तराई पट्टी के जिलों में वन्यजीवों का आतंक, बाघ-तेंदुओं के हमले में 35 की गई जान; 25 को तो भेड़ियों ने मार डाला
प्रदेश की तराई पट्टी में मानव-वन्यजीव संघर्ष तेजी से बढ़ा है, जिससे खीरी, बहराइच, बलरामपुर, और सीतापुर में कई मौतें हुई हैं। बाघ, तेंदुए और हाथियों के ...और पढ़ें

जागरण टीम, लखनऊ। प्रदेश की तराई पट़टी के जिलों में बाघ, तेंदुओं की तेज रफ्तार बढ़ती संख्या ने मानव-वन्यजीव संघर्षों की घटनाओं को भी काफी हद तक बढ़ा दिया। पिछले दो साल में तराई के खीरी, बहराइच, बलरामपुर, सीतापुर, लखनऊ के जो आंकड़े सामने आ रहे हैं वह डराने वाले हैं। अकेले खीरी जिले में बाघ और तेंदुओं ने मिलकर दो साल में 16 लोगों को मौत के घाट उतार दिया तो बलरामपुर में पांच लोगों का शिकार किया।
इतना ही नहीं खीरी जिले में हाथियों ने भी जमकर उत्पात किया और दो लोगों को पटक कर मार डाला। बहराइच में भी उदंड हाथियों ने दो ग्रामीणों की जान दो साल में ले ली। उधर बहराइच जिले की बात करें तो यहां भेड़िये बच्चों की जान के दुश्मन बन गए। दो साल में 31 लोगों को खूंखार भेड़ियों ने मौत के घाट उतार दिया। सीतापुर, बलरामपुर, श्रावस्ती में भी तेंदुए आक्रामक होने लगे हैं।
खीरी जिले में दुधवा के बफरजोन में बाघ-तेंदुओं के हमले तेजी से बढ़े हैं। तीन वर्षों में वन्यजीव गणना के दौरान 93 से बढ़कर तेंदुए 275 हो गए हैं। जंगल में बाघों से टकराव के डर से तेंदुए तेजी से आबादी के नजदीक पहुंच रहे हैं। धौरहरा, शारदानगर, निघासन रेंज में तेंदुए लगातार हमलावर हैं। तेंदुओं के आक्रामक होने के बाद वन विभाग सक्रिय हुआ तो अकेले बफरजोन से 13 तेंदुए और दक्षिण खीरी वन प्रभाग से चार बाघों को पकड़कर दुधवा नेशनल पार्क के जंगलों में छोड़ा जा चुका है।
तेंदुओं की बढ़ती संख्या से केवल खीरी ही नहीं, बल्कि नदियों के कछार से सहारे बाघ और तेंदुए सीतापुर, लखनऊ तक अपनी सीमा बढ़ा रहे हैं। बाघों ने मैलानी, संपूर्णानगर, महेशपुर, भीरा में दो वर्षों में आठ लोगों को मौत के घाट उतार दिया है। हाथियों ने महेशपुर और मझगई रेंज में खेत की रखवाली कर रहे किसानों को मार दिया है।
किसानों की नई परेशानी बने हाथी भी पिछले पांच वर्ष से लगातार पीलीभीत के रास्ते महेशपुर, मैलानी और इस वर्ष मझगई रेंज आ गए हैं। हाथी किसानों पर हमलावर होने के साथ ही उनकी गन्ने, लाही और गेहूं की फसल रौंद रहे हैं। साथ ही दो साल में महेशपुर और मझगई रेंज में दो लोगों को मौत के घाट भी उतार चुके हैं।
सीतापुर जिले में महोली, बिसवां, लहरपुर, मिश्रिख और महमूदाबाद तहसील क्षेत्रों में छोटी नदियों और जंगलों की उपलब्धता के चलते तेंदुओं ने ठिकाना बना लिया है। महोली, एलिया, लहरपुर, मिश्रिख में बाघ और अन्य क्षेत्रों में तेंदुए की सक्रियता रहती है। महोली में पिछले चार वर्षों से बाघों का ठिकाना होने की पुष्टि वाइल्ड ट्रस्ट आफ इंडिया ने वर्ष 2022 में ही कर दी थी।
वहीं महोली के नरनी गांव में 22 अगस्त 2025 को बाघ के हमले में गांव के ही सौरभ दीक्षित की मौत हो गई थी। 12 फरवरी 2025 को मिश्रिख के मधवापुर वन खंड में खाईं में बाघ का शव मिला था। उधर, इसी वनरेंज के बसौली गांव में 28 सितंबर को तेंदुआ पकड़ा गया था। अब तब जिले में कुल चार बाघ पकड़े जा चुके हैं। इसमें तीन महोली के जंगल से व एक लहरपुर में पकड़ा गया था। इसके अलावा चार तेंदुआ पकड़े जा चुके हैं। एक बाघ को बहराइच के जंगल, बाघिन व एक शावक को गोरखपुर व एक बाघ को कानपुर चिड़ियाघर में छोड़ा गया था।
बहराइच में दो साल के दौरान वन्यजीवों के हमले में कुल 41 लोगों की जान जा चुकी है । 131 लोग घायल हो चुके हैं। भेड़ियों के हमले में 25 लोगों की जान जा चुकी है। 110 लोग घायल हो चुके है। वन विभाग की 32 टीमें अभियान चलाकर हमलों को रोकने के प्रयास में हैं। अब तक 10 भेड़ियों को मारा जा चुका है। सात भेड़ियों को पकड़कर लखनऊ व गोरखपुर चिड़ियाघर में भेजा जा चुका है। इस अभियान में लगभग 90 लाख खर्च हो चुका है।

बहराइच में बाघ के हमले में छह लोगों की जान जा चुकी है, 10 लोग घायल हो चुके हैं। तेंदुए के हमले में आठ लोगों की जान जा चुकी है और आठ लोग घायल हुए हैं। दो तेंदुओं को पिंजरे में कैद कर वन विभाग ने जंगल में छोड़ा। हाथी के हमलों में भी दो लोगों की जान जा चुकी है। तीन लोग घायल हो चुके है। वन्यजीवों के हमलों के चलते कैसरगंज, महसी व मिहीपुरवा तहसील इलाके के लगभग 130 गांवों में दहशत है।
बलरामपुर में भारत-नेपाल सीमा पर जंगलवर्ती गांवों में वन्य जीवों का आतंक जानलेवा है। दो माह के अंदर तेंदुए के हमले में नेपाली महिला समेत पांच लोगों की मौत हो चुकी है। 25 दिसंबर को पचपेड़वा के परसरामपुर गांव में जंगल के रास्ते आ रही नेपाली महिला कपिलवस्तु निवासिनी 28 वर्षीय उर्मिला की जंगली जानवर के हमले में मौत हो गई। इसी दिन पचपेड़वा के विशुनपुर कोड़र गांव निवासिनी 25 वर्षीय कमला की भी वन्य जीव के हमले में जान चली गई।
दोनों मौत तेंदुआ के हमले में हुई या बाघ के, इसे लेकर वन विभाग संशय में है। इससे पूर्व 29 नवंबर को हरैया सतघरवा के जंगल से सटे गांव रेहारपुरवा नेवलगंज में तेंदुए ने मां के बगल लेटे डेढ़ वर्षीय रोहित को मार डाला था। 11 नवंबर को पचपेड़वा के पिपरा सड़वा गांव निवासी 55 वर्षीय विकास व आठ नवंबर को लौकी बीट में 25 वर्षीय कृष्णा पासवान की तेंदुए के हमले में जान गई थी।
लखनऊ काकोरी के रहमान खेड़ा में 12 दिसंबर 2024 से पाच मार्च 2025 तक बाघ की दहशत रही। यह अलग बात है कि मानव वन्यजीव संघर्ष तो नहीं हुआ लेकिन हर कोई अपनी जान को लेकर चिंतित था, कहीं बाघ का हमला उस पर न हो जाए। अब लखनऊ में तीन तेंदुओं की मौजूदगी से दहशत है। कुछ दिन पहले ही रहमान खेड़ा में तेंदुए ने एक जानवर को निशाना बनाया था लेकिन उसके बाद से वह नजर नहीं आ रहा है।
इसी तरह से कैंट क्षेत्र की इच्छुपुरी कालोनी से सड़क पार कर रहे तेंदुए को कार सवार ने अपने कमरे में कैद किया था। इस तेंदुए के पगमार्ग भी बगल के गन्ना अनुसंधान केंद्र में पाए गए थे। कुर्सी रोड स्कॉर्पियो क्लब के पास तेंदुआ दिखाई दिया था जो अब नजर नहीं आ रहा है।
13 फरवरी को एक तेंदुआ मोहन रोड स्थित एक विवाह समारोह में घुस गया था जिससे दहशत फैलने से कई लोग चोट खा गए थे। वन विभाग की टीम को उसे पकड़ने में करीब तीन घंटे लगे थे और तेंदुए के हमले में वन कर्मी भी घायल हो गया था। डीएफओ अवध सितांशु पांडेय का कहना है कि जंगल रास्ते से भटककर वन्यजीव लखनऊ में आ जाते है। पिछले दिनों अलग-अलग इलाकों में दिखे तीन तेंदुओं के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। वन विभाग की टीम लगातार निगरानी कर रही है।
पति की मौत के बाद घट गई कमाई, बढ़ गईं परेशानियां
लखीमपुर : सोलह माह पहले बाघिन के हमले में परिवार के कमाऊ पति को खोने वाली इमलिया अजान निवासी राजकुमारी को अब अपना पांच लोगों का परिवार चलाने के लिए तरह-तरह के संघर्ष और जतन करने पड़ रहे हैं। कमाऊ पति अंबरीश की मौत हो जाने से उसके परिवार की कमाई घट गई, जिससे विधवा महिला अब दोहरी जिम्मेदारी निभाने को मजबूर है। 27 अगस्त 2024 को खेत में काम करते समय गन्ने में छिपी बाघिन ने हमला कर 45 वर्षीय अंबरीश भारती को मौत के घाट उतार दिया था।
इस घटना से परिवार के सामने रोटी रोटी चलाने का संकट खड़ा हुआ। घटना के बाद मृतक अपने पीछे अपनी पत्नी राजकुमारी, पुत्र सचिन, मंजीत, दो पुत्रियों मोनिका व लक्ष्मी को छोड़ गया है। कमाऊ पति मजदूरी पेशा से महीने में दस हजार साल भर में औसतन एक लाख रुपए की कमाई कर लेता था। जिसकी भरपाई के लिए आश्रितों के पास मात्र ढाई बीघा जमीन है। पति की मौत के बाद राजकुमारी ने किसी तरह पुत्री मोनिका की शादी की।
तेंदुए के हमले में हुई बच्चों की मौत
शारदानगर रेंज में तेंदुओं ने बच्चों को निशाना बनाया। नौ जुलाई की शाम लगभग साढ़े छह बजे फैय्याजुद्दीन उर्फ गुड् खान निवासी खंभार खेड़ा की पुत्री अनाया घर के बाहर खेल रही थी, तभी तेंदुआ उसे उठा ले गया। घर से करीब पांच सौ मीटर की दूरी पर बच्ची घायल अवस्था में मिली, जिसकी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई। ज्ञानपुर निवासी सुशील कुमार भीरा पलिया हाईवे किनारे छप्पर डालकर रहते हैं।
26 जुलाई रात करीब 12 बजे घर के बाहर सुशील अपने पुत्र छह वर्षीय बादल के साथ सो रहा था, तभी तेंदुआ बादल को उठा ले गया। सुबह बच्चे का शव गन्ने के खेत से बरामद हुआ। गुस्साए लोगों ने भीरा पलिया हाईवे जाम किया। चार अगस्त को शीतलापुर के मैनीपुरवा निवासी 60 वर्षीय सोमवती घर की गैलरी में सो रही थी, रात में तेंदुआ उठा ले गया। अंधेरा अधिक होने के कारण रात में पता नहीं चला। सुबह अधखाया शव बरामद हुआ था।
पांच अक्टूबर 2025 को गंगाबेहड़ निवासी मुनव्वर का 12 वर्षीय पुत्र छोटू को रात करीब सात बजे तेंदुआ उठा ले गया। काफी खोजबीन के बाद रात करीब 10 बजे गन्ने के खेत से शव बरामद हुआ। पुलिस और ग्रामीणों में झड़प हुई। ग्रामीणों ने पत्थरबाजी भी की। 18 अक्टूबर को खंभारखेड़ा चीनी मिल के पास झाऊपुरवा निवासी नत्था रात में पड़ोस के गांव अचाकापुर गांव में मन्दिर पर कथा सुनने गए थे। रात में पेशाब करने के लिए खेत की तरफ गए तभी तेंदुआ हमला कर दिया शोर मचाने पर तेंदुआ भाग गया, जिससे नत्था के शरीर पर निशान बन गए।
वन्यजीवों के हमले
- बाघ -09
- तेंदुआ -29
- भेड़िया- 25
- हाथी -04
(यह आंकड़े 01 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2025 तक हैं )

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