फर्जी रायल्टी से करोड़ों का खेल, डेढ़ साल से खनिज व जीएसटी विभाग को लगाया 50 करोड़ का चूना
महोबा में खनिज और जीएसटी विभाग को चूना लगाने वाले गिरोह का राजफाश हुआ है। गिरोह ने 50 करोड़ रुपये का चूना लगाया है। करीब डेढ़ साल से गिरोह दोनों विभागों को नुकसान पहुंचा रहा था। गिरोह के सरगना ने एआइ के जरिए फर्जी रायल्टी बनाने का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद फर्जी वेबसाइट और कर्मचारियों को मिलाकर राजस्व का नुकसान पहुंचाया।

संवाद सूत्र, जागरण, कबरई (महोबा)। महोबा में एआइ के जरिए फर्जी रायल्टी से करोड़ों के खेल का राजफाश हुआ है। डेढ़ साल से मास्टर माइंड विजय सैनी खनिज और जीएसटी विभाग को चूना लगा रहा था। अब तीन लोग पकड़े गए तो इसका राजफाश हुआ। अभी छह आरोपित फरार हैं।
फर्जी रायल्टी का खेल सालों से चल रहा है लेकिन इस बार नई तकनीक का प्रयोग किया गया। एआइ से भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग की फर्जी वेबसाइट बनाकर खनिज परिवहन प्रपत्र बनाने वाले गिरोह के कुछ लोग तो पकड़ लिए गए पर इसके कई असल किरदार अब भी पर्दे के पीछे है। हालांकि पुलिस की जांच चल रही है और आगे कई और नाम भी सामने आ सकते है। करीब डेढ़ साल से जालसाज यह काम कर रहे थे। इतने समय में खनिज व जीएसटी विभाग को 50 करोड़ से अधिक की क्षति पहुंचाई। इससे राजस्व को भी नुकसान हुआ।
प्रदेश के खनिकर्म विभाग ने पहाड़ों से खनन के बाद निकला बोल्डर पत्थर एमएम-11 प्रपत्र, स्टोन क्रसिंग के बाद उत्पादित ग्रिट व डस्ट प्रपत्र-सी के माध्यम से ही परिवहन की जा सकती है। विभाग से प्रत्येक पहाड़ पट्टा धारक एवं भंडारण लाइसेंस धारक (क्रशर प्लांट) को एमएम-11 प्रपत्र और प्रपत्र-सी छापने के लिए एक विशेष प्रकार का छपा हुआ पेपर उपलब्ध कराया जाता है। जिस पर उसी खनन पट्टे का एमएम-11 या भंडारण लाइसेंस का प्रपत्र-सी प्रिंट किया जा सकता है।
जिले में सक्रिय फर्जी रायल्टी गिरोह ने खनन पट्टा और क्रशर के कर्मचारियों को लालच देकर इन्हीं विशेष पेपर को चोरी करवाकर उन पर फर्जी वेबसाइट का मोनोग्राम छापकर रायल्टी का अवैध कारोबार चलाया। इस फर्जी रायल्टी के मोनोग्राम को स्कैन करने पर जालसाजों की बनाई गई नकली खनिकर्म विभाग की वेबसाइट खुलती है जबकि वास्तविक रायल्टी के मोनोग्राम से खनिकर्म विभाग की वेबसाइट प्रदर्शित होती है। जिससे लोग इसे चेक नहीं कर पाते है और करीब डेढ़ से उनका यह खेल चल रहा था।
सीएम से जांच की मांग करेगी क्रशर यूनियन
खनन एवं क्रशर यूनियन अध्यक्ष बालकिशोर द्विवेदी की मानें तो जिले में पिछले डेढ़ साल से चल रहे फर्जी रॉयल्टी के अवैध कारोबार में विभागीय लोगो के साथ ही जिले के प्रभावशाली लोगों के संलिप्त होने की पूर्ण संभावना है। सालों से यह फर्जी रायल्टी का खेल चला आ रहा है बस अब इसे करने की तकनीकी बदली है। यूनियन जल्द ही लखनऊ में खनिकर्म सचिव एवं मुख्यमंत्री से मिलकर इस अवैध कारोबार की गहन जांच कराने की मांग करेगी। जिससे वास्तविकता सामने आ सके और इससे जुड़े अन्य किरदारों के चेहरे भी बेनकाब हो सकें।
अब तक हो चुका करोड़ों का नुकसान
एक फर्जी रायल्टी (परिवहन प्रपत्र) जनरेट होने से जहां खनिकर्म विभाग को 3000 से 4000 रुपये की क्षति होती है तो वहीं जीएसटी विभाग को 2000 रुपये प्रति प्रपत्र का नुकसान होता है। डेढ़ वर्ष से सक्रिय गिरोह ने शासन को करीब 50 करोड़ से अधिक की क्षति पहुंचाई है। इसके चलते कारोबारियों को भी जांच के दायरे में आना पड़ रहा है। कारोबारियों का कहना है कि इसकी उच्चस्तरीय जांच हो जाए तो वास्तविकता सामने आ जाएगी।
डेढ़ साल से चलता रहा खेल और विभाग को भनक भी नहीं
फर्जी रायल्टी का खेल जिले में करीब डेढ़ साल से चलता रहा। खनिज विभाग की फर्जी वेबसाइट भी तैयार कर ली गई। लेकिन ताज्जुब है कि खनिज विभाग को इसकी भनक तक नहीं लग सकी। कुछ कारोबारियों ने बताया कि बिना किसी विभागीय कर्मी के यह संभव नहीं हो सकता है। मामला संज्ञान में आने पर 21 अगस्त को खनिज विभाग ने फर्जी वेबसाइट का मुकदमा शहर कोतवाली में दर्ज कराया और इसके बाद खनन कारोबारी रामकिशोर सिंह ने कबरई में मुकदमा दर्ज कराया। जांच में फर्जीवाड़ा सामने आया। लेकिन इस पूरे खेल में किसी विभागीय कर्मी की संलिप्तता होने से इंकार भी नहीं किया जा सकता।
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