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    कभी बाढ़ तो कभी आक्रमण, हस्तिनापुर के कई बार उजड़ने और बसने के मिले प्रमाण

    By Prem Dutt BhattEdited By:
    Updated: Sat, 19 Feb 2022 09:00 AM (IST)

    Hastinapur News मेरठ के पास हस्तिनापुर में उत्‍खनन का काम जारी है। इस दौरान मिट्टी बालू काली मिट्टी की परतें एक दूसरे के बाद कई बार मिलीं। बालू का संकेत बाढ़ से नष्ट होना और काली मिट्टी का संकेत फिर से बसावट। अभी कई और नई बातों का चलेगा।

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    Hastinapur News पांडव टीले पर खोदे गए गड्ढे में साफ दिखाई देती मिट्टी की परतें।

    मेरठ, जागरण संवाददाता। पुरातत्व विभाग के शुरुआती उत्खनन में ही यह प्रमाण सामने आने लगे हैं कि हस्तिनापुर कई बार नष्ट हुआ और कई बार बसाया गया। यह उस धरती के पूरे रहस्य की तरफ बढ़ती जा रही है जो यहां के जीवटता का प्रमाण देगी। यहां दो टीम उत्खनन कर रही है। एक टीम जो मिट्टी की विभिन्न परतों के उत्खनन व अध्ययन के लिए जुटी है उसे कई तथ्य हाथ लगे हैं। पांडव टीले के मुख्य द्वार के पास एक गड्ढा खोदा जा रहा है। इसमें चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इस गड्ढे को लगभग पंद्रह फीट तक खोदा गया है। जिसमें परत दर परत नए तथ्य सामने आ रहे हैं। पहले सामान्य मिट्टी सामने थी, जिसे हटाया गया तो बालू सामने आया। इसके बाद काली मिट्टी सामने आई।

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    ये तथ्‍य आए सामने

    काली मिट्टी को हटाने के बाद पुन: बालू सामने आया। बालू (रेत) को हटाने के बाद फिर से काली मिट्टी आयी। इन परतों की मोटाई लगभग दो फीट तक है। इस टीम के अनुसार मिट्टी की विभिन्न परतों से एक बात तो यह सामने आएगी कि यह क्षेत्र कितने कालों से होकर गुजरा है और दूसरी बात यह सामने आएगी कि यह क्षेत्र कितनी बात नष्ट हुआ है या कितनी बार नष्ट करने का प्रयास किया गया है। बालू का होना भारी बाढ़ का संकेत है, जबकि काली मिट्टी का होना इसे पुन: बसाने का प्रयास हो सकता है। शौर्य और धर्म की नगरी हस्तिनापुर न जाने कितनी बार नष्ट हुई। कभी गंगा नदी की भयंकर बाढ़ से तो कभी मुगलों के आक्रमण से। इसके प्रमाण भी पांडव टीले की खोदाई में सामने आने लगे हैं। मुख्य ट्रेंच पर खोदाई से अलग टीम पांडव टीले पर मिट्टी की परतें जानने के लिए अलग से कार्य कर रही है।

    प्राचीनता की सत्यता पता करने को उत्खनन कर रहीं दो टीमें

    पुरातत्व विभाग की दो टीमें हस्तिनापुर में उत्खनन में जुटी हैं। एक टीम पांडव टीले पर उत्खनन कर रही है। इस टीम ने अमृत कूप के पास मुख्य ट्रेंच बनाया है। यह टीम उत्खनन कर प्राचीन अवशेषों, सभ्यताओं को उजागर करने का प्रयास कर रही हैं। दूसरी टीम पांडव टीले की परतों के अध्ययन में जुटी है। यह टीम यह जानने का प्रयास कर रही है कि पांडव टीले पर मिट्टी की कितने परतें हैं। ये परतें बसावट के नष्ट होने व फिर से बसावट के प्रमाण के साथ नए तथ्यों की तरफ ले जाएंगे।

    बालू, मिट्टी की परतें व मृदभांड मिले

    मुख्य ट्रेंच पर हो रहे उत्खनन में कुछ प्राचीन मृदभांड निकले हैं। जिन्हें सुरक्षित कर लिया गया है। दूसरी टीम के उत्खनन में गड्ढे से मिट्टी व बालू की परतें मिली हैं। इन सबका अलग-अलग सैंपल अधिकारियों द्वारा सुरक्षित कर लिया गया है। जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। जिसमें बालू रेत व मिट्टी की कार्बन डेंटिंग की जाएगी।

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