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    Darul Uloom: नई लाइब्रेरी ज्ञान का खजाना... इस्लामिक तालीम देने वाले दारुल उलूम में पढ़ेंगे रामायण और गीता

    Updated: Tue, 22 Apr 2025 10:45 AM (IST)

    देवबंद के दारुल उलूम की नई लाइब्रेरी में 10 लाख से अधिक पुस्तकें होंगी। इस गोलाकार इमारत में कन्वेंशन हॉल और परीक्षा हॉल भी है। लाइब्रेरी में 17 भाषाओं में पुस्तकें हैं जिनमें रामायण गीता बाइबिल और चारों वेद भी शामिल हैं। यह लाइब्रेरी शोधकर्ताओं और विद्वानों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है।

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    दारुल उलूम की फाइल फोटो का प्रयोग किया गया है।

    संवाद सहयोगी, जागरण. देवबंद। इस्लामी तालीम के केंद्र दारुल उलूम देवबंद की तरह ही उसकी लाइब्रेरी भी विश्व में अलग पहचान रखती है। यहां की लाइब्रेरी में रामायण व गीता के अलावा सभी धार्मिक ग्रंथ और हर विषय की किताबें मौजूद हैं। पुरानी लाइब्रेरी छोटी पड़ने के कारण अब संस्था में नई लाइब्रेरी बनाई गई है। इस लाइब्रेरी की सात मंजिला नई इमारत बनकर तैयार है और इस साल के अंत तक यह लाइब्रेरी बेशकीमती किताबों से सज जाएगी।

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    फिलहाल नए भवन में पुस्तकों के लिए शेल्फ बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। नवनिर्मित लाइब्रेरी में लगभग 10 लाख किताबें रखी जाएंगी। पुरानी लाइब्रेरी का भवन छोटा पड़ने के चलते दारुल उलूम की उच्च स्तरीय कमेटी मजलिस-ए-शूरा ने नई लाइब्रेरी के निर्माण का प्रस्ताव पारित किया था और इसके निर्माण के लिए करीब आठ करोड़ रुपये का बजट रखा गया था।

    वर्ष 2006 में लाइब्रेरी का निर्माण कार्य शुरू हुआ तो धीरे-धीरे इसका बजट भी बढ़ता गया। वर्तमान में इसका बजट करीब 21 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

    देवबंद के दारुल उलूम में बनाई गई नई लाइब्रेरी।

    गोलाकर है लाइब्रेरी की इमारत

    लाइब्रेरी की इमारत गोलाकार होने के कारण यह सभी को अपनी ओर आकर्षित करती है। दारुल उलूम के नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी ने बताया कि दो लाख 62 हजार वर्ग फीट में बने सात मंजिला गोल भवन में 10 लाख से अधिक पुस्तकें रखने की व्यवस्था की गई है।

    भवन की पहली व दूसरी मंजिल में कन्वेंशन हाल जबकि इसके तहखाने को परीक्षा हाल बनाया गया है। लाइब्रेरी की दूसरी मंजिल पर किताबें रखने के लिए शेल्फ आदि बनाने का कार्य शुरू कर दिया गया है। यह कार्य पूरा होने के बाद किताबों की शिफ्टिंग का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। 

    मोहतमिम ने अपील की थी

    लाइब्रेरी का निर्माण शुरू होने के बाद मोहतमिम कार्यालय से अपील जारी हुई थी। इसमें दारुल उलूम ने प्रकाशकों और लेखन क्षेत्र से जुड़े लोगों से किसी भी विषय पर लिखी गई किताबें, धार्मिक पुस्तकें, ऐतिहासिक पत्र या अन्य लेखन सामग्री के माध्यम से लाइब्रेरी का सहयोग करने की अपील की थी।

    सोने के अक्षरों से लिखी कुरान, बाइबिल और चारों वेद

    दारुल उलूम की लाइब्रेरी की खास बात यह है कि इसमें 17 भाषाओं में विभिन्न विषयों पर आधारित पुस्तकें उपलब्ध हैं। इनमें अरबी, फारसी, उर्दू, अंग्रेजी, हिंदी, गुजराती, पंजाबी, तेलुगू, तमिल, फ्रांसीसी, बंगला, तुर्की, मलयालम, कन्नड़, मराठी, सिंधी और बर्मी भाषाएं शामिल हैं। इतना ही नहीं यहां हर विषय की पुस्तकों के अलावा सभी धर्मों के धार्मिक ग्रंथ भी मौजूद हैं।

    कुरान के अलावा ये भी हैं शामिल

    लाइब्रेरी में कुरान के अलावा रामायण, गीता, बाइबिल, ऋग्वेद, सामवेद, यर्जुवेद, अथर्ववेद, तौरात के अलावा सोने से लिखा कुरान पाक, एक पेज पर आधारित कुरान, मुगल शासक औरंगजेब का हस्तलिखित कुरान पाक, हजरत मोहम्मद साहब द्वारा मिस्र के बादशाह को लिखा गया पत्र, सबसे छोटा कुरान, इस्लामी विद्वानों और बुजुर्गों द्वारा लिखी गई पुस्तकों के अलावा अन्य पुस्तकों का बड़ा संग्रह है।

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    शोध को देश-विदेश से पहुंचते हैं लोग

    इस पुस्तकालय के महत्व का अंदाजा ऐसे लगाया जा सकता है कि अरब देशों के अलावा श्रीलंका, मलेशिया, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, अफगानिस्तान समेत विश्वभर के शोधकर्ता इस्लाम धर्म के विषयों पर शोध करने के लिए समय-समय पर यहां पहुंचते हैं। पुस्तकों के माध्यम से कोई भी जानकारी लेने के लिए विदेश के लोग पुस्तकालय में संपर्क करते हैं।