संभल की ऐतिहासिक बावड़ी में अब तक 25 सीढियों को खोज, 16 दिन पहले शुरू हुई थी खाेदाई; चौथे दिन काम...
नगर के लक्ष्मणगंज इलाके में ऐतिहासिक बावड़ी की खोदाई का काम पिछले चार दिन भी बंद है। काम कर रहे मजदूर केवल निकली मिट्टी को हटाने में लगे हुए हैं। लक्ष्मणगंज में ऐतिहासिक बावड़ी की पूरी बिल्डिंग को खोजने के लिए लगभग 16 दिन पहले खोदाई शुरू की गई थी। लगभग तीस फीट खोदाई करके पहले तल के अधिकांश भाग में से मलबा हटाया गया है।

संवाद सहयोगी, जारगण, चंदौसी/संभल। नगर के लक्ष्मणगंज मुहल्ला में बावड़ी की खोदाई का काम चौथे दिन भी बंद रहा। नगर पालिका के लगे मजदूर केवल मिट्टी को हटाने में लगे हुए है। सुरक्षा को लेकर मौके पर पुलिस के साथ पीएससी के जवान तैनात है। पुलिस मौके पर आने वाले लोगों को बैरिकेडिंग से आगे नहीं आने दे रहे है।
नगर के मुहल्ला लक्ष्मणगंज में ऐतिहासिक बावड़ी की पूरी बिल्डिंग को खोजने के लिए लगभग 16 दिन पहले खोदाई शुरू हुई थी।
मलबा हटाकर तीस फीट तक साफ
जिसके बाद कर्मचारियों ने खोदाई करके मलबा हटाकर लगभग तीस फीट खोदाई करके पहले तल के अधिकांश भाग में से मलबा हटाकर साफ करते हुए 25 सीढ़ियों को खोज लिया है, लेकिन बुधवार को दूसरे भूतल की खोदाई के दौरान धुआं निकलने के बाद मौके पर पहुंचे एएसआई टीम ने निरीक्षण किया। तो वहां पर बिल्डिंग का कुछ हिस्सा टूट गया है ओर दरार बन गई है, इसलिए खोदाई करने पर रोक लगा दी गई है।
शनिवार को चौथे दिन भी खोदाई नहीं की गई और वहां पर लगे मजदूरों ने प्रथम तल की मिट्टी को ही बाहर निकालने में लगे हुए है। वहीं शहर के साथ आस पास के क्षेत्र से महिलाओं के साथ लोग बावड़ी को देखने के लिए पहुंच रहे है।
सुरक्षा के लिहाज से पुलिसबल तैनात
कोतवाली प्रभारी निरीक्षक रेनू देवी ने प्रथम व भूतल का निरीक्षण किया, इस दौरान कोतवाली प्रभारी निरीक्षक ने क्षेत्र में अवांछित गतिविधियों को रोकने के लिए बावड़ी के अंदर जाने पर प्रतिबंध लगा दिया। सुरक्षा को लगाए पुलिसकर्मियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा, कि सुरक्षा में किसी प्रकार की चूक न होने पाए।
टीम ने बावड़ी में फोटोग्रॉफी की
इसके साथ एएसआई की टीम भी शुक्रवार को बावड़ी पहुंची और उन्होंने प्रथम भूतल व दूसरे भूतल का क्षेत्र का संरक्षित धरोहर के अंतर्गत आने वाली इस ऐतिहासिक बावड़ी की फोटोग्राफी की थी। जिसमें बावड़ी की संरचना, नक्काशी की विस्तृत फोटोग्राफी की। इस फोटोग्राफी का उद्देश्य बावड़ी की वर्तमान स्थिति को रिकॉर्ड करना और इसके संरक्षण के लिए आवश्यक कदम उठाना है। विस्तृत सर्वेक्षण करते हुए कैमरे से फोटोग्राफी की।
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लोगों में है उत्सुकता
बावड़ी के मिलने के बाद क्षेत्रीय लोग ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में उत्सुकता का माहौल है। हर व्यक्ति ये जानने की कोशिश में है कि बावड़ी कितनी पुरानी है। पुरातत्व विभाग की टीम भी इसकी प्रामाणिकता का पता लगाने के लिए जुटी है। संभल एक पर्यटनस्थल के रूप में देखा जा सकता है।
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