लखनऊ (जेएनएन)। प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार के सत्ता पर काबिज होते ही किरकिरी बने उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष वसीम रिजवी निशाने पर थे। धीरे-धीरे अपनी बैठ मजबूत करते हुए वसीम रिजवी ने अब पार्टी की नब्ज पकड़ ली है। 

वसीम रिजवी ने अब अयोध्या में भगवान राम की भव्य प्रतिमा स्थापित करने के प्रदेश सरकार के प्रस्ताव का स्वागत किया है। वक्फ बोर्ड ने आज ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को इस संबंध में एक पत्र भेजा है। इसमें कहा गया है कि भगवान राम की भव्य प्रतिमा में लगने वाले विशाल तरकश के लिए दस चांदी के तीर वक्फ बोर्ड भेंट करेगा।

इस पत्र में मुख्यमंत्री को वक्फ बोर्ड अध्यक्ष वसीम रिजवी ने दीपावली की शुभकामनाएं भी दी हैं। इसमें उन्होंने कहा है कि अखबारों के माध्यम से संज्ञान में आया है कि प्रदेश सरकार ने अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की भव्य प्रतिमा (एशिया की सबसे बड़ी) स्थापित कराने का प्रस्ताव बनाया है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि अयोध्या में मर्यादा पुरुषोत्तम राम जी की एशिया की सबसे बड़ी मूर्ति लगाने के आपके प्रस्ताव की बोर्ड सराहना करता है।

वक्फ बोर्ड प्रस्ताव की सराहना करता है, क्योंकि अयोध्या एक सांस्कृतिक शहर है। वहां भव्य राम की प्रतिमा स्थापित होने से उत्तर प्रदेश का गौरव पूरी दुनिया में बढ़ेगा। वहां पर प्रतिमा स्थापित होती है तो वक्फ बोर्ड के माध्यम से भगवान राम की प्रतिमा में लगे तरकश के लिए दस चांदी के तीर भेंट किए जाएंगे। 

वसीम रिजवी ने आगे लिखा है कि शिया समुदाय के अनेक सम्मानित व्यक्तियों ने मुझसे कहा है कि अगर अयोध्या में मूर्ति स्थापित होती है तो शिया समाज की तरफ से बोर्ड के माध्यम से भगवान राम की मूर्ति में लगे तरकश के लिए दस चांदी के तीर भेंट किए जाएंगे। भगवान राम ने जिस तरह अपने तीरों से राक्षसों का अंत किया था, उसी तरह आज भारत में आतंकवाद रूपी राक्षसों का अंत किया जाना देश हित में जरूरी है।

इससे पहले अयोध्या में यूपी सरकार के भगवान श्रीराम की मूर्ति लगाए जाने के प्रस्ताव पर उत्तर प्रदेश शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने ऐलान किया कि वह जरूरत पडऩे पर सरकार को मूर्ति के लए जमीन देगा। शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन सैयद वसीम रिजवी ने अयोध्या में भगवान राम की भव्य मूर्ति लगाने के यूपी सरकार के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि बोर्ड इस काम में सहयोग करेगा।

रिजवी ने कहा कि बोर्ड का मानना है कि अयोध्या में राम जन्मभूमि पर वर्ष 2018 में राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाए। उन्होंने कहा कि बोर्ड राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को आपसी समझौते से हल कराने को लेकर सक्रिय है। बोर्ड ने पक्षकारों से बात भी की है और सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष भी रख चुका है।

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शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने अयोध्या मसले के हल को निकालने के लिए योगी सरकार से सख्त कदम उठाने की भी मांग की है। रिजवी ने कहा कि नवाब वाजिद अली शाह के समय भी अयोध्या विवाद सामने आया था। उस समय आरोप लगा था कि कुछ लोगों ने मंदिर के पास एक मस्जिद को तोड़ दिया।

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इसके बाद तीन लोगों की जांच कमेटी ने आरोप को गलत पाया था। इसके बावजूद मौलाना आमीर अली वहां मस्जिद बनवाने पर अड़ा था। जिसके बाद नवाब वाजिद अली शाह ने उसे मार गिराया।

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इससे पहले भी शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सैयद वसीम रिजवी ने अयोध्या के राम मंदिर/बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान की दिशा में नये सिरे से पहल की थी। उन्होंने अयोध्या पहुंचकर हिन्दू पक्षकारों से वार्ता की प्रक्रिया शुरू की है।

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रिजवी ने हिन्दू पक्षकार एवं दिगंबर अखाड़ा के महंत सुरेश दास समेत कुछ अन्य हिन्दू धर्माचार्यों से मुलाकात कर वार्ता की। महंत सुरेश दास से वार्ता के दौरान रिजवी ने कहा विवादित मस्जिद सुन्नी नहीं बल्कि शिया वक्फ बोर्ड की है।

Posted By: Dharmendra Pandey

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