महाकुंभ में एप्पल के को-फाउंडर स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पावेल, दुनिया की सबसे धनी महिलाओं में से एक है ये लेडी
महाकुंभ में दुनिया भर के लोग शामिल हो रहे हैं जिनमें एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पावेल जॉब्स भी शामिल हैं। वह आध्यात्मिकता की खोज में महाकुंभ में आ रही हैं और लगभग 10 दिनों तक श्रीनिरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के शिविर में रुकेंगी। वह मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा में अमृत स्नान भी करेंगी।

जागरण संवाददाता, महाकुंभ नगर। महाकुंभ का आयोजन दुनिया में आकर्षण का केंद्र बनने के साथ ही विश्व भर में आध्यात्मिकता और भारतीय संस्कृति का संदेश फैलाने का माध्यम बन गया है। देश-दुनिया प्रभावशाली लोग भी पुण्य की डुबकी लगाने महाकुंभ में आ रहे हैं।
इनमें विशेष चर्चा का विषय हैं दुनिया की सबसे धनी महिलाओं में शामिल लॉरेन पावेल जॉब्स… एप्पल के सह-संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पावेल आध्यात्मिकता की खोज में महाकुंभ के श्रीनिरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि के शिविर में लगभग 10 दिनों तक रुकेंगी।
मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा में अमृत स्नान
लॉरेन पावेल जॉब्स मकर संक्रांति के अवसर पर गंगा में अमृत स्नान करेंगी। यह स्नान महाकुंभ के मुख्य आकर्षणों में से एक हैं और इसे आध्यात्मिक शुद्धिकरण का प्रतीक माना जाता है। उनके इस कदम को वैश्विक स्तर पर सनातन संस्कृति और अध्यात्म के प्रचार-प्रसार का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
पावेल स्वामी कैलाशानंद के शिविर में योग, ध्यान, और आध्यात्मिक चर्चाओं में भाग लेंगी। आचार्य महामंडलेश्वर ने बताया कि लॉरेन भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म से काफी प्रभावित हैं और इस बार उन्होंने महाकुंभ के माध्यम से इसे करीब से अनुभव करने की इच्छा व्यक्त की है। लॉरेन का महाकुंभ में शामिल होना भारतीय संस्कृति और सनातन धर्म के प्रति उनकी गहरी रुचि को दर्शाता है। उनकी उपस्थिति महाकुंभ को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिला सकती है।
महाकुंभ विदेशियों के लिए भी अद्भुत अनुभव
महाकुंभ में विदेशियों का आकर्षण महाकुंभ का आयोजन न केवल भारतीय श्रद्धालुओं के लिए बल्कि विदेशियों के लिए भी अद्भुत अनुभव बनता जा रहा है। हर साल लाखों विदेशी महाकुंभ में आकर भारतीय परंपरा और संस्कृति से रूबरू होते हैं। लॉरेन पावेल जॉब्स जैसी शख्सियत का यहां आना, इस आयोजन की वैश्विक अपील को और मजबूत करेगा।
जॉब्स परिवार का अध्यात्म से पुराना नाता
स्टीव जॉब्स को बचपन से ही अध्यात्म में रुचि थी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बाबा नीम करौली में स्टीव की अगाध आस्था थी। वह उन्हें अपना गुरु मानते थे। वह 1970 के दशक में सात महीने के लिए आध्यात्मिक एकांतवास पर भारत आए और नैनीताल स्थित कैंची धाम भी गए।
परमहंस योगानंद की लिखित बी हीयर नाउ और ऑटोबायोग्राफी ऑफ़ ए योगी पढ़ने के बाद उनकी रुचि और भी अधिक बढ़ गई। भारत यात्रा ने उनका जीवन बदल दिया।
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