ये कैसे प्रिंसिपल हैं... कोर्ट में कविता तक नहीं सुना पाए प्रधानाचार्य, तो जज ने तुरंत कर दी कार्रवाई
हितकारी किसान इंटर कॉलेज सकौती टांडा की प्रबंध समिति के उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चल रहे एक मामले में कार्यवाहक प्रधानाचार्य और प्रबंधक को तलब किया। इस दौरान न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने प्रधानाचार्य से पहले कविता सुनाने के लिए कहा। वह कविता नहीं सुना पाए। इसके बाद उन्होंने हिंदी दिवस की तिथि पूछी तो वह भी नहीं बता पाए।

जागरण संवाददाता, मेरठ। हितकारी किसान इंटर कॉलेज सकौती टांडा की प्रबंध समिति के उच्च न्यायालय इलाहाबाद में चल रहे एक मामले में कार्यवाहक प्रधानाचार्य और प्रबंधक को तलब किया। इस दौरान न्यायमूर्ति सौरभ श्याम शमशेरी ने प्रधानाचार्य से पहले कविता सुनाने के लिए कहा। वह कविता नहीं सुना पाए।
इसके बाद उन्होंने हिंदी दिवस की तिथि पूछी तो वह भी नहीं बता पाए। अदालत ने उनकी योग्यता पर ही सवाल उठा दिए। अदालत में झूठा शपथ पत्र देने पर दोनों पर 10-10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगा दिया गया।
ड्यूटी नहीं करने के आरोप में कर दिया गया था सस्पेंड
आपको बता दें कि हितकारी किसान इंटर कॉलेज के प्रवक्ता संजय कुमार और नवीन कुमार को जिला विद्यालय निरीक्षक ने कांवड़ की ड्यूटी नहीं करने के आरोप में सस्पेंड कर दिया था। संजय कुमार और नवीन वर्मा ने विद्यालय की प्रबंध समिति और जिला विद्यालय निरीक्षक को अपना जवाब दाखिल कर दिया था।
प्रधानाचार्य और प्रबंधक ने हाई कोर्ट में दिया था शपथपत्र
इसके बाद दोनों को जिला विद्यालय निरीक्षक ने बहाल कर दिया था। जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेश के खिलाफ स्कूल के कार्यवाहक प्रधानाचार्य अनिल कुमार त्रिपाठी और प्रबंधक राजकुमार हाई कोर्ट चले गए थे और याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट में प्रधानाचार्य और प्रबंधक ने शपथपत्र दिया था।
झूठा पाया गया शपथ पत्र
इस पर उन्होंने दावा किया था कि उन्होंने शपथ पत्र पर प्रयागराज पहुंचकर हस्ताक्षर किए हैं, लेकिन यह शपथ पत्र झूठा पाया गया है। जिस दिन उच्च न्यायालय में शपथ पत्र दाखिल हुआ, उस दिन प्रधानाचार्य और प्रबंधक प्रयागराज गए ही नहीं। इसी आरोप में उच्च न्यायालय ने दोनों को तलब किया।
हिंदी दिवस की तारीख नहीं बता पाए प्रधानाचार्य
मंगलवार को कार्यवाहक प्रधानाचार्य अदालत में तलब हुए तो न्यायमूर्ति ने उनसे पहले कोई भी एक कविता सुनाने के लिए कहा, फिर हिंदी दिवस की तिथि पूछी। इसके बाद अदालत ने प्रधानाचार्य की योग्यता पर सवाल खड़े किए। हालांकि प्रधानाचार्य ने कोर्ट में माफी मांगी। उसके बाद उन्हें जाने दिया गया।
सात दिन के अंदर जुर्माना भरने के आदेश
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने जुर्माना लगाते हुए ये आदेश दिया है कि सात दिन के अंदर 10 हजार रुपये जमा कराए जाएं। यदि जुर्माना समय पर जमा नहीं किया जाता है तो प्रबंध समिति के ओथ कमिश्नर को आगे की कार्रवाई करने ने निर्देश दिए गए हैं।
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