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    पूर्वांचल में पांव पसार रहा स्क्रब टाइफस, 493 मरीज मिलने से मची सनसनी

    By Sangram SinghEdited By: Vivek Shukla
    Updated: Sat, 03 Jan 2026 08:48 AM (IST)

    पूर्वी उत्तर प्रदेश में स्क्रब टाइफस तेजी से पांव पसार रहा है, बीएचयू अस्पताल में इस साल 2,790 जांचों में 493 मरीज मिले हैं। यह बीमारी चिगर माइट के का ...और पढ़ें

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    पूर्वांचल के जिलों में बाढ़ व बारिश के बाद बढ़ी नमी के कारण बढ़ा खतरा। सांकेतिक तस्वीर

    संग्राम सिंह, वाराणसी। स्क्रब टाइफस पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेजी से पांव पसार रहा है और पिछले दो वर्षों से इसके मरीजों की संख्या बढ़ी है। बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में इस वर्ष 2,790 लोगों की जांच में 493 मरीज पाए गए हैं। 19 प्रतिशत नमूनों का पाजिटिव पाया जाना गंभीर समस्या का संकेत है। यह मरीज पूर्वांचल के अलावा बिहार, बंगाल, बिहार, मध्य प्रदेश और झारखंड के जिलों से आए थे।

    पिछले साल जून से दिसंबर तक 2,512 संदिग्ध मरीजों की जांच में 481 पाजिटिव केस (17 प्रतिशत) मिले थे। मरीजों की संख्या बढ़ने के कारण जनरल मेडिसिन विभाग की तरफ से एडवाइजरी जारी करने की तैयारी है। अधिकांश डाक्टरों की ओपीडी में बीमारी को लेकर मरीजों की काउंसिलिंग शुरू की गई है। माइक्रोबायोलाजी विभाग में हुए शोध में कई नए तथ्य सामने आए हैं।

    आइएमएस के डीन रिसर्च प्रो. गोपालनाथ और डा. मनोज कुमार कहते हैं कि यह बीमारी गंभीर बैक्टीरियल संक्रमण है, जो ओरिएंटिया त्सुत्सुगामुशी नामक जीवाणु से होता है। स्क्रब टाइफस रोग मुख्यतः झाड़ियों, घास-फूस और खेतों में पाए जाने वाले सूक्ष्म कीट चिगर माइट (लाल कीट) के काटने से फैल रहा है। इसलिए खेतों में काम करने वाले किसान, मजदूर और ग्रामीण आबादी के लिए खतरा भी अधिक है।

    प्रारंभिक लक्षण तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द आदित डेंगू व वायरल फीवर जैसा होने के कारण इनकी पहचान देर से होती है। इस कारण स्थिति गंभीर होने के बाद पहचान हो पाती थी। अब बुखार, वायरल को लेकर जागरूकता, आइजीएम एलिसा टेस्ट की उपलब्धता से इस बीमारी की पहचान आसान हुई है।

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    पहला केस कुमाऊं क्षेत्र से मिला था

    डॉ. सुधीर कुमार सिंह व डाॅ.अलका शुक्ला ने बताया कि त्सुत्सुगामुशी ट्रायंगल क्षेत्र उत्तर में पूर्वी रूस, दक्षिण में आस्ट्रेलिया, पूर्व में जापान और पश्चिम में पाकिस्तान तक है। भारत इस त्रिभुज के भीतर है, इसलिए यहां स्क्रब टाइफस का पाया जाना भौगोलिक दृष्टि से स्वाभाविक है। देश में स्क्रब टाइफस का पहला वैज्ञानिक विवरण 1938 में कुमाऊं क्षेत्र से मिलता है।

    प्रदेश में 1945 में इसके मामले की पुष्टि हुई। वर्षों तक यह रोग सीमित रूप में सामने आता रहा, लेकिन 2012 में राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र द्वारा कई राज्यों में इसके प्रकोप की घोषणा के बाद स्पष्ट हुआ कि स्क्रब टाइफस देश के बड़े हिस्से में फैल चुका है।