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    प्रधान जी का 'पारिवारिक' विकास: देवर को बना दिया लाभार्थी, सरकारी धन की बंदरबांट का खुलासा!

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 09:27 PM (IST)

    मुरादाबाद की ग्राम पंचायत पहाड़मऊ में सरकारी धन के दुरुपयोग का खुलासा हुआ है। जिलाधिकारी द्वारा गठित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रध ...और पढ़ें

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    प्रतीकात्‍मक च‍ित्र

    जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। छजलैट विकास खंड की ग्राम पंचायत पहाड़मऊ में विकास कार्यों के नाम पर सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। जिलाधिकारी अनुज सिंह द्वारा गठित संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम प्रधान कविता रानी और ग्राम विकास अधिकारी संजीव कुमार को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।

    जांच में शौचालय निर्माण, कैटल शेड, नाला खुदाई और पंचायत भवन निर्माण से जुड़े कई मामलों में अनियमितताओं की पुष्टि हुई है। प्रधान व सचिव को मामले में नोटिस जारी किए गए हैं। जिला पंचायत राज अधिकारी आलोक शर्मा ने बताया कि शिकायतकर्ताओं ने शपथ पत्रों के साथ शिकायत की थी।

    गंभीर आरोप यह था कि प्रधान के देवर निपेन्द्र कुमार वर्तमान में नगर पालिका परिषद, नूरपुर (बिजनौर) के स्थायी निवासी हैं। वर्तमान में वह नगर पालिका परिषद के सभासद भी हैं, परन्तु प्रधान व उसके पति ने कूटरचित अभिलेख तैयार करके निपेन्द्र कुमार के नाम पर शौचालय निर्माण कैटल शेड का निर्माण करके सरकारी धन का गबन किया गया है। इसके अलावा और भी कई गंभीर आरोप हैं।

    मामले की जांच जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी मुरादाबाद और ग्रामीण अभियंत्रण विभाग के सहायक अभियंता को जांच सौंपी गई। संयुक्त जांच आख्या में कई गंभीर आरोप सही पाए गए। जांच में यह पुष्टि हुई कि ग्राम प्रधान पति के सगे भाई निपेन्द्र कुमार, जो वर्तमान में नूरपुर नगर पालिका( बिजनौर) के सभासद हैं। मनरेगा से उनके नाम पर शौचालय और कैटल शेड निर्माण दर्शाकर सरकारी धन निकाला गया।

    स्थलीय निरीक्षण में कैटल शेड ग्राम प्रधान के आवास के पास पाया गया और उसमें मौजूद पशु उनके निजी बताए गए। इससे स्पष्ट हुआ कि योजना का लाभ अपात्र व्यक्ति को दिया गया। शिकायत के अनुसार एक ही नाले की खुदाई को अलग-अलग वर्षों में तीन बार दर्शाकर भुगतान निकाला गया।

    जांच टीम ने मौके पर निरीक्षण किया, जहां कार्य अत्यंत घटिया गुणवत्ता का पाया गया हालांकि कार्य पुराने होने के कारण पूर्ण भौतिक सत्यापन संभव नहीं बताया गया, लेकिन शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि जांच रिपोर्ट में हो गई। पंचायत भवन निर्माण के नाम पर सरकारी खाते से ग्राम प्रधान के निजी खाते और अन्य व्यक्तियों के खातों में धनराशि ट्रांसफर किए जाने के आरोप भी जांच में सामने आए।

    जांच में माना गया कि धन पंचायत भवन निर्माण में खर्च हुआ, लेकिन प्रक्रिया नियमों के विपरीत पाई गई। इस बिंदु पर आंशिक रूप से आरोप सही पाए गए हैं। जिला मजिस्ट्रेट अनुज सिंह के आदेश पर ग्राम प्रधान को नोटिस जारी किया गया है। साथ ही चेतावनी दी है कि एक सप्ताह के भीतर अभिलेखीय साक्ष्यों सहित जवाब प्रस्तुत करें। संतोषजनक जवाब न मिलने की स्थिति में उत्तर प्रदेश पंचायती राज अधिनियम की धारा 95(1)(छ) के तहत कार्रवाई, वित्तीय वसूली और विभागीय दंड की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

    स्वच्छ भारत मिशन में फर्जीवाड़ा

    जांच का सबसे गंभीर पहलू स्वच्छ भारत मिशन से जुड़ा है। कई लाभार्थियों के नाम पर शौचालय निर्माण दिखाया गया, लेकिन स्थलीय निरीक्षण में शौचालय मौजूद नहीं मिले। कुछ मामलों में एक ही परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम पर तीन-तीन शौचालय दर्शाए गए, जबकि मौके पर केवल एक पुराना शौचालय मिला।

    एक लाभार्थी ने स्वीकार किया कि शौचालय निर्माण की धनराशि बीमारी में खर्च कर दी गई। इन तथ्यों के आधार पर जांच टीम ने गबन के आरोपों की पुष्टि की है। घपला सामने आने के बाद गांव में आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ी तो कई और नाम सामने आ सकते हैं। अब सबकी निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

     

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