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    Hanuman Janmotsav: हनुमत जन्मोत्सव पर अबकी भौमवार का संयोग, काशी के ज्योतिषाचार्य ने बताई पूजा की विधि और जन्मोत्सव की अनसुनी कहानी

    हनुमानजी जन्मोत्सव साल में दो बार मनाया जाता है। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा पर 23 अप्रैल को हनुमान जन्मोत्सव मनाया जाएगा। हनुमान जी के प्रसन्न होने से जीवन में आने वाले सभी संकटों से मुक्ति मिलती है। जीवन सुखमय होता है। उल्लेख है कि माता अंजना फल लेने चली गईं तब हनुमानजी सूर्य को फल समझकर निकट पहुंच गए और वहां राहु को झटका दिया था।

    By pramod kumar Edited By: Abhishek Saxena Updated: Mon, 22 Apr 2024 12:10 PM (IST)
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    हनुमत जन्मोत्सव पर अबकी भौमवार का संयोग

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। श्रीराम भक्त हनुमान का जन्मोत्सव वर्ष में दो बार मनाया जाता है। प्रथम चैत्र शुक्ल पूर्णिमा तो दूसरी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को। चैत्र शुक्ल पूर्णिमा 23 अप्रैल की भोर 2ः27 बजे लग रही जो 24 की भोर 4ः15 बजे तक रहेगी। इसलिए इस बार हनुमत जन्म 23 अप्रैल को मनाया जाएगा। मेष लग्न प्रातः 6ः43 बजे से 8ः39 बजे तक रहेगा। अबकी हनुमानजी के जन्म वार भौमवार का संयोग बेहद खास होगा।

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    जन्म लेते ही हनुमानजी को लगी थी भूख

    ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड सर्ग 35 के श्लोक नंबर 31 में उल्लेख है कि जन्म लेते ही हनुमान जी को भूख लगी। अत: माता अंजना फल लेने चली गईं। उस समय सूर्योदय हो रहा था। भूख से व्याकुल हनुमानजी ने सूर्य को फल समझा और उन्हें खाने आकाश मंडल में दौड़े। उसी दिन राहु भी ग्रहण के चलते सूर्य के समीप था।

    हनुमानजी ने सूर्य रथ के पास आए हुए राहु को ऐसा झटका मारा की वह मूर्छित हो गया। होश आने पर क्रोध में इंद्र के पास गया और कहा कि मुझसे भी बलवान राहू सूर्य को ग्रहण लगाने के लिए आया है। इंद्र वहां आए और हनुमान जी पर वज्र से प्रहार कर दिया जिसके प्रभाव से उनकी ठोढ़ी टूट गई।

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    वहीं दूसरी तरफ, हनुमद् उपासना कल्पद्रुम ग्रंथ में वर्णित है कि चैत्र शुक्ल पूर्णिमा मंगलवार के दिन मूंज की मेखला से युक्त और यज्ञोपवीत से भूषित हनुमान जी उत्पन्न हुए। इस विषय के ग्रंथों में इन दोनों के उल्लेख मिलते हैं।

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    पूजन विधि

    चैत्र पूर्णिमा पर प्रात: स्नानादि कर हनुमान जी का जन्मोत्सव मनाना चाहिए। हनुमत दर्शन कर उनका विधिवत पंचोपचार या षोडशोपचार पूजन कर नैवेद्य में लड्डू, ऋतु फल, खुर्मा इत्यादि अर्पित करना चाहिए। हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, हनुमान बाहुक, हनुमत सहस्त्रनाम, हनुमान मंत्र इत्यादि का पाठ-जप करना चाहिए।