मुरादाबाद में पति के टुकड़े करने वाली रूबी प्रेमी के लिए तड़प रही, अधिकारियों से बोली- एक बार मिला दो
चंदौसी में पति राहुल की हत्या के आरोप में जेल पहुंची रूबी अपने प्रेमी गौरव से मिलने को तड़प रही है। वह अब आम कैदियों की तरह व्यवहार कर रही है। वहीं, ग ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। प्रेमी संग पति की हत्या करने के बाद जेल पहुंची चंदौसी की रूबी प्रेमी से मिलने के लिए तड़प रही है। एक दो दिन परेशान रहने के बाद अब वह आम बंदियों की तरह जेल में समय बिता रही है। बार-बार प्रेमी से मिलाने के लिए कह रही है।
अभी तक उसकी मुलाकात करने के लिए भी कोई नहीं पहुंचा है। वहीं महिला का प्रेमी गौरव अब किसी भी तरह जमानत के बाद जेल से बाहर आना चाहता है। वह साथी बंदियों से सिर्फ इतना ही कह रहा है कि मुझसे बहुत बड़ा गुनाह हो गया, अब मेरी जमानत कैसे होगी।
ये है पूरा मामला
संभल के चंदौसी क्षेत्र 15 दिसंबर को नगर से सटे पत्रुआ गांव के नाले में एक क्षत-विक्षत और सड़ी-गली हालत में शव बरामद हुआ था। जिसमें सिर और हाथ-पैर नहीं थे। दो दिन बाद शव के कटे हुए एक हाथ पर राहुल नाम गुदा मिला था, जिसके आधार पर शिनाख्त की दिशा में जांच आगे बढ़ी।
इसी दौरान पता चला कि करीब एक माह पहले चुन्नी मुहल्ला निवासी रूबी ने अपने पति राहुल की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि रूबी के मुहल्ले के ही गौरव से अवैध संबंध थे, जिसका राहुल लगातार विरोध कर रहा था।

18 नवंबर को राहुल ने रूबी और गौरव को आपत्तिजनक स्थिति में देख लिया था। उस समय राहुल ने गौरव व रूबी के साथ मारपीट करते हुए मुहल्ले में बदनाम और नग्नावस्था में घुमाने की धमकी दी थी, तभी रूबी व प्रेमी गौरव ने राहुल पर हमला कर दिया था और फिर हत्या की साजिश रची।
हत्या के बाद शव के टुकड़े करने के लिए गौरव ने 19 नवंबर को ग्लाइंडर खरीदा। रूबी बाजार से पॉलीथिन का बैग खरीदकर लाई। सिर और हाथ-पैरों को बैग में भरकर गंगा में फेंक दिया गया, जबकि धड़ को पत्रुआ गांव के नाले में फेंक दिया गया, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया था, लेकिन सिर व हाथ पैर गंगा में बह गए थे।
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22 दिसंबर को गिरफ्तार हुई रूबी और उसका प्रेमी
पुलिस ने मृतक की पत्नी रूबी और उसके प्रेमी गौरव को 22 दिसंबर में गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। जेल में पहले दिन आकर रूबी ने किसी से बात नहीं की थी। रात भर उसने बैठकर गुजारी। उसके बाद उसने सुबह से में भी खाना नहीं खाया था, लेकिन शाम को खाना खा लिया।
एक दो दिन गुमसुम रहने के बाद वह आम बंदियों की रहने लगी। अब वह सभी महिलाओं बंदियों से बात कर रही है। बल्कि हंसी ठिठौली भी कर रही है। कोई भी जेल अधिकारी दिखता है तो प्रेमी से मिलाने की बात कहती है।
अब उसे बिल्कुल अहसास नहीं है कि वह अपने पति की हत्या करने के बाद जेल में बंद है। उधर इसका प्रेमी गौरव जैसे ही पहले दिन जेल में पहुंचा तो जेल गेट पर ही एक जेल अधिकारी से बोला- साहब क्या कभी मेरी जमानत हो जाएगी।
अब वह रोज साथी बंदियों से सिर्फ एक ही बात कह रहा है कि मैंने गलत कर दिया। किसी तरह मेरी जमानत हो जाए तो कभी दोबारा ऐसा नहीं करुंगा। जेल अधिकारी बताते है कि वह साथियों बंदियों से बात भी बहुत कम करता है।
बंदी रूबी भी आम बंदियों की तरह रह रही है। सभी से बह बात कर रही है तो अन्य बंदियों की तरह खाना खा रही है।
आलोक कुमार सिंह, जेल अधीक्षक

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