अब अपराधियों की खैर नहीं! यक्ष एप बताएगा हिस्ट्रीशीटरों का कच्चा चिट्ठा, बीट व्यवस्था में हुआ बड़ा बदलाव
कानून-व्यवस्था मजबूत करने के लिए मुरादाबाद समेत सभी जिलों में बड़े बदलाव किए जा रहे हैं। ढाई साल से एक ही थाने में जमे पुलिसकर्मियों का तबादला होगा। म ...और पढ़ें

प्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। मंडल में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया जा रहा है। यक्ष एप लागू होने से पहले मंडल के सभी जिलों में एक ही थाने में ढाई साल या उससे अधिक समय से जमे हेड कांस्टेबल और कांस्टेबल को हटाया जाएगा। इसके लिए सभी जिलों में ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इसके बाद जल्द ही इनका स्थानांतरण दूसरे थानों में किया जाएगा। मुरादाबाद जिले में अब तक 980 बीट थी, लेकिन अब इन्हें बढ़ाकर 1080 कर दिया जाएगा। स्थानांतरण और बीट बढ़ने के बाद मंडल भर में यक्ष एप से काम किया जाएगा। डीआइजी मुनिराज जी के अनुसार, यक्ष एप लागू होने से पहले ऐसे पुलिसकर्मियों की सूची बनाई जा रही है, जो ढाई साल से एक ही थाने में जमे हुए हैं।
फिर उनका तबादला दूसरे थानों में किया जाएगा। जिले में करीब 100 बीट बढ़ाई जा रही है। बीट इंचार्ज की तैनाती दक्षता के अनुसार की जाएगी। इस एप के माध्यम से एक ही बीट में लंबे समय तक पुलिसकर्मियों को काम करने का मौका मिले, इसके लिए ढाई साल से एक ही थाने में जमे कांस्टेबल और हेड कांस्टेबलों की तैनाती में फेरबदल किया जाएगा।
नई बीट बनने से अपराधियों पर नजर रखना आसान होगा और पुलिस की पहुंच आम जनता तक और बेहतर होगी। बीट संख्या बढ़ने के साथ-साथ लगभग उतने ही अतिरिक्त पुलिसकर्मियों को थानों में तैनाती भी दी जाएगी। इससे थानों पर कार्यभार का संतुलन बनेगा और बीट प्रभारी अपने क्षेत्र में नियमित संपर्क और निगरानी कर सकेंगे।
इंस्पेक्टर और चौकी प्रभारी की तर्ज पर होगी तैनाती
बीट पर कांस्टेबल और हेड कांस्टेबल की तैनाती अब इंस्पेक्टर व चौकी प्रभारी की तर्ज पर की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत तैनाती से पहले सभी प्रस्तावित बीट प्रभारी को बुलाया जाएगा। संबंधित अधिकारी उनकी कार्यक्षमता, अनुभव और क्षेत्रीय जानकारी का आकलन करेंगे।
इसके बाद उनका साक्षात्कार लिया जाएगा, जिसमें कानून-व्यवस्था, जनसंपर्क और बीट प्रबंधन से जुड़े प्रश्न पूछे जाएंगे। इंटरव्यू में बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मियों को ही बीट की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
अपराधियों की जानकारी बीट कांस्टेबल को मिलेगी
यक्ष एप के माध्यम से पुलिस को अपराधियों की जानकारी मिल सकेगी। अगर, कोई अपराधी किसी दूसरे जनपद में अपराध करता है और वहां की पुलिस उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करती है तो उसकी जानकारी उस बीट प्रभारी को यक्ष एप से हो जाएगी, जिस बीट क्षेत्र का अपराधी निवासी है।
अपराधियों की पहचान बताएगा यक्ष एप
अगर कही कोई घटना होती है तो आरोपितों को पकड़ने में भी यक्ष एप मदद करेगा। अगर सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पुलिस ने घटना करने वाले अपराधियों की उम्र का पता लगा लिया, तो फिर यक्ष एप से पुलिस उस उम्र के अपराधियों के फोटो देख सकेगी। फोटो सामने आने के बाद पुलिस उनमें से आरोपित की पहचान कर लेगी।

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