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    साइबर ठगों पर नकेल लगाने के लिए मथुरा की नई पहल, 21 थानों में टेक्नोलाजी एक्सपर्ट उप निरीक्षक तैनात

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 03:46 PM (IST)

    मथुरा में ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने के लिए 21 थानों में बीटेक डिग्रीधारी उप निरीक्षकों को तैनात किया गया है। ये विशेषज्ञ साइबर अपराध, कॉल डिटेल विश्लेषण औ ...और पढ़ें

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    सांकेतिक तस्वीर।

    जागरण संवाददाता, मथुरा। ऑनलाइन फ्राड, डिजिटल ठगी और बैंकिंग अपराधों पर रोक लगाने के लिए नई पहल की गई है। इसके चलते सभी 21 थानों पर एक-एक ऐसे उप निरीक्षक की तैनाती कर दी है, जो बीटेक डिग्रीधारी हैं। साथ ही आनलाइन टेक्नोलाजी, साइबर क्राइम, कॉल डिटेल एनालिसिस और डिजिटल ट्रैकिंग में विशेषज्ञ हैं। किसी भी साइबर ठगी होने पर टेक्नोलाजी एक्सपर्ट उप निरीक्षक कार्रवाई करते हुए मोबाइल नंबर को बंद कराएंगे और संबंधित बैंक से रुपये भी होल्ड कराएंगे।

    बीटेक डिग्रीधारी के साथ कॉल डिटेल एनालिसिस व डिजिटल ट्रैकिंग में माहिर

    मथुरा जिले के कुछ गांव देश भर में लोगों से ठगी की वारदातें करके कान्हा की धार्मिक नगरी को बदनाम कर रहे थे। यहां से सक्रिय साइबर ठग गिरोह बैंक अधिकारी, केवाईसी अपडेट, लाटरी, फर्जी निवेश और सरकारी योजना के नाम पर लोगों को निशाना बनाते थे। रोजाना दर्जनों कॉल के जरिए लोगों की मेहनत की कमाई मिनटों में साफ कर दी जाती थी। पुलिस ने 11 दिसंबर को गोवर्धन के गांव देवसेरस, मुड़सेरस, मड़़ौरा और नगला अकातिया को एक साथ घेरकर बड़ी कार्रवाई की। इसके बाद देवसेरस में अस्थाई चौकी खोली गई।

    पीड़ितों को थाने से मिलेगी मदद, वारदात के बाद बैंकों से कराएंगे रुपये होल्ड

    ठगों पर एक बार फिर बड़ा प्रहार करते हुए एसएसपी ने जिले के 21 थानों में टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट उप निरीक्षक किए हैं, जो बीटेक डिग्रीधारी के साथ ऑनलाइन टेक्नोलॉजी, साइबर क्राइम, कॉल डिटेल एनालिसिस और डिजिटल ट्रैकिंग में विशेषज्ञ हैं। ये उप निरीक्षक केवल कागजी विवेचना नहीं करेंगे, बल्कि ठगी होते ही डिजिटल मोर्चे पर सक्रिय होंगे।

    एसएसपी श्लोक कुमार ने बताया कि साइबर ठग अब पुलिस की पकड़ से बाहर नहीं रहेंगे। उनकी डिजिटल पहचान, कॉल नेटवर्क, बैंक अकाउंट, आपी एड्रेस और लेनदेन की पूरी चेन को खंगाला जाएगा। जरूरत पड़ी तो अंतर जनपदीय और अंतरराज्यीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई की जाएगी।

    इस तरह से टेक्नोलॉजी एक्सपर्ट करेंगे काम

    किसी पीड़ित से साइबर ठगी की सूचना मिलते ही संबंधित उप निरीक्षक तुरंत कॉल डिटेल रिकॉर्ड खंगालेंगे। संदिग्ध नंबरों को ट्रेस करेंगे और बिना समय गंवाए बैंक से संपर्क कर पीड़ित के खाते से निकाले गए पैसों को होल्ड कराने की प्रक्रिया शुरू कर देंगे। इससे पहले जहां ठग रकम उड़ाकर फरार हो जाते थे, अब वहीं उनके खाते फ्रीज होंगे और नेटवर्क बेनकाब होगा।

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    गोवर्धन मॉडल अब पूरे जिले में लागू

    गोवर्धन थाना क्षेत्र में साइबर ठगों के गांवों पर की गई कार्रवाई के बाद ठगी की कॉल में भारी गिरावट दर्ज की गई है। जहां पहले प्रतिदिन 50 कॉल की जा रही थीं। दबिश के बाद इनकी संख्या आठ पहुंच गई। इसके बाद पुलिस ने दो ठगों को मुठभेड़ में गिरफ्तार किया। मुठभेड़ के बाद काल की संख्या शून्य हो गई है। एसएसपी गोवर्धन मॉडल को अब पूरे जिले में लागू करने की तैयारी में हैं।


    साइबर ठगी के मामलों में समय सबसे बड़ा हथियार है। जितनी जल्दी कार्रवाई, उतनी ज्यादा रकम सुरक्षित। इसी रणनीति के तहत थानों को टेक्नोलॉजी से लैस किया जा रहा है। पीड़ित को साइबर सेल या जिले के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। बल्कि थाने से ही तुरंत डिजिटल कार्रवाई संभव होगी। -श्लोक कुमार, एसएसपी