विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

प्रयागराज में सिमटेगा कछुआ सेंच्युरी का इको सेंसिटिव जोन, अभी 10 किमी का है दायरा, यहां दुर्लभ प्रजाति के हैं कछुए

By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
Published: Fri, 28 Nov 2025 01:41 PM (IST)

प्रयागराज कछुआ सेंच्युरी के इको सेंसिटिव जोन का सीमांकन फिर से होगा, जिससे सीमाएं तय होंगी और 10 किमी का ...और पढ़ें

प्रयागराज की कछुआ सेंच्युरी के इको सेंसिटिव जोन का नए सिरे से होगा सीमांकन, इससे सेंसिटिव जोन की सीमाएं तय होंगी।

प्रयागराज की कछुआ सेंच्युरी के इको सेंसिटिव जोन का नए सिरे से होगा सीमांकन, इससे सेंसिटिव जोन की सीमाएं तय होंगी।

HighLights

  1. गंगा नदी में प्रयागराज से मीरजापुर व भदोही तक 30 किमी में फैला है संरक्षित क्षेत्र

  2. 10 किलोमीटर वाले सेंसिटिव जोन का होगा सीमांकन, गतिविधियों का होगा सर्वे

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। प्रयागराज की कछुआ सेंच्युरी के इको सेंसिटिव जोन का नए सिरे से सीमांकन होने जा रहा है। इससे सेंसिटिव जोन की सीमाएं तय हो जाएंगी। इस सीमांकन के बाद 10 किलोमीटर के क्षेत्रफल वाले इस सेंसिटिव जोन का दायरा और घट जाएगा। ऐसे में प्रतिबंधित क्षेत्र से बाहर आने वाले इलाके में खनन के रास्ते खुले सकेंगे, जिससे सरकारी खजाने को मजबूती मिलेगी।

गंगा नदी में कुल कछआ सेंच्युरी का 30 किमी है दायरा

गंगा नदी की इस कछुआ सेंच्युरी का दायरा 30 किलोमीटर का है। यह प्रयागराज से एक तरफ भदोही तो दूसरी तरफ मीरजापुर तक फैला है। प्रयागराज में इसका क्षेत्रफल 10 किलोमीटर का है। जबकि, शेष 20 किलोमीटर का हिस्सा अन्य दोनों जनपदों में है।

सेसिटिव जोन में खनन प्रतिबंधित  

कछुओं के संरक्षण की नीति को मजबूती देने के लिए ही सेंच्युरी के आसपास के 10 किमी के दायरे को इको सेंसिटिव जोन घोषित किया गया है। इस सेंसिटिव जोन में खनन पूरी तरह से प्रतिबंधित है। अब इस सेंसिटिव जोन का नए सिरे से सीमांकन कराया जाएगा। इसमें जोन का दायरा फिर से तय किया जाएगा। संबंधित क्षेत्र का चिन्हांकन होगा। इसके अलावा सेंसिटिव जोन में चल रही गतिविधियों की भी मैपिंग होगी।

तीन माह में पूरा होगा सीमांकन कार्य : डीएफओ  

अफसरों का कहना है कि इस सीमांकन के बाद सेंसिटिव जोन का दायरा घटना लगभग तय है। ऐसे में जो इलाका सेंसिटिव जोन से बाहर आएगा, वहां फिर से खनन के पट्टे हो सकेंगे। डीएफओ अरविंद कुमार ने बताया कि तीन महीने के अंदर सीमांकन का कार्य पूर्ण कर लिया जाएगा।

तीनों जिलों के 85 गांवों का होगा सर्वे

यह सीमांकन तीनों जनपदों में वहां का प्रशासन कराएगा। प्रयागराज के 20, भदोही के 40 और मीरजापुर के करीब 25 गांवों में सर्वे होगा। राजस्व विभाग संबंधित तहसीलों की टीम से सर्वे कराएगा। प्रयागराज में मुख्य राजस्व अधिकारी को सीमांकन का नोडल बनाया गया है। प्रयागराज में इसके लिए मुख्य राजस्व अधिकारी को नोडल बनाया गया है।

यहां पाई जाती हैं कछुओं की दुर्लभ प्रजातियां

इस सेंच्युरी में कछुओं को सुरक्षित माहौल मिल रहा है। इसकी वजह से इनकी संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। खास बात यह है कि थ्री स्ट्रिप्ड रूफ्ड, ब्लैक स्पाटेड, साफ्ट शेल, रेड व ब्राउन रूफ्ड प्रजाति के कछुए भी यहां पाए जाते हैं, जो बेहद दुर्लभ हैं।

यह भी पढ़ें- Magh Mela 2026 प्रयागराज माघ मेला को लेकर रेलवे का बड़ा प्लान, महाकुंभ सा होगा प्रचार, बुकलेट यात्रियों की करेगी मदद

यह भी पढ़ें- बेसिक स्कूलों की छात्राएं लोगों को बताएंगी बाल विवाह है अभिशाप, लेंगी शपथ कि न ऐसा करेंगी न ही इसे होने देंगी