लखनऊ (जेएनएन)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता की कमान संभालने के बाद से ही सफाई पर उनका अभियान शुरू हो गया था। इसके तहत स्वच्छ भारत सर्वेक्षण भी कराया गया। इसमें मध्य प्रदेश ने बाजी मार ली जबकि इस सर्वेक्षण के आधार पर उत्तर प्रदेश की हालत बेहद चिंताजनक हैं।

केंद्र सरकार इससे पहले दो सर्वेक्षण करा चुकी है। पहली बार सर्वेक्षण 2015 में कुल 476 शहरों का किया गया था। इसके बाद सर्वेक्षण 2016 में देश के दस लाख से अधिक जनसंख्या वाले 73 शहरों का सर्वेक्षण हुआ। केंद्रीय शहरी विकास मंत्री वैंकेया नायडू ने स्वच्छ सर्वेक्षण पुरस्कार का ऐलान किया। जिसमें मध्य प्रदेश के इंदौर शहर को देश के सबसे स्वच्छ शहर का खिताब दिया गया। दूसरे स्थान पर भी इसी प्रदेश का भोपाल शहर रहा। उत्तर प्रदेश के शहर 434 शहरों की इस सूची में काफी पीछे हैं। उत्तर प्रदेश में वाराणसी 32वें तथा इलाहाबाद 247वें स्थान पर है। 

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इस वर्ष के स्वच्छ सर्वेक्षण को देश के 73 शहरों की 37 लाख जनसंख्या पर किया गया। जिसमें 25 स्वच्छ शहरों रैंकिंग दी गयी है। सरकार के एक सर्वेक्षण के अनुसार देश के 434 शहरों में साफ-सफाई की स्थिति को देखा गया है। देश के टॉप 10 साफ शहरों में मध्य प्रदेश के दो शहर शामिल हैं। बाकी के 25 साफ शहरों में मध्य प्रदेश के कई शहर शामिल हैं, परंतु इसी बीच देश के एक बड़े राज्य उत्तर प्रदेश का एक भी शहर टॉप 25 साफ शहरों में शामिल नहीं है जिसके बाद स्थिति काफी चिंताजनक बन जाती है। इस सूची में देश के एक बड़े राज्य माने जाने वाले उत्तर प्रदेश की स्थिति काफी चिंताजनक बताई जा रही है।

स्वच्छ शहरों की लिस्ट में आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम को तीसरा जबकि गुजरात के सूरत शहर को चौथा स्थान हासिल हुआ। पिछले वर्ष के सर्वेक्षण में पहले पायदान पर रहने वाले कर्नाटक के मैसूर शहर को इस वर्ष पांचवा स्थान मिला। टॉप 50 शहरों की लिस्ट में गुजरात के 12 शहरों को जगह मिली है। गुजरात और छत्तीसगढ़ ऐसे राज्य हैं, जहां स्वच्छता की रैंकिंग में सबसे ज्यादा सुधार हुआ। इस सूची में देश के कई राज्यों से स्वच्छता को लेकर एक सकारात्मक प्रयास देखने को मिला है।

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उत्तर प्रदेश के शहरों का सर्वेक्षण में स्थान

केंद्र सरकार द्वारा स्वच्छ भारत सर्वेक्षण में देश के 434 शहरों में साफ़-सफाई की स्थिति को आंका गया है। जिसके तहत इन 434 शहरों में उत्तर प्रदेश के 62 शहर हैं जिन्हें इस सूची में स्वच्छता के आंकलन के अनुसार स्थान दिया गया है। इस सूची में उत्तर प्रदेश का सबसे साफ़ शहर बनारस है जिसे सूची में 32वाँ स्थान मिला है।

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इसी सूची में अलीगढ़ को 145वाँ स्थान, झांसी को 166वाँ स्थान, कानपुर को 175वाँ स्थान, सहारनपुर को 245वाँ स्थान, जौनपुर को 246वाँ स्थान, इलाहाबाद को 247वाँ स्थान, अयोध्या को 252वाँ स्थान, आगरा को 263वाँ, लखनऊ को 269वाँ स्थान, उरई को 273वाँ स्थान, बरेली को 298वाँ स्थान, चंदौसी को 305वाँ स्थान,

सुलतानपुर को 309वाँ स्थान, गोरखपुर को 314वाँ स्थान, ललितपुर को 320वाँ स्थान, मुरादाबाद को 321वाँ स्थान, रुद्रपुर को 325वाँ स्थान, शामली को 326वाँ स्थान, लोनी को 331वाँ स्थान, अकबरपुर को 333वाँ स्थान, इटावा को 336वाँ स्थान,

पूर्व नगर विकास मंत्री अाजम का रामपुर 399वें स्थान पर  

देवरिया को 338वाँ स्थान, मेरठ को 339वाँ स्थान, मुज़फ्फरनगर को 344वाँ स्थान, गाज़ियाबाद को 351वाँ स्थान, मथुरा को 352वाँ स्थान, मोदीनगर को 360वाँ स्थान, बलिया को 361वाँ स्थान, मऊनाथ भंजन(मऊ) को 370वाँ स्थान, पीलीभीत को 374वाँ स्थान, फिरोजाबाद को 375वाँ स्थान, फर्रुखाबाद को 377वाँ स्थान, संभल को 378वाँ स्थान, मैनपुर को 379वाँ स्थान, मुग़लसराय को 382वाँ स्थान, फैजाबाद को 383वाँ स्थान, बांदा को 385वाँ स्थान, बस्ती को 386वाँ स्थान, मिर्ज़ापुर को 389वाँ स्थान, अमरोहा को 393वाँ स्थान, रायबरेली को 394वाँ स्थान, आजमगढ़ को 398, रामपुर को 399वाँ स्थान, शिकोहाबाद को 401वाँ स्थान, एटा को 406वाँ स्थान, सीतापुर को 407वाँ स्थान, हाथरस को 408वाँ स्थान, कासगंज को 409वाँ स्थान, लखीमपुर को 410वाँ स्थान, फतेहपुर को 412वाँ स्थान, गाजीपुर को 413वाँ स्थान, उन्नाव को 417वाँ स्थान, बदायूं को 420वाँ स्थान, बरौत को 421वाँ स्थान, बुलंदशहर को 423वाँ स्थान, हापुड़ को 424वाँ स्थान, खुर्जा को 425वाँ स्थान, शाहजहांपुर को 426वाँ स्थान, बहराइच को 429वाँ स्थान, हरदोई को 431वाँ स्थान मिला है। उत्तर प्रदेश के गोडा को 434वाँ स्थान मिला है जिसके बाद यह देश का सबसे गंदा शहर बन गया है।

यह है आधार

सर्वेक्षण में ठोस कचरा प्रबंधन, घर-घर से कूड़ा उठाव, सड़कों की सफाई, कचरे का निष्पादन, निजी व सामुदायिक शौचालय की स्थिति, सफाई को लेकर लोगों की आदतों में सुधार और सफाई को लेकर शिक्षा को आधार बनाया गया था। शहरी विकास मंत्रालय की तरफ से क्वालिटी काउंसिल का गठन किया गया था।

स्वच्छता की दिशा में उत्तर प्रदेश के किसी भी शहर में ज्यादा फर्क देखने को नहीं मिल सका है। योगी सरकार के कार्यभार संभालने के साथ ही साफ-सफाई पर खासा ध्यान दिया गया था। राजधानी लखनऊ के कई स्थानों पर स्वच्छता अभियान भी चलाये गए थे। फिर भी इस राज्य के शहर स्वच्छता के मामले में काफी पीछे हैं। राज्य में गोंडा शहर गंदगी के मामले में शीर्ष पर है। जिसके बाद अब ऐसा माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश को विकास की शुरुआत स्वच्छता के साथ ही करनी होगी।

Posted By: Dharmendra Pandey

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