संकट: शुआट्स ने बंद किए 10 विभाग, 53 शिक्षकों को नौकरी से निकाला; इस बात का दिया हवाला
सैम हिगिनबाटम यूनिवर्सिटी कृषि प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय ने वित्तीय संकट के कारण 10 विभागों को बंद करने का निर्णय लिया है जिससे 53 शिक्षकों की नौकरी पर संकट मंडरा रहा है। इन शिक्षक की सेवाएं एक जुलाई 2025 से समाप्त हो जाएंगी। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि पिछले कुछ वर्षों से चल रहे आर्थिक संकट और वर्तमान आर्थिक मंदी के कारण यह निर्णय लिया गया है।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के लोगों के लिए एक बुरी खबर सामने आ रही है। यह खबर शिक्षा जगत से जुड़ी हुई है। दरअसल , सैम हिगिनबाटम यूनिवर्सिटी कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय (शुआट्स) ने वित्तीय संकट का हवाला देते हुए 10 विभागों को बंद करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही इन विभागों में कार्यरत 53 शिक्षकों को भी बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीनेट, प्रबंधन बोर्ड और अकादमिक परिषद की सिफारिशों के आधार पर इन विभागों को एक जुलाई 2025 से समाप्त करने का निर्णय लिया है।
शुक्रवार को शुआट्स प्रशासन के इस निर्णय के बाद खलबली मच गई है। जिन शिक्षक-कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है, उनमें से ज्यादातर का एक वर्ष का वेतन बैकलाग में है।इस निर्णय को लेकर शुआट्स की कुलसचिव प्रो. रानू प्रसाद ने आदेश भी जारी कर दिया है । इसमें विभाग बंद करने के कारण गिनाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से चल रहे आर्थिक संकट और वर्तमान आर्थिक मंदी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
इन सभी विभागों की सामाजिक प्रासंगिकता व आर्थिक स्थिरता की गहन समीक्षा के बाद यह निष्कर्ष निकाला गया कि इस विभाग का संचालन विश्वविद्यालय के सर्वोत्तम हित में नहीं है। विभाग को बंद करने के साथ ही इससे संबंधित शिक्षकों और पदों को भी समाप्त कर दिया गया है।
सैम हिगिनबाटम यूनिवर्सिटी कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान विश्वविद्यालय अपने 10 विभाग बंद करने जा रहा है। - जागरण
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इस निर्णय के तहत निम्नलिखित सेवाएं एक जुलाई से समाप्त मानी जाएंगी। शुआट्स प्रेस एंड मीडिया के चेयरमैन डा. रमाकांत दुबे के अनुसार लंबे समय से चल रहे वित्तीय संकट व आर्थिक मंदी को देखते हुए प्रबंध बोर्ड एवं अकादमिक परिषद की सिफारिश पर विश्वविद्यालय की सर्वोच्च संस्था सीनेट के अनुमोदन के बाद 10 विभाग/अनुभाग/स्कूल को एक जुलाई 2025 से एबोलिश करने का निर्णय लिया गया।
बंद किए जाने की प्रक्रिया विश्वविद्यालय के स्टेट्यूट्स के अनुसार शुरू की गई है। एक जुलाई से इनमें स्ववित्तपोषित पदों पर कार्यरत 53 शिक्षकों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी।
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