज, बाजपुर, चौबट्टाखाल, कोटद्वार भावर, कर्णप्रयाग, बड़कोट, नई टिहरी, डोईवाला, नरेंद्रनगर, चुडिय़ाला और लक्सर।
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