उत्तराखंड में लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को आग का सर्वाधिक खतरा
विषम भूगोल और 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में जंगलों की आग की लिहाज से 11.28 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को सर्वाधिक खतरा है। विभाग ने इसे अति संवेदनशील श्रेणी में रखा है जबकि 15.41 लाख हेक्टेयर मध्यम 11.14 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को संवेदनशील श्रेणी में शामिल है।

राज्य ब्यूरो, देहरादून: विषम भूगोल और 71.05 फीसद वन भूभाग वाले उत्तराखंड में जंगलों की आग की लिहाज से 11.28 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को सर्वाधिक खतरा है। विभाग ने इसे अति संवेदनशील श्रेणी में रखा है, जबकि 15.41 लाख हेक्टेयर मध्यम और 11.14 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र को संवेदनशील श्रेणी में शामिल किया गया है। वन क्षेत्रों की संवेदनशीलता के हिसाब से वहां वनकर्मियों की तैनाती की जा रही है। इस संबंध में सभी संबंधित वन प्रभागों को निर्देश जारी किए गए हैं।
उत्तराखंड में पिछले साल अक्टूबर से जंगलों के झुलसने का जो क्रम शुरू हुआ था, वह अभी तक थमा नहीं है। विभाग के आंकड़े ही बताते हैं कि अभी तक आग की 253 घटनाओं में 337.42 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंच चुका है। इस दौरान 10 हेक्टेयर क्षेत्र में किया गया पौधारोपण खाक हो गया तो राज्य में 5600 पेड़ों को भी क्षति पहुंची है। यही नहीं, आग बुझाने के दौरान दो कार्मिक झुलसे भी। इस परिदृश्य को देखते हुए आने वाले दिनों में जंगलों के तेजी से धधकने की चिंता वन महकमे को रह-रह कर सता रही है। इस सबको देखते हुए महकमे ने पूर्व में हुई आग की घटनाओं के आधार पर अति संवेदनशील, मध्यम व संवेदनशील श्रेणी में वन क्षेत्रों का वर्गीकरण किया है। इस नजरिये से देखें तो राज्य में 37.83 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र संवेदनशील श्रेणी के अंतर्गत है। अलबत्ता, 15.64 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र ऐसा है, जहां आग का खतरा नहीं के बराबर है।
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जाहिर है कि आने वाले दिनों में तापमान में बढ़ोतरी होने पर वनों को आग से बचाने के लिए नए सिरे से रणनीतिक तौर पर कार्य करने की जरूरत है। राज्य के नोडल अधिकारी (वनाग्नि) मान सिंह के मुताबिक वन क्षेत्रों की संवेदनशीलता के हिसाब से भी रणनीति तय की गई है। इसी के दृष्टिगत संबंधित संवेदनशील क्षेत्रों में वनकर्मियों के साथ ही फायर वाचर और दैनिक श्रमिकों की तैनाती की जाएगी। इसके साथ ही अन्य कदम भी उठाए जा रहे हैं।
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