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    माता वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर लैंडस्लाइड: मुजफ्फरनगर में पसरा मातम... छह अर्थियां एक साथ उठीं तो फफक पड़े लोग

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 05:58 PM (IST)

    Muzzaffarnagar News मुजफ्फरनगर के रामपुरी में वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर हुए हादसे में जिले के छह लोगों की मौत हो गई जिनमें दो परिवारों की मां-बेटियां शामिल हैं। रविंद्र की पत्नी और बेटी व इंद्रपाल की पत्नी-बेटी की आपदा में जान चली गई। शनिवार को जब चारों की अर्थियां उठीं तो पूरे इलाके में मातम छा गया।

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    बेटियों की चीत्कार से पथराई आंखें भी रो पड़ीं, आमने-सामने घरों से उठी चार अर्थियां।

    संवाद सहयोगी, जागरण, मुजफ्फरनगर। वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर भूस्खलन आपदा में मरने वाले छह लोगों के शव शनिवार की सुबह मुहल्ला दक्षिणी रामपुरी पहुंचे तो चारों तरफ चीत्कार गूंजने लगी। हर गली, हर मकान के बाहर लोग जमा थे, सबकी आंखें नम थी। 

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    मुहल्ला दक्षिणी रामपुरी के 23 लोगों का जत्था गत 25 अगस्त को वैष्णो देवी यात्रा पर गया था। 26 अगस्त को आई आपदा में मुहल्ले के ही तीन परिवारों के छह लोगों की मौत हो गई। जिनमें सगे भाई नौ वर्षीय अनंत पुत्र अजय, छह वर्षीय दीपेश उर्फ डमरू पुत्र अजय, मां-बेटी 45 वर्षीय रामवीरी पत्नी इंद्रपाल, अंजली पुत्री इंद्रपाल व 45 वर्षीय मनतेश उर्फ ममता देवी पत्नी रविन्द्र और 16 वर्षीय आकांक्षा पुत्री रविन्द्र शामिल है। श्मशान घाट में दो मां और उनकी बेटियों का दाह संस्कार किया गया और दो मासूम भाइयों के शव दफनाए गए।

    वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर आई आपदा ने रामपुरी में ऐसा दर्द दे दिया, जिसे सुनकर हर किसी की रुह कांप उठी। इस हादसे में छह श्रद्धालु अपनी जान गंवा बैठे। जिनमें दो घर आमने-सामने वाले परिवारों की मां-बेटियां भी शामिल हैं। शनिवार को जब चारों महिलाओं की अर्थियां एक साथ उठीं, तो पूरा मुहल्ला मातम में डूब गया। बेटियों की चीत्कार से पथराई आंखें भी रो पड़ीं।

    रामपुरी में मुर्गी फार्म के पास गली में पहला घर रविंद्र का है। उसकी पत्नी मनतेश उर्फ ममता और सात बेटियां थीं। आपदा ने इस परिवार की खुशियां छीन लीं। ममता के साथ उनकी एक 16 वर्षीय बेटी आकांक्षा ने भी दम तोड़ दिया। अब घर में छह बेटियां नीशू, नेहा, सीमा, मधु, छाया और राधा रह गई हैं, जो बार-बार बिलखते हुए यही कह रही हैं कि पापा, आप तो कह रहे थे सब ठीक है, लेकिन मम्मी तो हमें छोड़कर चली गईं...वो वापस क्यों नहीं आईं। उनकी चीखें सुनकर हर कोई रो रहा था।

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    मां और बहन को खो देने के गम में राधा बार-बार बेहोश हो रही है। लोगों ने बताया कि शुक्रवार से अब तक वह कई बार बेहोश हो चुकी। उसकी हालत बेहद गंभीर है। शुक्रवार शाम उसे अस्पताल में भी ले जाना पड़ा था। वह मां व बहन के मौत के गम में इस कदर डूब गई कि अब उसकी आंखों से आंसू भी नहीं निकल पा रहे थे। हर कोई उसे संभालने में लगा था।

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    रविंद्र के घर के ठीक सामने ही इंद्रपाल का घर है। इस हादसे में उसकी पत्नी रामवीरी और बेटी अंजली की मौत हो गई। उनके घर में भी मातम पसरा है। दोनों घरों से एक साथ उठीं मां-बेटियों की चार अर्थियों का मंजर दिल दहला देने वाला था। गलियों में गूंजती चीख-पुकार और बेटियों का विलाप सुनकर हर कोई रो पड़ा। मुहल्ले के लोग बताते हैं कि एक साथ इतने शव कभी नहीं उठे। दोनों परिवारों पर टूटा दुखों का यह पहाड़ कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। हर घर में सन्नाटा है और हर आंख नम।