संभल में खेल हो रहा उजागर ! अब विधायक के दिलवाए जामा मस्जिद के सामने वक्फ संपत्ति के अभिलेख जांच में निकले फर्जी
Sambhal News संभल में जामा मस्जिद के सामने बन रही पुलिस चौकी की जमीन को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि इस जमीन के वक्फ संपत्ति होने के दस्तावेज फर्जी हैं। इस मामले में संभल के सपा विधायक इकबाल महमूद पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्षी दलों ने इस मामले की जांच की मांग की है।

जागरण संवाददाता, संभल। Samabhal News: जामा मस्जिद के सामने निर्माणाधीन पुलिस चौकी के वक्फ संपत्ति होने के अभिलेख फर्जी मिले हैं। सपा का प्रतिनिधिमंडल 30 दिसंबर को संभल हिंसा में मृतकों के स्वजन से मिलने आया था। इस दौरान उन्हें पांच-पांच लाख की आर्थिक मदद भी दी गई।
प्रतिनिधि मंडल में नेता प्रतिपक्ष विधानसभा माता प्रसाद पांडे भी शामिल थे। आरोप है कि प्रतिनिधि मंडल के सामने संपत्ति के अभिलेख संभल के सपा विधायक इकबाल महमूद ने अधिवक्ता याकूब के माध्यम से अधिकारियों को उपलब्ध कराए थे।
जांच में अभिलेख ही फर्जी मिले
एसडीएम संभल वंदना मिश्रा, सीओ संभल और नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी मनि भूषण तिवारी ने इसकी संयुक्त रूप से जांच की थी। जांच में अभिलेख ही फर्जी मिले हैं। अधिशासी अधिकारी ने अज्ञात के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। आरोप है कि वक्फ के नाम पर जमीन बेचने का खेल भी किया जा रहा है।
एसपी ने बताया, जांच की जा रही है
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया कि जांच की जा रही है। जमीन के नाम पर खेल करने वालों की जल्द गिरफ्तारी की जाएगी। अधिशासी अधिकारी ने प्राथमिकी में कहा है कि अधिवक्ता द्वारा उपलब्ध कराए गए वक्फनामे में क्रम संख्या एक से 20 तक संपत्तियों का ब्योरा दिया गया है। इस अभिलेख की स्थलीय, भौतिक और अभिलेखीय जांच की गई। प्रतिनिधिमंडल के सामने उपलब्ध कराए गए अभिलेखों में संभल के मो.अब्दुल द्वारा 23 अगस्त, 1929 को प्रस्तुत किया गया वक्फनामा था। इसकी जांच में पाया गया कि वक्फनामे के मुताबिक एक से 20 नंबर तक की संपत्ति की चाहरदीवारी एक से चार किलोमीटर दूर तक हैं। इस बीच राजस्व गांव भी हैं।
चाहरदीवारी की भी पुष्टि नहीं
वास्तव में कोई मकान नहीं है। चाहरदीवारी की भी पुष्टि नहीं हो रही है। कई अन्य संपत्तियों की चाहरदीवारी का भी मिलान नहीं हो रहा । सरकारी कार्यालय भी हैं। इसके अलावा जिन भूमि का वक्फ किया बताया गया है, उनके स्वामित्व की भी पुष्टि नहीं हो रही है। वक्फनामा के मुताबिक हजारों बीघा जमीन का सौदा किया गया है। लेकिन अब्दुल समद की अपनी भूमि का कोई उल्लेख नहीं है। कुछ भूमि मदरसों को देना बताया गया है, लेकिन कितने मदरसों को दी गई है। इसकी भी पुष्टि नहीं हो रही है।
ओवैसी भी कर चुके हैं एक्स पर पोस्ट
प्राथमिकी के मुताबिक कथित वक्फ संपत्तियों को भी फर्जी पाया गया है। इसकी बिक्री भी की गई है। संपत्ति की चाहरदीवारी भी फर्जी दशाई गई है। लिहाजा अभिलेखों को फर्जी पाया गया है। काबिलेगौर है कि पुलिस चौकी के भवन को लेकर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने भी एक्स पर पोस्ट की थी। उन्होंने जमीन को वक्फ बोर्ड की बताया था। उन्होंने वक्फ बोर्ड के नाम पर अभिलेख भी पोस्ट किए थे। डीएम ने उसी दिन बयान जारी कर भूमि को सरकारी बताया था। डीएम ने गुरुवार को भी प्रेस वार्ता कर पूरे मामले को बिंदुवार स्पष्ट कर अभिलेखों को फर्जी बताया था। इस बारे में विधायक का पक्ष नहीं मिल सका है।
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वक्फ संपत्ति के नाम पर चल रहा खेल
संभल में कई स्थानों पर वक्फ संपत्ति बताकर खेल किया जा रहा है। कब्रिस्तान औऱ मदरसे को आवंटित भूमि दिखाकर उसे बेचा जा रहा है। पुलिस ने जांच में ऐसे कई लोगों को भी चिन्हित किया गया है। इनके बारे में जानकारी एकत्र की जा रही है। बताया गया है कि 50-50 रुपये के स्टांप पर भी काफी भूमि की ब्रिक्री की गई है।
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