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    यूपी पंचायती राज विभाग में हड़कंप: 7,484 मुकदमों का बोझ, मुरादाबाद समेत कई जिले 'रेड जोन' में!

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 07:00 AM (IST)

    उत्तर प्रदेश पंचायती राज विभाग इलाहाबाद हाईकोर्ट में 7,484 मुकदमों के बोझ तले दबा है, जिनमें से 2,030 मामलों में काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं हुए हैं। म ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। पंचायती राज विभाग से जुड़े मुकदमों की स्थिति सूबे में लगातार गंभीर होती जा रही है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विभाग से संबंधित कुल 7,484 वाद लंबित हैं। चिंताजनक तथ्य यह है कि इनमें से 2,030 मामलों में अब तक प्रति शपथ (काउंटर एफिडेविट) दाखिल नहीं किया गया है।

    प्रधान हटाने, ग्राम पंचायत सचिवों के निलंबन, सेवा से जुड़े विवाद और प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने वाले ये मामले विभागीय लापरवाही की तस्वीर पेश कर रहे हैं। विभागीय स्तर पर कमजोर पैरवी और समय पर शपथ पत्र दाखिल न होने से कई मामलों में एकतरफा आदेश पारित होने का खतरा बढ़ गया है। इसका सीधा असर संबंधित अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही पर भी पड़ सकता है।

    हालात की गंभीरता सामने आने के बाद पंचायती राज विभाग के अफसरों में खलबली मची हुई है। संयुक्त निदेशक पंचायती राज जयदीप त्रिपाठी की ओर से 23 दिसंबर 2025 को जारी पत्र के अनुसार, पहले विभाग को यह आभास था कि लंबित वादों की संख्या में कमी आई है। लेकिन जैसे ही हाईकोर्ट की वेबसाइट अपडेट हुई, पेंडेंसी का आंकड़ा अचानक हजारों में पहुंच गया।

    प्रदेश के कई जिले 100 से अधिक मुकदमों के साथ रेड जोन में चिन्हित किए गए हैं। इनमें प्रयागराज (316), जौनपुर (277), आजमगढ़ (245), बस्ती-गाजीपुर मंडल (204), गोरखपुर (141), कुशीनगर (156), पीलीभीत (150), बरेली (118) और मुरादाबाद (135) शामिल हैं। स्थिति को संभालने के लिए पंचायती राज निदेशालय ने प्रदेश के सभी जिला पंचायत राज अधिकारियों (डीपीआरओ) और जिलाधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

    सभी डीपीआरओ को अपने-अपने जनपदों के लंबित वादों की समीक्षा कर समयबद्ध तरीके से काउंटर एफिडेविट दाखिल कराने, वाद सहायक के माध्यम से साक्ष्यों सहित सूचना निदेशालय को उपलब्ध कराने को कहा गया है। साथ ही मंडलीय उपनिदेशकों को भी कड़ी निगरानी के निर्देश दिए गए हैं।

    मुरादाबाद की स्थिति भी चिंताजनक

    मुरादाबाद जिले में पंचायती राज विभाग से जुड़े कुल 135 मुकदमे हाईकोर्ट में लंबित हैं। इनमें से 83 मामलों में काउंटर एफिडेविट दाखिल हो चुके हैं,जबकि 52 मामलों में अब तक प्रतिशपथ दाखिल नहीं किया गया है। यानी करीब 40 प्रतिशत मामलों में विभाग हाईकोर्ट में अपना पक्ष ही नहीं रख पाया है, जिससे विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    तैनाती के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे ग्राम विकास अधिकारी

    मुरादाबाद के मूंढापांडे ब्लाक से जुड़े दो मामलों ने विभाग की लापरवाही को उजागर कर दिया है। पहला मामला ग्राम विकास अधिकारी अजय कुमार बनाम जिला विकास अधिकारी गोविंद बल्लभ पाठक व अन्य से जुड़ा है। हाईकोर्ट ने 25 सितंबर 2025 को अजय कुमार को कार्यभार सौंपने का अंतरिम आदेश दिया था, लेकिन महीनों बाद भी आदेश का अनुपालन नहीं हुआ।

    न तो कार्यभार दिया गया और न ही अनुपालन शपथ पत्र दाखिल किया गया। अदालत ने इसे प्रथम दृष्टया अवमानना मानते हुए अधिकारियों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 13 मार्च 2026 को होगी। दूसरा मामला ग्राम पंचायत दौलतपुर अजमतपुर की प्रधान जायदा बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से संबंधित है, जिसमें राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई काउंटर एफिडेविट दाखिल नहीं किया गया।

    न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने राज्य सरकार को चार सप्ताह का अंतिम अवसर देते हुए स्पष्ट कर दिया है कि लापरवाही आगे भारी पड़ सकती है। स्पष्ट है कि यदि पंचायती राज विभाग ने समय रहते कानूनी मोर्चे पर खुद को मजबूत नहीं किया, तो न सिर्फ विभागीय फैसले उलट सकते हैं, बल्कि अधिकारियों को व्यक्तिगत तौर पर भी अदालत के कठघरे में खड़ा होना पड़ सकता है।

     

    हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों की समीक्षा करके अग्रिम कार्रवाई के निर्देश जारी किए गए हैं। जिलेवार इस संबंध में जिला पंचायत राज अधिकारियों से बात भी की जा रही है। लापरवाही जिस स्तर से होगी, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

    - अभय कुमार यादव, उप निदेशक, पंचायती राज विभाग, मुरादाबाद


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