मानव वन्य जीव संघर्ष बढ़ा रहा सरकार का बजट, दो वर्ष में पांच जिलों में साढ़े पांच करोड़ रुपये खर्च
Manav Vanya Jeev Sangharsh: मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए जनपदों में सर्च अभियान, टीमों की तैनाती, पिंजरा लगाने व जागरूकता अभियान में दो करोड़ 71 ल ...और पढ़ें
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बलरामपुर के महराजगंज तराई में बेला साखी रेत में बिछाए जाल में फंसा तेंदुआ -जागरण
जागरण टीम, लखनऊ: उत्तर प्रदेश की बेहद उपजाऊ मानी जाने वाली तराई पट्टी के जिलों में बाघ व तेंदुओं की तेजी से बढ़ती संख्या ने मानव-वन्यजीव संघर्षों की घटनाओं को भी काफी हद रफ्तार दे दी है। इनके संघर्ष पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश सरकार को अतिरिक्त बजट की व्यवस्था करनी पड़ रही है, जिसका बोझ व्यर्थ में आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।
दो वर्ष में तराई के लखीमपुर खीरी, बलरामपुर, सीतापुर व बहराइच से मानव-वन्यजीव संघर्ष के आंकड़े काफी डराने वाले हैं। इन जिलों में जानवरों के हमले में दो वर्ष में 65 जन हानि हुई है और जानवर भी मारे गए हैं।
खीरी जिले में बाघ और तेंदुओं ने दो वर्ष में 16 और बलरामपुर में पांच लोगों का शिकार किया। बहराइच में तो भेड़िये बच्चों की जान का दुश्मन बन गए। दो वर्ष में खूंखार भेड़ियों ने 31 लोगों को मौत के घाट उतार दिया। सीतापुर, बलरामपुर व श्रावस्ती में भी तेंदुए आक्रामक हैं।
मुआवजे व सुरक्षा पर बड़ा खर्च
तराई पट्टी के पांच जिलों में जंगली जानवरों के हमले में 65 लोगों की मौत के बाद मुआवजे व सुरक्षा पर पांच करोड़ 56 लाख खर्च हुए हैं। दो वर्ष में लखीमपुर, सीतापुर, बहराइच, लखनऊ व बलरामपुर जिले बाघ, तेंदुए, हाथी व भेड़ियों के लगातार खूंखार होने से दहशत में हैं।
मानव वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए जनपदों में सर्च अभियान, टीमों की तैनाती, पिंजरा लगाने व जागरूकता अभियान में दो करोड़ 71 लाख का अतिरिक्त बोझ पड़ा है। वहीं 57 मृतकों के परिवार को दो करोड़ 85 लाख मुआवजा दिया गया। दो नेपाली मृतकों को छोड़ दिया जाए, तो अभी नौ मृतकों के स्वजन को 45 लाख रुपये और दिए जाने हैं। लखनऊ में सुरक्षा व बचाव के नाम पर 90 लाख रुपये खर्च किए गए।
बहराइच में 41 की मौत, 2.55 करोड़ खर्च
बहराइच में दो वर्ष के दौरान वन्यजीवों के हमले में 41 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 131 लोग घायल हुए। इनमें भेड़ियों के हमले में 25 लोगों की मौत एवं 110 लोग घायल हुए। वन विभाग की 32 टीमें अभियान चलाकर हमलों को रोकने के प्रयास में है। अब तक दस भेड़ियों को मारा जा चुका है। सात को लखनऊ व गोरखपुर चिड़ियाघर में भेजा जा चुका है। इस अभियान में लगभग 90 लाख खर्च हो चुका है।

बाघ के हमले में छह लोगों की जान जा चुकी है, दस लोग घायल हो चुके हैं। तेंदुए के हमले में आठ लोगों की जान गई और इतने ही लोग घायल हुए हैं। दो तेंदुओं को पिंजरे में कैद कर वन विभाग ने जंगल में छोड़ा। हाथी के हमलों में भी दो लोगों की जान जा चुकी है। तीन लोग घायल हो चुके है। भेड़िए के हमले में मृतक 23, बाघ के हमले में मारे जाने वाले चार, तेंदुए के शिकार पांच व हाथी के हमले में मृतक एक व्यक्ति के परिवारजन को एक करोड़ 65 लाख मुआवजा दिया जा चुका है।
लखीमपुर में लाखों खर्च, नहीं पकड़ी गई बाघिन
खीरी के इमलिया गांव में सितंबर 2024 से शुरू हुआ आपरेशन बाघिन एक वर्ष तक चला। इसमें तमाम संसाधनों जैसे ड्रोन, हाथी, वाहनों के पेट्रोल, भोजन आदि पर विभाग का लगभग 15 लाख रुपये खर्च हुआ। अंत में शावक के पिंजरे में कैद होने की ममता में बाघिन स्वतः पिंजरे में कैद हो गई।
गोला रेंज के मन्नापुर में आक्रामक हुई बाघिन को भी ट्रैंकुलाइज करने के लिए अगस्त 2025 में आपरेशन बाघिन शुरू हुआ, जिसमें करीब पांच लाख खर्च होने का अनुमान है। बाघिन किसी दूसरे क्षेत्र में चली गई है। दो वर्ष के भीतर बाघिन व तेंदुए के हमले में 16 लोगों की मौत हुई। इन मृतकों के स्वजन को 80 लाख का मुआवजा दिया जाएगा, इसमें 13 लोगों मिल चुका है।
सीतापुर में 77 लाख खर्च, मुआवजा व सुरक्षा
मानव वन्यजीव संघर्ष में सीतापुर के वन विभाग पर आर्थिक बोझ भी बढ़ रहा है। जिले में अब तक चार बाघों और इतने ही तेंदुओं को पकड़ने में विभाग को 57 लाख रुपये खर्च करने पड़े हैं। इसके अलावा इनके हमले में मृतक के स्वजन को मुआवजा देने में 20 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। बाघ को पकड़ने के लिए दुधवा के विशेषज्ञों के साथ वाइल्ड ट्रस्ट आफ इंडिया की टीम महोली के नरनी गांव में पिछले वर्ष एक महीने तक पड़ी रही थी। इसके बाद एक बाघ, एक बाघिन और एक शावक को पकड़ने में सफलता मिली थी।

बलरामपुर के हरैया सतघरवा के भुजेहरा चौराहे के पास गेहूं की खेत में तेंदुआ -जागरण
बलरामपुर में सात की मौत, 44 लाख की चोट
बलरामपुर के सोहेलवा जंगल से सटे भारत-नेपाल सीमावर्ती गांवों में बीते दो वर्ष में तेंदुए के हमले में नेपाली महिला समेत सात लोगों की मौत हो चुकी है।
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इनमें से छह मृतकों के स्वजन को 30 लाख रुपये मुआवजा दिया गया। पचपेड़वा के परसरामपुर गांव में तेंदुए के हमले में मारी गई नेपाली महिला का शव परिवारजन नेपाल ले गए।
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इस कारण उन्हें मुआवजा नहीं मिला। वन्यजीव आवासों का एकीकृत विकास (आइडीडब्ल्यूएच) योजना से दो वर्षों में लगभग सात लाख रुपये पंफ्लेट, ड्रोन, ई-रिक्शा से प्रचार-प्रसार, पिंजरा लगाने आदि पर खर्च हुए। इतनी ही धनराशि दूसरे मद में भी सुरक्षा व जागरूकता के नाम पर खर्च हुई।

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