Varanasi water crisis: महादेव के शहर में 31 मार्च तक उच्चीकृत होगा WTP, दूर होगा पानी का संकट
वाराणसी में गर्मी के दिनों में पानी की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर निगम जल निगम और जलकल विभाग मिलकर काम कर रहे हैं। भेलूपुर स्थित जलकल परिसर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी) के उच्चीकृत का कार्य 31 मार्च तक पूरा करने का लक्ष्य है। इससे पानी के प्रेशर में बढ़ोतरी होगी और करीब आठ से दस लाख आबादी को फायदा होगा।

जागरण संवाददाता, वाराणसी। नगर निगम गर्मी के दिनों में भी पेयजल की आपूर्ति सामान्य बनाने के लिए अभी से रूपरेखा बनाने में जुटा हुआ है। गर्मी में पानी के लीकेज को दुरुस्त कर शुद्ध पेयजल की आपूर्ति की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए नगर निगम, जल निगम व जलकल विभाग संयुक्त रूप से एक व्यापक रूपरेखा बनाई है।
इस क्रम में जल निगम को भेलूपुर स्थित जलकल परिसर में वाटर ट्रीटमेंट प्लांट (डब्ल्यूटीपी ) के उच्चीकृत का कार्य हरहाल में 31 मार्च तक पूर्ण करने का निर्देश दिया गया है। वहीं जल निगम ने डब्ल्यूटीपी के उच्चीकृत का करीब 90 प्रतिशत पूर्ण कर लेने का दावा किया गया है। ऐसे में इस बार गर्मी में सिस वरूणा क्षेत्र में पानी का संकट होने की संभावना नहीं हैं। अब गंगा का जलस्तर कम होने पर पानी ही शहर में पानी का संकट गहरा सकता है।
जलकल परिसर में वर्ष 1964 में 250 एमएलडी की क्षमता को डब्ल्यूटीपी लगाया गया था। वहीं वर्तमान में इसकी क्षमता घटकर 110 एमएलडी पेयजल की आपूर्ति हो गई है। काेनिया से लेकर करौंदी के आदित्यनगर, भेलूपुर, सिगरा, औरंगाबाद, बेनियाबाग सहित सिस वरूणा यानी मुख्य शहरों के प्राय: सभी मोहल्लों व कालोनियों में पानी की आपूर्ति डब्ल्यूटीपी से होती है।
भदैनी स्थित पंपिंग स्टेशन पर कार्य करते। जागरण
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डब्ल्यूटीपी की क्षमता कम होने से शहर के विभिन्न मोहल्लों में लो-प्रेशर की समस्या बनी हुई है। डब्ल्यूटीपी के उच्चीकृत होने से पानी के प्रेशर भी बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
शहर की करीब आठ से दस लाख आबादी होगी लाभांवित
उप्र जल निगम ने 108 करोड़ रुपये से सेटलिंग टैंक की मरम्मत, रा-वाटर पर पंप बदलने, फिल्टर प्लांट मरम्मत, स्काडा सहित अन्य कार्य पूर्ण करा लिया है। निगम ने डब्ल्यूटीपी के जीर्णोद्धार का कार्य 31 मार्च तक पूर्ण कर लेने का लक्ष्य रखा है। वहीं भदैनी स्थित लिफ्ट पंप (इनटेक पंप) भी नया लगाया जा रहा है ताकि भेलूपुर स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट को पूरी क्षमता से संचालित किया जा सके।
उच्चीकृत होने के बाद डब्ल्यूटीपी क्षमता 110 से बढ़कर 250 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) हो जाएगी। इस प्लांट के जीर्णेद्धार के बाद करीब डेढ़ लाख घर अर्थात करीब आठ से दस लाख आबादी लाभांवित होगी। पानी की निर्बाध आपूर्ति के साथ गुणवत्ता भी बढ़ेगी।
भेलूपुर स्थित जलकल संस्थान में हो रहे वाटर टीमेंट प्लांट का कार्य। जागरण
40 साल बाद कराई सेटलिंग टैंक की सफाई
दूषित पेयजल आपूर्ति की बढ़ती शिकायत को देखते हुए जल निगम ने फिल्टर प्लांट का भी जीर्णोद्धार कराया है। फिल्टर को अब स्काडा से जोड़ दिया गया है। इसी प्रकार जलकल परिसर में चार सेटलिंग टैंक में दो की सफाई करीब 40 साल कराई गई है।
भदैनी पंपिंग स्टेशन पर दो पंप स्टैंडबाइ
भदैनी पंपिंग स्टेशन पर तीन पंपिंग स्टेशन है। पंप नंबर एक का दोनों पंप बंद था। जल निगम ने 28 केएलडी (किलो लीटर पर डे) का नया पंप लगाया जा रहा है। इसमें दो पंप स्टैंडबाइ होगा। जबकि पंप संख्या दो की क्षमता 180 केएलडी, पंप संख्या तीन का 80 व 40 केएलडी की क्षमता है। नया पंप से गंगा का पानी अधिक तेजी से खींचा जा सकेगा।
बेनियाबाग शहर का दूसरा बड़ा पंपिंग स्टेशन
शहर में चार पंपिंग स्टेशन हैं। इसमें भेलूपुर, बेनियाबाग, राजघाट व व गोपालबाग (जैतपुरा) शामिल है। वहीं बेनियाबाग शहर का दूसरा बड़ा पंपिंग स्टेशन है। यहां सीडब्ल्यूआर (सेंट्रल वाटर रिजर्वायर) की क्षमता प्रतिदिन सुबह-शाम 75000 किलोलीटर की है।
भेलूपुर स्थित जलकल संस्थान में हो रहे वाटर टीमेंट प्लांट का कार्य। जागरण
साढ़े चार करोड़ की लागत बेनियाबाग स्थित सीडब्ल्यूआर का भी हाल में ही जीर्णोद्धार कराया है। इसके तहत पुरानी पंपों के स्थान चार नए पंप लगा दिए गए हैं। ऐसे में आटोमैटिक पंपिंग स्टेशन से करीब दो लाख घर लाभांवित हो रहे हैं। बेनियाबाग क्षेत्र में अब लो प्रेशर की समस्या खत्म हो गई है। वहीं दो सीडब्ल्यूआर का जीर्णोद्धार 31 मार्च तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।
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गर्मी से पहले कनेक्ट होगा ओवरहेड टैंक
नगर निगम ने जलनिगम को 31 मार्च तक चार ओवरहैड टैंक चालू करने का निर्देश दिया है। इसमें नगर निगम पेट्रोल पंप के पास स्थित ओवर हेड टैंक, सिगरा स्थित शहीद उद्यान में ओवरहेड टैंक, नदेसर स्थित धोबीघाट में ओवरहेड टैंक, अनंता नगर कालोनी टैंक शामिल है।
डब्ल्यूटीपी क्षमता 110 से बढ़कर 250 एमएलडी (मिलियन लीटर पर डे) होने से नककूपों पर निर्भरता खत्म होगी। वहीं पानी का उत्पादन नदी श्रोत गंगा का अधिक से अधिक उपयोग होगा। ऐसे में पेयजल की आपूर्ति व भूगर्भ के जलस्तर में सुधार होने की संभावना और बढ़ जाएगी। वहीं लीकेज ठीक करने के लिए पानी की नई पाइप लाइन बिछाने का प्रस्ताव है। इसका भी सर्वे कराया जा रहा है। -अशोक कुमार तिवारी, महापौर
शहर में पानी की मांग व आपूर्ति का विवरण
- 20.63 लाख : जनसंख्या
- 600 एमएलडी आपूर्ति
- 350 एमएलडी : एमएलडी पेयजल की आवश्यकता
- 165.63 एमएलडी नान रेवेन्यू वाटर
आपूर्ति
- नदी स्रोत से 160 एमएलडी
- नलकूपों से 243 एमएलडी
- 199 बड़े नलकूप
- 213 मिनी नलकूल
- 73 ओवर हेड टैंक
- 43 : टैंकर
- 3560 : हैंडपंप
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