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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 20, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

हस्तिनापुर में उत्‍खनन लगातार चौंका रहा, पढ़िए अब क्‍या-क्‍या मिला इस धरती पर

By Prem Dutt BhattEdited By:
Published: Sun, 20 Feb 2022 07:44 AM (IST)Updated: Sun, 20 Feb 2022 10:12 AM (IST)

Excavation at Hastinapur हस्तिनापुर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मेरठ मंडल की टीम निरंतर उत्‍खनन कर रही है। शनिवार को यहां ...और पढ़ें

Hastinapur News हस्तिनापुर में उत्‍खनन के दौरान मौर्य काल व मध्य काल के अवशेष प्राप्‍त हुए।
Hastinapur News हस्तिनापुर में उत्‍खनन के दौरान मौर्य काल व मध्य काल के अवशेष प्राप्‍त हुए।

मेरठ, जागरण संवाददाता। मेरठ के हस्तिनापुर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण मेरठ मंडल की टीम द्वारा पांडव टीला पर जारी उत्खनन में शनिवार को धूसर मृदभांड, हड्डियां, राख व कोयले मिले हैं। चौड़ी दीवारों के साथ-साथ कई स्थानों पर मिट्टी-रेत की परत भी मिली हैं। गहराई बढऩे के साथ मिट्टी का रंग बदला हुआ मिल रहा है। अनाज जैसी दिखने वाली वस्तु भी मिली है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि राख किस प्रकार के अनाज की है। एक अन्य ट्रेंच पर सफाई करके पुरानी दीवार निकालने का प्रयास किया जा रहा है।

मिट्टी की परत का रंग बदलता

पांडव टीला पर सर्वाधिक ऊंचाई वाले स्थान पर ट्रेंच लगाकर उत्खनन किया जा रहा है। अभी तक यहां मौर्य काल व मध्य काल के अवशेष प्राप्त हुए हैं। शनिवार को उत्खनन के दौरान थोड़ी-थोड़ी गहराई पर मिट्टी की परत का रंग बदलता दिखा। इससे प्रतीत होता है कि यह क्षेत्र कई बार बाढ़ की विभीषिका से गुजरा है। कई स्थानों पर स्पष्ट चौड़ी दीवारें निकली हैं। एक स्थान पर खोदाई के दौरान रेत भी मिला है। एएसआइ को विश्वास है कि उत्खनन में कुछ ऐसे अवशेष जरूर मिलेंगे, जो हस्तिनापुर की प्राचीनता को प्रमाणित करेंगे। कई स्थानों पर विभिन्न प्रकार के मृदभांड, टूटे मटके, हड्डियां, कोयला आदि मिले हैं। इन वस्तुओं के साथ-साथ मिट्टी के सैंपल भी संरक्षित किए जा रहे हैं। जांच के बाद ही मिट्टी व अवशेषों की प्राचीनता का पता चलेगा।

दो किमी क्षेत्र में फैला है पांडव टीला

एएसआइ के मुताबिक, पांडव टीला का क्षेत्र दो किमी से भी अधिक हो सकता है। कौरवान क्षेत्र में स्थित बाराखंभा नामक स्थान है। जनश्रुति के अनुसार, यहां कौरव-पांडवों के बीच द्यूत क्रीड़ा हुई थी। यह स्थान भी पांडव टीला क्षेत्र में है। दक्षिण की ओर विदुर आश्रम तक पांडव टीला का क्षेत्र फैला है।

बारीकी से होती है खोदाई

संरक्षित स्थान पर टीम बहुत बारीकी से उत्खनन करती है। विशेष औजारों से थोड़ी-थोड़ी मिट्टी हटाई जाती है। इसे एकत्र कर बारीक छलनी में छाना जाता है। कोई ठोस वस्तु मिलती है तो उसे ब्रुश आदि से साफ किया जाता है, ताकि अवशेषों को कोई क्षति न पहुंचे।

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