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    World Malaria Day 2025: कौन हैं रोनाल्‍ड दास? की थी मलेरिया की पहचान, देवभूमि उत्‍तराखंड से खास नाता

    Updated: Thu, 24 Apr 2025 03:02 PM (IST)

    World Malaria Day 2025 डा. रोनाल्ड रास को मलेरिया रोग की पहचान करने के लिए जाना जाता है। ये बात बेहद कम लोग जानते हैं कि उत्‍तराखंड से उनका खास नाता था। बता दें कि मच्छर के काटने से मलेरिया रोग फैलने की खोज करने पर उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। आइए जानते हैं विस्‍तार से ।

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    World Malaria Day 2025: मलेरिया की पहचान करने वाले रोनाल्ड का अल्मोड़ा तीन वर्ष से मलेरिया मुक्त.

    जागरण संवाददाता, अल्मोड़ा। World Malaria Day 2025: विश्व मलेरिया दिवस हो और अल्मोड़ा को रोनाल्ड रास याद न आएं, ऐसा हो ही नहीं सकता। इस शख्सियत का नाम भले ब्रिटिशकाल के अतीत की ओर ले जाता हो, मगर इन्होंने अल्मोड़ा में रहकर जो काम किया, वह वर्षों बीतने के बाद भी इस सांस्कृतिक शहर की स्मृतियों में दर्ज है।

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    डा. रोनाल्ड रास को मलेरिया रोग की पहचान करने के लिए जाना जाता है। उनका जन्म अल्मोड़ा के थामसन हाउस में हुआ था। थामसन हाउस आज भी इस शहर की धरोहर है।

    पिछले तीन वर्षों में मलेरिया का एक भी मामला नहीं

    मच्छर के काटने से मलेरिया रोग फैलने की खोज करने पर उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। रोनाल्ड रास की जन्मस्थली अल्मोड़ा में पिछले तीन वर्षों में मलेरिया का एक भी मामला सामने नहीं आया है। इससे स्वास्थ्य विभाग को भी राहत मिली है।

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    गर्मी बढ़ने, शहरों के लगातार प्रदूषित होने से मलेरिया का खतरा भी बढ़ने लगा है। गर्मी के मौसम में तो अब पहाड़ में भी मच्छरों का प्रकोप होने लगा है। लेकिन जागरुकता, समयबद्ध कारगर रणनीति से यहां बीते तीन वर्षों में कोई भी व्यक्ति मलेरिया का शिकार नहीं हुआ है।

    खोज के लिए 1902 में मिला नोबेल पुरस्कार

    महान वैज्ञानि रोनाल्ड रॉस ने ने 1897-98 में सबसे पहले यह खोज की थी कि मलेरिया मच्छर के काटने से फैलता है। अंग्रेजी शासन में भारतीय सेना के स्कॉटिश अफसर सर कैंपबेल रॉस की 10 संतानों में सबसे बड़े थे रोनाल्ड रॉस। 13 मई 1857 को अल्मोड़ा में जन्मे डा. रोनाल्ड आठ साल बाद पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चले गए। इसके बाद उन्होंने मलेरिया के कारण एवं उसके निदान की अचूक औषधि कुनैन की खोज की।

    रोनाल्ड रॉस 1881 में भारतीय चिकित्सा सेवा में चयनित हुए। उन दिनों मलेरिया के बुखार से महामारी फैल रही थी और मलेरिया के कारणों का कुछ पता नहीं लग पा रहा था। रोनाल्ड ने 1892 में मलेरिया को लेकर शोध शुरू किया। फिर 1897-98 में यह साबित करने में सफल रहे कि मलेरिया मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। 1902 में उन्हें नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

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    कोरोना काल में भी था मलेरिया की दवा का महत्व

    कोरोना महामारी के दौरान मलेरिया दवा का महत्व बढ़ गया था। वर्तमान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तब इसे कोरोना के लिए एक कारगर बताया था। भारत इस दवा के बड़े उत्पादक देशों में शामिल है।

    जागरुकता और समय पर कारगर उपाय से मलेरिया पर नियंत्रण पाया गया है। डेंगू के मामले कुछ आए जरुर है। लेकिन वह भी मैदानी जिलों से ही यहां पर आए हैं। तीन वर्षों से मलेरिया का एक केस भी नहीं आया। - कमलेश, जिला सर्विलांस अधिकारी, स्वास्थ्य विभाग, अल्मोड़ा\B