बिजनौर, जागरण संवाददाता। धामपुर विधानसभा सीट पिछले एक सप्ताह से राजनीति का अखाड़ा बनी हुई है। यहां से तीन बार के विधायक और सपा सरकार में राज्यमंत्री रहे मूलचंद चौहान का टिकट कटने के बाद से ही सरगर्मियां तेज हो गई थी। आखिरकार बुधवार रात मूलचंद चौहान सपा की साइकिल से उतर कर हाथी पर सवार हो गए। अब इस सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने की संभावना है। 

धामपुर से तीन बार विधायक रह चुके हैं मूलचंद चौहान 

धामपुर विधानसभा सीट से 21 जनवरी को समाजवादी पार्टी ने धामपुर के तीन बार के विधायक और राज्यमंत्री रहे ठाकुर मूलचंद चौहान का टिकट काट कर स्योहारा निवासी व नूरपुर विधायक नईमुल हसन को टिकट दे दिया था। जिस पर उनका विरोध शुरू हो गया था। तभी से मूलचंद चौहान लखनऊ में डटे हुए थे और सपा से टिकट लाने की जुगत लगा रहे थे। लेकिन सपा टिकट ना होने पर बसपा के संपर्क में आए। उनके टिकट होने की खबर फैलते ही 26 जनवरी को धामपुर में बसपा सांसद गिरीश चंद के आवास पर बसपा प्रत्याशी हाजी कमाल के समर्थकों ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश प्रभारी शमसुद्दीन राइन के खिलाफ प्रदर्शन व हंगामा कर दिया था। लेकिन रात में मूलचंद चौहान को बसपा सांसद गिरीश चंद ने सिंबल देने पर बसपा प्रत्याशी के रूप में स्थिति स्पष्ट हो गई। 

20 साल से दो ठाकुरों के बीच है मुकाबला  

विधानसभा धामपुर में पिछले 20 सालों से दो ठाकुरों के बीच चुनावी जंग चल रही है। भाजपा के अशोक कुमार राणा और सपा के पूर्व मंत्री रहे मूलचंद चौहान में कांटे की टक्कर रहती है। 2002 से अभी तक प्रत्येक पांच साल में दोनों एक-एक बार विधायक बनते आ रहे हैं। हालांकि अशोक राणा रालोद से लेकर बसपा तक में दल बदलकर चुनाव लड़ चुके हैं। लेकिन मूलचंद पिछले 26 सालों से सपा के सिपाही के रूप में कार्य करते रहे थे। बिजनौर जिले में धामपुर को सपा का सबसे सुरक्षित गढ़ माना जाता था और मूलचंद चौहान सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के समय से ही अच्छी पकड़ रखते थे।। लेकिन इस बार उनका टिकट काट कर नईमुल हसन को उतार दिया गया।

वर्ष 2002 में पहली बार जीते थे मूलचंद चौहान

वर्ष 2002 में सपा से मूलचंद चौहान विजयी रहे थे, उन्हें राज्यमंत्री बनाया गया। अशोक कुमार राणा रालोद से हार गए थे। लेकिन अगले चुनाव 2007 में अशोक कुमार राणा ने बसपा के टिकट पर मूलचंद चौहान को हराया। इसके बाद 2012 में फिर एक बार सपा के मूलचंद चौहान ने अशोक राणा के सामने जीत दर्ज की। पिछले तीन चुनाव का सिलसिला आगे जारी रखते हुए 2017 में अशोक राणा ने भाजपा के टिकट पर फिर से जीत दर्ज की और मूलचंद चौहान को शिकस्त दी। हालांकि यह दोनों ही तीन-तीन बार विधायक रह चुके हैं। लेकिन 20 साल में लगातार दो बार कोई नहीं जीता है। 2002 से पहले 1996 के चुनाव में मूलचंद जीते थे। वहीं अशोक कुमार राणा 1989 में स्योहारा विधानसभा सीट से 28 वर्ष की आयु में जीत दर्ज कर चुके हैं।


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Edited By: Parveen Vashishta